न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

10 दिनों में चिकनगुनिया के 109 और डेंगू के 7 मरीजों की पुष्टि

सरकारी अस्पतालों में ईलाज से कतरा रहे हैं मरीज

210

Ranchi: रांची में डेंगू और चिकनगुनिया ने विकराल रूप ले लिया है और शतक का आंकड़ा पार कर लिया है. रांची सदर अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 दिनों में यहां चिकनगुनिया के 109 और डेंगू के 7 मरीजों की पुष्टि हुई है. इन दौरान कुल 182 मरीजों के खून के नमूनों की जांच कराई गई. यह आंकड़े 26 जुलाई से लेकर 6 अगस्त 2018 तक का है.

इसे भी पढ़ें-सावधान! जार का पानी खरीद कर पीते हैं तो आप भी पड़ सकते हैं बीमार

महामारी का डेंजर जोन बना हिंदपीढ़ी

रांची का हिंदपीढ़ी ईलाका डेंजर जोन बन गया है. चिकनगुनिया और डेंगू के जितने भी मामले रांची में चिन्हित हुए हैं, वे सभी के सभी हिंदपीढ़ी इलाका जो वार्ड नंबर 22 में आता है, वहां के हैं. यहां जिन लोगों को चिकनगुनिया और डेंगू हुआ है, उसमें बच्चेे, बुढ़े और महिला-पुरूष शामिल हैं.

इसे भी पढ़ें-‘पीएम मोदी ने गरीब महिलाओं के लिए जितना किया, किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया’

रिम्स और सदर अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे डेंगू-चिकनगुनिया के मरीज

डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या 100 से ऊपर हो जाने के बाद भी रिम्स और सदर अस्‍पताल के आईसोलेटेड वार्ड खाली पड़े हैं. सदर अस्पताल में सिर्फ 2 मरीज भर्ती हैं, जबकि यहां के आइसोलेटेड वॉर्ड में 10 मरीज भर्ती हो सकते हैं. उसी तरह रिम्स के आईसोलेटेड वॉर्ड में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज बहुत कम हैं.

डेंगू और चिकनगुनिया प्रभावित इलाकों का दौरा करतीं जेएमएम नेत्री महुआ माजी
डेंगू और चिकनगुनिया प्रभावित इलाकों का दौरा करतीं जेएमएम नेत्री महुआ माजी

सरकारी अस्पतालों से दूर क्यों हैं मरीज ?

ऐसे में सवाल यह उठता है कि चिकनगुनिया और डेंगू के इतने सारे मरीज गये कहां? इस सवाल पर रांची सदर अस्पमताल के सिविल सर्जन ने बताया कि आमतौर पर चिकनगुनिया के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं रहती है. वह जांच के बाद दवाई से भी ठीक हो सकते हैं. अभी सदर हॉस्पीटल में 2 मरीज भर्ती हैं. जो भी मरीज आयेंगे उन्हें हम भर्ती कर सकते हैं. रिम्स के आइसोलेटेड वॉर्ड में भी 2 ही मरीज भर्ती हैं, जो डेंगू के हैं. रिम्स अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने कहा है कि डेंगू या चिकनगुनिया से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है. जिन लोगों को यहां भर्ती होने की जरूरत होगी, की जायेगी.

इसे भी पढ़ें-निवेश के माहौल के लिहाज से 20 राज्यों में झारखंड नीचे से दूसरा, बिहार अंतिम पायदान पर

silk_park

हिंदपीढ़ी में गंदगी का ढेर

पिछले कई दिनों से हिंदपीढ़ी  कचरों के ढेर में तब्दील था. यहां गंदगी के साथ-साथ हर जगह जल जमाव की स्थिति रहती है. महामारी फैलने के बाद नगर निगम का दावा है कि प्रशासन ने कचरा उठवा लिया गया है. बावजूद इसके हिंदपीढ़ी के कई इलाकों में कचरा भरा पड़ा है. घरों और मोहल्लों में जलजमाव हैं, जहां चिकनगुनिया और डेंगू के मच्छर पनप रहे हैं.

इसे भी पढ़ें-लातेहार : लाभुक का पीएम आवास अधूरा, दूसरे का पूर्ण आवास दिखाकर निकाल लिए पैसे

महुआ माजी ने उठाया स्वच्छता सर्वेक्षण पर सवाल

हिंदीपीढ़ी के ऐसे ही इलाकों का झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माज़ी ने दौरा किया और सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ ही हफ्ते पहले सर्वेक्षण रिपोर्ट में रांची शहर को स्वच्छता में इतने ऊंचे पायदान पर दिखाया गया, तब गंदगी के मामले में पूरे शहर की ऐसी नारकीय स्थिति क्यों है? क्या जनता को भरमाने के लिए ये झूठ प्रायोजित सर्वे रिपोर्ट है ?

इसे भी पढ़ें- 34वें राष्ट्रीय खेल से पहले हुआ था बड़ा ‘खेल’

सरकारी व्यवस्था में जोखिम नहीं लेना चाहते मरीज

इधर ‘लहू बोलेगा टीम रांची’ के संयोजक मो. नदीम खान ने बताया कि रांची के सदर अस्प्ताल और रिम्स में अभी भी लोग ईलाज कराना पसंद नहीं करते हैं. मरीज वहां की सरकारी व्यवस्था में जोखिम उठाना नहीं चाहते, इसलिए मरीज निजी अस्पतालों की ओर रूख कर रहे हैं.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: