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रघुवर सरकार पुलिस अफसर कराते थे नेताओं की निगरानी, कांके रोड में खुला था स्पेशल ब्रांच का अवैध ऑफिस, CID में होती थी फोन टेपिंग- सरयू राय

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Ranchi: रघुवर सरकार में स्पेशल ब्रांच के अफसर नेताओं पर नजर रखते थे. ऐसा करने के लिए गोंदा थाना के बगल में स्पेशल ब्रांच का एक अवैध कार्यालय खोला गया था. सीडब्लूसी, सदस्य बैजनाथ प्रसाद इस कार्यालय के संपर्क सूत्र के रूप में काम करता था. रघुवर पर ऐसा आरोप पूर्व मंत्री सरयू राय ने लगाया है.

उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन को इस बाबत चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी लिखते हुए उन्होंने पूरे मामले पर एक एसआइटी गठन करने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि मामला काफी गंभीर है. ऐसे में जांच होनी ही चाहिए.

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क्या कहा है सरयू राय ने सीएम को लिखी चिट्ठी में

सरयू राय ने इस मामले पर पहले डीजीपी को चिट्ठी लिखी थी. एक अप्रैल को राज्य के डीजीपी को चिट्ठी लिखने के बाद उन्होंने एक ट्वीट भी किया था. जिसमें साफ तौर से इशारा रघुवर सरकार के दौरान पुलिसिया कार्यप्रणाली की तरफ था.

सरयू राय ने मुख्यमंत्री को लिखी चिटठी में कहा है कि रघुवर दास सरकार के समय विरोधी नेताओं के मामले में स्पेशल ब्रांच के जरिये अवैध तरीके से निगरानी रखी जाती थी. किसी जनप्रतिनिधि की निजी स्वतंत्रता के हनन के मामले में शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की सहमति के बिना ऐसे कुकृत्य को अंजाम देने की हिम्मत किसी वरीय पुलिस पदाधिकारी की नहीं होगी.

तत्कालीन भवन निर्माण विभाग के मंत्री तथा सचिव, डीजीपी, गृह सचिव के सचिव को भी इसकी जानकारी जरूर होगी. यह गहरा सवाल है. ऐसी कार्य संस्कृति को बदलना और इसके लिये जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित करना जरूरी है. ऐसे में एक एसआइटी का गठन हो और जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

 

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सरयू राय ने डीजीपी को क्या भेजी थी सूचना

सरयू राय ने 1 मई को डीजीपी को पत्र लिखकर झारखंड पुलिस की विशेष शाखा द्वारा उनकी गतिविधियों पर नजर रखे जाने का आरोप लगाया था. उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि 2017 में संताल परगना में मेरे ऊपर नजर रखी जा रही थी. दूसरी घटना 2018 में मई महीने में हुई थी. राजभवन के बाहर भी इस काम में स्पेशल ब्रांच के एक सिपाही की भूमिका दिखी थी.

दोनों ही घटनाओं में मेरे ऊपर नजर रखने वाले विशेष शाखा के पुलिस कर्मी थे. साहेबगंज में संबंधित व्यक्ति के पकड़े जाने पर उसने स्वीकारा था कि वो विशेष शाखा में इंस्पेक्टर है. मेरी सुरक्षा में तैनात स्पेशल ब्रांच के इंस्पेक्टर मुंडा जी का बैचमेट है. उसने यह भी बताया था कि साहेबगंज में आपकी गतिविधि की सूचना हर घंटे मांगी जा रही है.

राजभवन के सामने नगावार हरकत करते हुए पकड़ाए सिपाही ने कबूला था कि वो विशेष शाखा का सिपाही और अपने विभाग के डीआइजी के आदेश पर वो वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है. इन दोनों घटनाओं के बारे में उसी वक्त तत्कालीन डीजीपी को सूचित कर दिया गया था.

हाल के दिनों में मुझे कुछ चौंकाने वाली सूचनाएं मिली हैं. जो अगर सही है तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंताजनक सवाल खड़े करती है. मुझे बताया गया है कि रघुवर सरकार के निर्देश पर रांची के कांके रोड स्थित गोंदा थाना के पीछे एक भवन में स्पेशल ब्रांच का एक अनाधिकृत कार्यालय था. जिसमें आठ कम्प्यूटर और आठ लोग नियुक्त थे जो स्पेशल ब्रांच के थे.

यहां पर रिकॉर्डिंग करने वाली संवेदनशील मशीनें भी लगी थी. उस मकान से सटे हुए बैद्यनाथ प्रसाद का आवास था. जो उस समय चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी में कार्यरत थे और अभी भी हैं. वे इस कार्यालय के संपर्क सूत्र के रूप में सक्रिय थे. उन्हें विशेष शाखा की ओर से दो अंगरक्षक मिले हुए थे. साथ ही दो चालक भी दिया गया था. कार्यालय में डीएसपी स्तर के तीन अधिकारी नियुक्त थे.

इस कार्यालय से विभिन्न नेताओं की गतिविधि पर नजर रखी जाती थी और उनके फोन टैप होते थे. इसी प्रकार की एक व्यवस्था सीआइडी मुख्यालय में भी की गयी थी. जिसके लिए स्पेशल ब्रांच के 15 कर्मी नियुक्त थे.

सीआइडी कार्यालय में चल रहा यह सिस्टम हाल ही में बंद किया गया है. विशेष शाखा का अनाधिकृत कार्यालय शायद निष्क्रिय है. अगर यह सारी सूचनाएं सही हैं तो यह नागरिकों की निजी स्वतंत्रता और पुलिस-प्रशासन के वैधानिक आचरण के प्रतिकूल है.

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