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कैसे बना यूनिवर्स, डार्क मैटर का क्या रोल है, मैप से मिलेगी जानकारी

पुणे के इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर ऐस्ट्रॉनमी ऐंड ऐस्ट्रोफिजिक्स के सुरहुद मोरे एकमात्र भारतीय हैं, जो इस टीम में शामिल हैं. यह मैप एक 3डी मॉडल है,

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Pune : यूनिवर्स में मौजूद डार्क मैटर का एक विस्तृत मैप तैयार किया गया है. मैप इंटरनैशनल रीसर्चर्स की एक टीम ने बनाया है. मैप शोध को आगे बढ़ाने का काम करेगा. पुणे के इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर ऐस्ट्रॉनमी ऐंड ऐस्ट्रोफिजिक्स के सुरहुद मोरे एकमात्र भारतीय हैं, जो इस टीम में शामिल हैं. यह मैप एक 3डी मॉडल है, जिसके जरिये दिखाया गया है कि एक खास टाइम फ्रेम में यूनिवर्स कैसा नजर आता है. इस मैप से वैज्ञानिकों को यह पता चल पायेगा कि यूनिवर्स छह गीगा साल बाद से लेकर एक गीगा साल पहले तक कैसा नजर आता था.  जान लें कि 100 करोड़ सालों से एक गीगा साल बनता है. कॉस्मॉलजी फ्रॉम कॉस्मिक शियर पावर स्प्रेक्ट्रा विद सुबारू हाइपर सुप्रिम-कैम फर्स्ट इयर डेटा इस रीसर्च पेपर का टाइटल है. बता दें कि टीम अपनी रिपोर्ट पियर रिव्यू के लिए पब्लिकेशन ऑफ ऐस्ट्रॉनमिकल सोसायटी ऑफ जापान को सौंपेगी.

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डार्क मैटर और डार्क एनर्जी यूनिवर्स का 95 प्रतिशत हिस्सा ले लेते हैं

वैज्ञानिकों के अनुसार डार्क मैटर और डार्क एनर्जी यूनिवर्स का 95 प्रतिशत हिस्सा ले लेते हैं. बता दें कि डार्क मैटर के रहस्यमय होने की वजह से उसे ऐसा नाम मिला है.  गैलेक्सी बनने के पीछे का कारण डार्क मैटर को ही बताया गया है. डार्क एनर्जी ही यूनिवर्स का विस्तार तेज करती है. मोरे कहते हैं कि अब डार्क एनर्जी की प्रॉपर्टी समझने में मदद मिलेगी, जिससे गैलेक्सी के फटने की संभावना का भी पता चल सकेगा.  एक बात और कि डार्क मैटर लाइट के संपर्क में नहीं आता, पर  उसकी ग्रैविटेशनल फील्ड लाइट को भी मोड़ सकती है.  इसी के जरिये वैज्ञानिक डार्क मैटर को पढ़ने की कोशिश करते हैं.  मोरे कहते हैं कि डार्क मैटर हर चीज में फैला हुआ है. छोटे-छोटे टुकड़ों में. टुकड़े ग्रैविटी के कारण बढ़ते रहते हैं और सितारों और गैलेक्सी, जो हम आज देखते हैं, उनकी शक्ल लेते हैं. यूनिवर्स में मौजूद डार्क एनर्जी की वजह से विस्तार को तेजी (एक्सलरेशन) मिलती है. अल्बर्ट आइंस्टाइन की जनरल थिअरी ऑफ रिलेटेविटी के अनुसार यह एक्सलरेशन को एक कॉन्स्टेंट नंबर के जरिये समझा जा सकता है.  वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या डार्क एनर्जी आइंस्टाइन के सिंपल कॉन्स्टेंट की तरह बिहेव करती है या नहीं.
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डार्क एनर्जी यूनिवर्स को दो टुकड़ों में बांट सकती है

मोरे कहते हैं कि  डार्क एनर्जी की वजह से यूनिवर्स का तेजी के साथ विस्तार होता है.  उनके अनुसार किसी एक पॉइंट पर डार्क एनर्जी यूनिवर्स को फाड़ सकती है. ऐसे में हमें डार्क एनर्जी को पढ़ना जरूरी है, ताकि यह पता लग सकें कि ऐसा कब होगा.  उन्होंने बताया कि मैप की मदद से हमें यह समझने में मदद मिलेगी.  कहा कि लाइट हमारे पास पहुंचने में कुछ समय लगाती है और डार्क मैटर की वजह से मुड़ी हुई होती है.  लाइट की स्पीड कॉन्स्टेंट होती है इसलिए यह पता लगाया जा सकता है कि वह कहां से आ रही है और उस वक्त समय और दूसरी पर स्थित गैलेक्सी का पता लगाया जा सकता है.  मोरे ने जानकारी दी कि हाइपर-सुप्रिम कैम तस्वीरें ले रहा है और 2020 तक उसका काम पूरा हो जायेगा.  उसके बाद हासिल डेटा के आधार पर डार्क एनर्जी और यूनिवर्स को और ज्यादा समझने में मदद मिलेगी.

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