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केंद्रीय टीम की जांच में सदर अस्पताल में खुली व्यवस्था की पोल, जांच मशीन भी फेल

सवालों का जवाब नहीं दे सके स्वास्थ्य कर्मी, मरीजों ने बतायी इलाज में कुव्यवस्था की पीड़ा

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Ranchi: केंद्र सरकार की कॉमन रिव्यू मिशन की चार सदस्यीय टीम ने रविवार को सदर अस्पताल रांची का जायजा लिया. इस दौरान टीम ने यहां व्यवस्था और कमियों को करीब से देखा. रिव्यू टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ जेएल मिश्रा ने अस्पताल में काम कर रहे फिजियोथेरेपिस्ट, कंपाउंडर, नर्स से कई प्रश्न किए. जिसका कंपाउंडर एवं नर्स सही-सही जबाव भी नहीं दे सके.

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डॉ मिश्रा ने फिजि‍योथेरेपिस्ट से पूछा कि‍ डीसिया सर्वल क्या होता है? फिजि‍योथेरेपिस्ट इसका जवाब नहीं दे पाया. वहीं नर्स से पूछा गया कि गर्भवती महिलाओं के पैक्स निकालने को क्या कहते है? नर्स ने भी इसका जवाब देने में असमर्थता जाहिर की.
टीम ने एक-एक कर पूरे अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया. इसमें इएनटी ओपीडी, दवा वितरण केंद्र, लेबर रुम, ओटी, मेटरनिटी वार्ड, महिला वार्ड, शिशु वार्ड, नेत्र विभाग का जायजा लिया.

बाहर से अल्ट्रासांउड करा रहे मरीज

निरीक्षण क्रम में जब भर्ती मरीजों से वहां उपचार की स्थिति‍, दवा, जांच आदि के बारे में पूछा गया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. केंद्रीय टीम को वहां इलाज के लिए भर्ती काजल देवी ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बाहर जाने को कहा गया. जब यहां से अल्ट्रासांउड कराया गया था, उस रिपोर्ट को डॉक्टर ने मानने से मना कर दिया और बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने को कहा. मरीज के परिजन ने बताया कि बाहर अल्ट्रासाउंड कराने में 900 रुपए खर्च हो गये.

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वहीं बरखा देवी और उनके परीजनों ने बताया कि यहां के डॉक्टअर और नर्स का व्यवहार सही नहीं है. जो भी चिकित्सक या नर्स देखने के लिए आते है सभी अलग-अलग बात बताते हैं. उन्होंने बताया कि चिकित्सक ने पहले कहा कि बड़ा ऑपरशेन कर डिलीवरी करानी होगी, लेकिन जब हंगामा किया गया तो नॉर्मल डिलीवरी करा दी गयी.

डॉक्यूमेंट देख नाराज हुए डॉ अजीत

टीम में शामिल डॉ अजीत कुमार सुडके ने भर्ती मरीजों की जब रिपोर्ट दिखाने को कहा तो रिपोर्ट सही नहीं मिली. जिस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की. डॉ सुडके ने कहा कि सदर अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों का रिकार्ड रखना अनिवार्य है. किस मरीज को भर्ती किया गया, किसे रेफर किया गया, यह सब रिकॉर्ड से ही पता चलता है. उन्होंने रेफरल, इमरजेंसी और भर्ती मरीजों को रजिस्टर मेंटेन करने को कहा. डा. सुडके ने कहा कि सभी मरीजों का डॉक्यूमंटेशन, रिपोर्टिंग और फॉलो अप सभी अनिवार्य है.

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कमियों को दूर करने का निर्देश

नेतृत्व कर रहे डॉ जेएल मिश्रा ने बताया कि अस्पताल के निरीक्षण क्रम में कुछ कमियां पाई गईं, तो कुछ संतोषजनक भी रहा. उन्होंने कहा कि कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए. डॉ. मिश्रा ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट 12 सितंबर को पेश की जाएगी.

दिखी पूरी सफाई व्यवस्था, कर्मचारी भी थे वेल ड्रेस्ड

टीम के आने की सूचना अस्पताल प्रबंधन को दो दिन पहले ही हो गई थी. इसलिए उन्हें तैयारी करने का पूरा वक्त मिल गया. आम दिनों में कुव्यवस्थाओं का केंद्र रहने वाला सदर अस्पताल रविवार को पूरी तरह से व्यवस्थित नजर आया. यहां तक की अधिकारियों की वाह-वाही लेने के लिए प्रबंधन बार-बार सफाई करवा रहा था. तो वहीं सभी नर्स, कंपाउडर, सुरक्षागार्ड सभी वेल ड्रेस्ड नजर आ रहे थे.

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सिवि‍ल सर्जन रहे नदारद

सदर अस्पताल के निरीक्षण के लिए केंद्रीय टीम 11 बजे ही सदर अस्प‍ताल पहुंच गई थी. सदस्यों ने दो बजे तक विभिन्न विभागों का जायजा लिया. लेकिन, इस दौरान सिवि‍ल सर्जन डॉ. विजय बहादुर प्रसाद नदारद रहे. सुपरिटेंडेंट डॉ. आरके झा, मैनेजर अन्नपूर्णा व अस्पताल के चिकित्सक व अन्य कर्मचारियों ने टीम को विजि‍ट कराया व उनके प्रश्नों के जवाब देते नजर आये.

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