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पाकिस्तान में आर्थिक कंगाली, 32 सालों में पहली बार आतंकी शिविरों पर ताले लगाये गये

Islamabad : पाकिस्तान ने 32 सालों में पहली बार आतंकी शिविरों पर ताला लगा दिया है. कश्मीर के जाने-माने अखबार कश्मीर रीडर ने 20 मई को खबर प्रकाशित कर बताया कि पाकिस्तान ने उन सभी आतंकवादी संगठनों के शिविरों पर ताला लगा दिया है, जो उसके इशारों पर कश्मीर में गड़बड़ी फैलाते थे. क्या पाकिस्तान डर गया है? क्या वो भारत सरकार के बिछाए राजनयिक जाल में बुरी तरह फंस चुका है.

जो भी हो लेकिन पाकिस्तान को पहली बार वाकई पसीना आ रहा है. उसकी विदेशी मुद्रा का खजाना भी खाली हो चुका है. उसे उस लिस्ट में डाल दिया गया है, जिसमें उन देशों को डाला जाता है, जो आतंकवादियों की मदद करते पाये जाते हैं. इन देशों को कोई देश किसी तरह की मदद नहीं करता.

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यूनाइटेड जिहादी काउंसिल से जुड़े 12 संगठनों के ऑफिस सीलबंद

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खबरों के अनुसार एक दो दिन पहले पाकिस्तान ने 32 सालों में पहली बार आतंकी शिविरों पर ताला लगा दिया है.   कश्मीर रीडर  के अनुसार पाकिस्तान ने उन सभी आतंकवादी संगठनों के शिविरों पर ताला लगा दिया है, जो उसके इशारों पर कश्मीर में गड़बड़ी फैलाते थे. पाकिस्तान ने यूनाइटेड जिहादी काउंसिल से जुड़े 12 संगठनों के ऑफिसों को सीलबंद कर दिया. इन आतंकी संगठनों को चलाने के लिए पाकिस्तान उन्हें जो आर्थिक मदद देता था या जो आर्थिक मदद उन्हें बाहर से मिलती थी, उस पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है.

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भारत के एयर स्ट्राइक ने पाकिस्तान के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया

पुलवामा के हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बालाकोट में आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक की. भारत के इस कदम ने पाकिस्तान के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया. उसे समझ में आ गया कि अब भारत में वो अपनी जमीन से प्रायोजित आतंकवाद नहीं चला सकता. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के नहीं चाहने के बाद भी चीन को मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित करने का समर्थन करना पड़ा.

इन दोनों बातों से अगर पाकिस्तान ने पहली बार दबाव महसूस करना शुरू किया तो आर्थिक कंगाली ने नसें और ढीली कर दीं. उसने जब पिछले दिनों आर्थिक मदद के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन के आगे हाथ फैलाए तो निराशा हाथ लगी थी.

गले की फांस बनी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट

आईएमएफ उसे कर्ज दे जरूर रहा है, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ. इसमें अड़चन बनी हुई है एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट, जिसमें पाकिस्तान का नाम पिछले दिनों शुमार कर लिया गया. इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है, जिनके खिलाफ आतंकवादियों को सहयोग और आर्थिक मदद के आरोप के साथ साक्ष्य भी होते हैं. जैसे ही पाकिस्तान का नाम एफएटीएफ की लिस्ट में आया, उसके होश फाख्ता हो गये. क्योंकि जब तक उसका नाम इस लिस्ट में रहेगा, तब तक कोई देश उसकी आर्थिक मदद के लिए आगे नहीं आने वाला.

लिहाजा पाकिस्तान इस समय चारों ओर हाथ-पैर फेंक रहा है कि किसी तरह उसे इस सूची से बाहर किया जाये. पाकिस्तान में 32 सालों से चल रहे आतंकी कैंपों को बंद करने का कदम इसी दिशा में उठाया गया है.   हालात, जो किसी भी देश को दीवालियापन की ओर ले जाते हैं. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह खाली है.

बाहर से उसके लिए कुछ भी मंगाना मुश्किल हो चला है. तेल तक मंगाने के लाले हैं. एक डॉलर की कीमत 152 पाकिस्तानी रुपये के बराबर हो चुकी है. उसे पेट्रोल में राशनिंग जैसे हालात से गुजरना पड़ रहा है. ये हालात तब तक ज्यादा रहेंगे जब तक कि वो एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाता.

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