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डोर-टू-डोर कैंपेन में 3 दिन में टीबी के 200 से अधिक सस्पेक्टेड मिले, विभाग की लापरवाही पड़ रही भारी

Ranchi : टीबी (ट्यूबरक्यूलोसिस) बीमारी का नाम सुनते ही लोगों के होश उड़ जाते हैं. टीबी ने चपेट में ले लिया तो यही समझा जाता है कि अब उसका क्या होगा. पर अब समय बदल चुका है. रेगुलर ट्रीटमेंट से टीबी से ग्रसित मरीज पूरी तरह से ठीक भी हो जाता है. लेकिन कोविड के फर्स्ट और सेकेंड वेव में टीबी डिपार्टमेंट की लापरवाही रांची के लोगों को भारी पड़ रही है.

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक्टिव केस फाइंडिंग डोर टू डोर कैंपेन के तहत 3 दिनों में टीबी के 200 से अधिक सस्पेक्टेड मिल चुके हैं. टेस्ट के बाद यह साफ हो पायेगा कि कितने लोग टीबी पॉजिटिव हैं.

बताते चलें कि कोरोना काल में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से टीबी के कंफर्म मरीजों को दवा मिलने में काफी परेशानी हुई, वहीं उनकी रेगुलर मॉनिटरिंग भी नहीं की गयी.

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स्क्रीनिंग में ही टीबी वाले लक्षण

20 अक्टूबर तक चलनेवाले इस अभियान के तहत हेल्थ वर्कर्स डोर टू डोर जाकर प्रभावित इलाकों में स्क्रीनिंग कर रहे हैं, जहां पहले से ही टीबी के मरीज हैं. इसके अलावा अन्य इलाकों में भी स्क्रीनिंग की जा रही है.

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इस दौरान दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन कम होने और बलगम के साथ खून आने के लक्षण मरीजों में मिल रहे हैं. ऐसे सस्पेक्टेड मरीजों का अब बलगम जांच और एक्सरे कराया जायेगा.

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इसके बाद सीबी नैट टेस्ट कर पता लगाया जायेगा कि उसे टीबी है या नहीं. इसके बाद तत्काल मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जायेगा.

इस मामले में डिस्ट्रिक्ट टीबी ऑफिसर सह डीएस सदर डॉ एस मंडल का कहना है कि टीबी के सस्पेक्टेड तो मिल रहे हैं.

टेस्ट के बाद ही पता चल पायेगा कि कितने पॉजिटिव हैं. हां इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कोविड काल में जो लापरवाही हुई है उससे ही इंफेक्शन बढ़ा है.

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