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नये भूमि अधिग्रहण कानून में जिलों के उपायुक्तों को पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर निर्णय लेने का अधिकार

जमीन अधिग्रहण को लेकर राज्य सरकार ने 2015 से लागू की है नयी व्यवस्था, पांच हजार हेक्टेयर से अधिक की भूमि पर निर्णय लेने का अधिकार सरकार को

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Ranchi: केंद्र सरकार के नये भूमि अधिग्रहण कानून में जिलों के उपायुक्तों को काफी अधिकार दिये गये हैं. झारखंड सरकार ने केंद्रीय कानून राइट टू फेयर कंपनसेसन एंड ट्रांसपरेंसी इन लैंड एक्वीजिशन, रीहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट रूल्स 2015 को प्रभावकारी बना दिया है. इसमें उपायुक्तों को पांच हजार हेक्टेयर यानी 12500 एकड़ जमीन का हस्तांतरण, अधिग्रहण का अधिकार दे दिया गया है.

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पांच हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर राज्य स्तर पर निर्णय लिये जाने की बातें इसमें शामिल की गयी हैं. इस कानून में सरकार की तरफ से जनहित की योजनाओं के लिए ली जानेवाली भूमि की अधिकतम सीमा तय की गयी है. जिलों के उपायुक्त अथवा दंडाधिकारी यह तय करेंगे कि किस-किस योजना अथवा उद्देश्य के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. इसके लिए जिले में ही जमीन अधिग्रहण की तय राशि कोषागार में जमा करानी होगी. सरकार की तरफ से अधिगृहित की जानेवाली जमीन का मुआवजा भी तय मानकों के अनुसार किया जायेगा. इसमें सरकार ने यह नियम बनाया है.

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रेवेन्यू हेड में ली जानेवाली जमीन की राशि जमा करना जरूरी

सरकारी कानून के अनुसार, संस्थानों के लिए ली जानेवाली जमीन में पांच प्रतशित तक शुल्क जमीन अधिग्रहण के लिए, पांच प्रतशित शुल्क मुआवजे के लिए और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर पांच प्रतशित राशि देना अनिवार्य किया गया है. कंटिजेंसी चार्ज को लेकर 0.5 फीसदी चार्ज भी सरकार की तरफ से लिया जायेगा. जमीन लेनेवाली संस्थानों, कंपनियों अथवा अन्य एजेंसियों को बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से समाहर्ता के कार्यालय में राशि जमा करना भी अनिवार्य किया गया है.

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खातों का संचालन करते हैं डीसी और डीएएलओ

जिलों में जमीनों के अधिग्रहण को लेकर जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी (डीएएलओ) और उपायुक्त की संयुक्त टीम की तरफ से जमा की गयी राशि के खातों का संचालन किया जाता है. इसके लिए सरकार की तरफ से इस्टैबलिशमेंट चार्ज के रूप में एक लैंड रेवेन्यू हेड बनाया गया है. इसमें ही चालान के माध्यम से सभी शुल्क जमा करना पड़ता है. उपायुक्तों और डीएएलओ को यह अधिकार दिया गया है कि वे किसी सरकारी बैंक के बचत खातों में कंटिजेंसी मद की राशि जमा करें और उसका संचालन करें. इस राशि का खर्च स्टेशनरी, कंप्यूटर, कंप्यूटर ऑपरेटरों के भुगतान, प्रशासनिक मद में किया जाता है, जिसका निर्देश उपायुक्त देते हैं.

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