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आयुष्मान भारत योजना में इंश्योरेंस कंपनी ने लगाया सरकार को 200 करोड़ का चूना, दोबारा उसे ही किया गया रिन्यू

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आयुष्मान भारत योजना में अधिकारियों की चली मनमानी, एमओयू के नियमों का नहीं रखा ख्याल

अस्पतालों को डिबार और इंपैन्ल्ड करने का चलता रहा है खेल

Kumar Gaurav

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Ranchi: झारखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने करीब 200 करोड़ का चूना लगाया है. आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए एमओयू में यह शर्त थी कि इंश्योरेंस की राशि का 80 प्रतिशत लाभ किसी भी शर्त में लाभार्थियों को देना है.

80 प्रतिशत तक लाभ नहीं देने की स्थिति में बचे हुए पैसे को सरकार को वापस करना था. पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने 41 प्रतिशत ही लाभ दिया. बचे हुए 39 प्रतिशत मतलब 246 करोड़ रुपये सरकार को वापस किये जाने थे. लेकिन, ऐसा नहीं किया गया. इसके बावजूद सरकार और विभाग ने इसी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दोबारा से बहाल कर दिया.

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इस योजना में कई अन्य तरीके की गड़बड़ियां सामने आयी है. जिलों के इंपैन्ल्ड अस्पतालों को बार-बार डिबार और इंपैन्लड किया जाता रहा है. इसके अलावा इस योजना से जुड़े अधिकारियों पर नियमों को ताक पर ऱख मनमानी करने का भी आरोप है. नियमों को ताक पर रखकर बहाली करने, अपने चहेते एजेंसियों को मनमाने तरीके से बहाल भी किया गया है.

अधिकारियों की चली मनमानी, एमओयू के नियमों का नहीं रखा ख्याल

झारखंड में आयुष्मान भारत योजना में अधिकारियों ने खूब मनमानी की. आयुष्मान भारत के तहत किये गये एमओयू के नियमों का कोई ख्याल नहीं रखा गया. आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए एमओयू में रिइंश्योरेंस कंपनी को रखने का प्रावधान ही नहीं था. बावजूद इसके एक्सा फ्रांस नामक कंपनी को रिइंश्योरेंस के लिए रखा गया.  जिसके प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट को इससे पहले चल रही योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में झारखंड में काम करने का अनुभव था.

इन्होंने आयुष्मान योजना में अपनी खूब मनमानी भी चलायी. इसके अलावा तीन टीपीए को बिना टेंडर की डायरेक्ट नियुक्त कर लिया गया. एमओयू के तहत इसके लिए टेंडर किया जाना था. मेडी अस्सिट, सेफ वे, और एमडी इंडिया नामक कंपनी को टीपीए के तौर पर बहाल किया गया.

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अस्पतालों को डिबार और इंपैन्ल्ड करने का चलता रहा है खेल

आयुष्मान भारत योजना के तहत कई बार अस्पतालों को डिबार किया गया. फिर से उन्हें बहाल किया गया. इसमें प्राइवेट अस्पतालों के साथ बारगेनिंग का भी खेल चलता है. प्राइवेट अस्पताल जब अपना बिल क्लेम करते हैं तो इंश्योरेंस विभाग के एक लड़के को साथ रखकर एक कमिटी बना दी जाती है. जो अस्पताल की जांच करती है, और कोई न कोई खामी निकाल देती है. जिसके बाद उन्हें डिबार कर दिया जाता है.

फिर से उन्हें इंपैन्लड भी कर दिया जाता है. जिन अस्पतालों को डिबार और इंपैन्लड किया गया है उसकी पूरी लिस्ट है. इनमें से कुछ अस्पताल शशि स्वास्थ्य संस्थान पलामू, आनंद सेवा सदन, आरोग्य हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर पलामू, एके सनसाइन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड हजारीबाग, रमित नर्सिंग होम जामताड़ा, गोवर्धन लाल नर्सिंग होम गिरिडीह,  मुंद्रा हॉस्पिटल, नागरमल मोदी सेवा सदन रांची, नवजीवन हॉस्पिटल पलामू, भारती हॉस्पिटल दुमका, आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, रांची.

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