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जम्मू-कश्मीर में और 10 हजार सुरक्षाबल के जवान भेजे गये, पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने एतराज जताया

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल  के जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे से लौटने के बाद यह फैसला लिया गया है

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NewDelhi : जम्मू-कश्मीर में आतंवाद विरोधी कार्रवाई में तेजी लाने के लिए  केंद्र सरकार ने राज्य में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है.   राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल  के जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे से लौटने के बाद यह फैसला लिया गया है. सूत्रों के अनुसार  अजीत डोभाल ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर बैठक की थी. वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंहने बताया कि वह पहले से ही उत्तरी कश्मीर में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की मांग करते रहे हैं. अतिरिक्त जवानों की तैनाती उनके आग्रह के बाद ही हुई है.

जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्ति सुरक्षाबलों की तैनाती पर जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने कड़ा एतराज जताया है.  उन्होंने कहा कि यह अफवाह है कि घाटी में कुछ डरावना होने वाला है.  उन्होंने शुक्रवार को  ट्वीट कर कहा, घाटी में अचानक दस हजार सुरक्षाबलों की तैनाती क्यों हो रही है, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है, इस बात की अफवाह है कि घाटी में कुछ बड़ा डरावना होने वाला है.  क्या यह अनुच्छेद 35A को लेकर है,

100 कंपनियों को हवाई मार्ग से उत्तरी कश्मीर भेजा गया है

हालांकि गृहमंत्रालय द्वारा जारी ऑर्डर में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती इसलिए की जा रही है ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था बेहतर की जा सके. दिलबाग सिंह के अनुसार  उत्तरी कश्मीर में जवानों की संख्या जरूरत से भी कम है. इसलिए हमें यहां अतिरिक्त जवानों की जरूरत थी.  100 कंपनियों को हवाई मार्ग से उत्तरी कश्मीर भेजा गया है. हमनें पहले ही इसकी मांग की थी. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जवानों की अतिरिक्त तैनाती को लेकर किए जाने वाले अन्य दावे तथ्यों से दूर हैं. सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर भेजे गये जवानों को देश के अलग-अलग इलाकों से चुना गया है.

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24 फरवरी को 100 पारामिलिट्री फोर्स को घाटी में तैनात किया गया था

जान लें कि  कुछ दिन पहले ही अमरनाथ यात्रा को सफल बनाने को लेकर राज्य में 40 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किये गये थे.  साथ ही इस साल 24 फरवरी को 100 पारामिलिट्री फोर्स को भी घाटी में तैनात किया गया था. उस दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि इन जवानों की तैनाती अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए की जा रही है.  मोदी सरकार ने दोबारा में सत्ता में आने के बाद अजीत डोभाल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया था.

इतना ही नहीं इस बार मोदी सरकार ने अजित डोभाल को केंद्रीय मंत्री का दर्जा भी दिया था. मोदी सरकार ने यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए लिया था. उनकी यह नियुक्ति पांच वर्षों के लिए होगी.  अजित डोभाल पीएम मोदी की पिछली सरकार में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे.

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