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जाति आधारित जनगणना को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में सत्ता पक्ष, दीपक प्रकाश की भागीदारी से भाजपा हलकान

सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार जातीय जनगणना से कर चुकी है इन्कार

Ranchi : केंद्र सरकार ने भले ही सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर यह कह दिया हो कि जातिगत जनगणना कराना संभव नहीं है लेकिन झारखंड की राजनीति में सरकार में शामिल दल इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है. रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद इसे लेकर तैयारी तेज हो गई है.

हालांकि केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि यह संभव नहीं है, लेकिन इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात करने वाले शिष्टमंडल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की भागीदारी से पार्टी के लोग ही हलकान हैं. यह मामला राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है. भाजपा में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जब जाति आधारित जनगणना पर केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सर्वदलीय शिष्टमंडल का हिस्सा कैसे बने ?

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विधानसभा में नीलकंठ सिंह मुंडा ने किया था समर्थन

जातिगत जनगणना का मामला झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र से ही रंग ले रहा था. सदन में सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस मामले को मजबूती के साथ उठाया था. उस समय भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा था कि भाजपा जातिगत जनगणना के पक्ष में है. इसके बाद मुख्यमंत्री ने सदन में घोषणा की थी कि बहुत जल्द इस मामले को लेकर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलेगा.

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भाजपा ने कहा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होगी पार्टी

सदन में भले ही विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने जातिगत जनगणना का समर्थन किया था लेकिन प्रदेश भाजपा इसके पक्ष में नहीं थी. सत्र के बाद भाजपा ने इस मुद्दे के विपक्ष में अपनी मंशा जाहिर की थी. केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाक़ात से दो दिनों पहले तक भाजपा की तरफ से यह कहा जा रहा था कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में पार्टी शामिल नहीं होगी. लेकिन इस प्रतिनिधिमंडल में न सिर्फ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश शामिल ही हुए बल्कि उन्होंने ऐसे ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जिसमें केंद्र सरकार के निर्णय की आलोचना की गयी थी.

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शिष्टमंडल में जाने से कोई परेशानी नहीं : बाबूलाल

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी इसे स्वाभाविक प्रक्रिया मानते हैं. उनका कहना है कि शिष्टमंडल के साथ जाने में कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना पुराना मसला है. 2011 में जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी, तो भी यह मांग उठी थी. उस समय यूपीए ने इसे ठुकरा दिया था.

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केंद्र ले सकारात्मक निर्णय, अन्यथा होगा सत्याग्रह : राजेश ठाकुर

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि जातिगत जनगणना समय की मांग है. केंद्रीय गृहमंत्री से इस संबंध में आग्रह किया गया है. राजेश ठाकुर ने कहा कि अगर इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं किया गया, तो सत्याग्रह होगा. उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना की मांग कई प्रदेशों से उठ रही है. यह होनी भी चाहिए. केंद्र सरकार इस पर राजनीति करने के बजाय जातिगत जनगणना कराने के पक्ष में निर्णय ले. जाहिर है कि कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को बढाने का निर्णय ले लिया है.

जब पशु, पेड़-पौधे की गणना हो सकती है तो जातिगत जनगणना क्यों नहीं : झामुमो

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी इस अहम राजनीतिक मुद्दे पर तेवर तल्ख़ किये हुए है. झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जब देश में पशुओं से लेकर पेड़-पौधे की गणना हो सकती है, तो जाति आधारित जनगणना क्यों नहीं की जा सकती है. यह अहम मुद्दा है. समान विचारधारा वाले दलों से इस बाबत बातचीत की जाएगी. इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली गतिविधियों में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा शामिल होने पर विचार करेगा.

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सैद्धांतिक रूप से सहमत लेकिन व्यावहारिक कठिनाइयां भी : दीपक प्रकाश

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने जातिगत जनगणना के मसले पर कहा कि सैद्धांतिक रूप से हम इससे पूरी तरह से सहमत हैं, लेकिन सच यह भी है कि व्यावहारिक रूप से इसे लागू करने में कई कठिनाइयां हैं. उन्होंने कहा कि जहां तक पिछड़ों के हितों की बात है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी सबसे ज्यादा चिंता है.
प्रधानमंत्री लगातार सर्व समाज के हितों के लिए काम कर रहे हैं. चाहे नौकरियों में आरक्षण का मामला हो या आयोग के गठन का. केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी सबसे ज्यादा संख्या पिछड़ों की ही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मेडिकल की पढाई में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. इतना ही नहीं मोदी कैबिनेट के दूसरे विस्तार में पिछड़ी जातियों से 27 मंत्री बने हैं.

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