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आपकी जमीन ‘आसानी’ से ले सके, इसके लिए ‘आदर्श कानून’ लाने की तैयारी में है केंद्र सरकार

  • नीति आयोग ने तैयार किया आदर्श कानून का मसौदा, राज्य सरकारों के हिस्से होंगी कई जिम्मेदारियां
  • जमीन से जुड़े कानूनी विवादों का समाधान और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाना उद्देश्य

New Delhi : नीति आयोग ने राज्यों के लिए जमीन के मालिकाना हक के संदर्भ में एक आदर्श अधिनियम का मसौदा जारी किया है. इसका मकसद कानूनी विवादों में कमी लाना और ढांचागत परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को आसान बनाना है. मॉडल कानून और उससे संबंधित नियम राज्य सरकारों को अचल संपत्ति के मालिकाना हक के पंजीकरण की व्यवस्था स्थापित करने, उसके प्रशासन और प्रबंधन का अधिकार देगा.

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‘भूमि विवाद समाधान अधिकारी’ का प्रावधान

मॉडल कानून के मसौदे का मकसद जमीन से संबंधित कानूनी विवादों का समाधान करना तथा ढांचागत परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण में भी सुधार लाना है. इसके तहत भूमि विवाद समाधान अधिकारी तथा भू-स्वामित्व अधिकार अपीलीय न्यायाधिकरण का प्रावधान है, जो एक बार में सभी विवादों को समाप्त कर देगा. जमीन पर अंतिम रूप से मालिकाना हक की गारंटी राज्य सरकार देगी और अगर कोई विवाद होता है, तो क्षतिपूर्ति का प्रावधान होगा.

कानून के मसौदे के अनुसार, धारा 11 के तहत मालिकाना हक के बारे में रिकॉर्ड को लेकर कोई व्यक्ति संतुष्ट नहीं है, तो वह जमीन पर मालिकाना हक से संबंधित पंजीकरण अधिकारी के पास अपनी आपत्ति जता सकता है. आपत्ति अधिसूचना की तारीख से तीन साल के भीतर तक दी जा सकती है. उसके बाद, पंजीकरण अधिकारी जरूरी कदम उठाते हुए मामले को भूमि विवाद समाधान अधिकारी के पास भेजेगा.

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अपील के लिए हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच का प्रावधान

अगर व्यक्ति भूमि विवाद समाधान अधिकारी के आदेश से संतुष्ट नहीं है, तो वह जमीन मालिकाना हक से संबंधित अपीलीय न्यायाधिकरण के पास जा सकता है. वह आदेश आने के 30 दिनों के भीतर मामला दर्ज करा सकता है. इसमें यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय की विशेष पीठ का निर्धारण किया जायेगा, जो अपीलीय न्यायाधिकरणों के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करेगी.

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