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7 सालों में झारखंड के 41 जवानों ने देश के लिये दी शहादत, शहीद के परिजन को 10 लाख रुपये और सरकारी नौकरी दे रही सरकार

Ranchi : पिछले 7 सालों में राज्य के 41 जवानों ने देश के लिये अपनी शहादत दी है. ये ऐसे जवान थे जो मिलिट्री या पारा मिलिट्री में सेवा दे रहे थे. ऐसे जवानों के मामले में झारखंड सरकार की ओर से अनुदान राशि और अनुकंपा के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति दिये जाने का भी प्रावधान है.

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधायक प्रदीप यादव के सवाल पर सरकार ने यह जानकारी दी है. प्रदीप यादव ने 20 दिसंबर को अल्पसूचित प्रश्न लाते हुए पूछा था कि शहीदों के आश्रितों को राज्य सरकार के स्तर से निर्धारित सुविधाओं के लिये भटकना पड़ रहा है?

इस पर गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बताया गया कि देश की सुरक्षा में शहीद जवानों को लाभ दिए जाने के लिये सरकार की ओर से प्रावधान सुनिश्चित है.

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2 लाख से 10 लाख का भुगतान

गृह विभाग के मुताबिक देश की सुरक्षा में शहीद जवानों के मामले में राज्य गठन की तिथि से 2 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता रहा है. 2018 और इसके बाद की अवधि में शहीद होने वालों को इसके एवज में 10 लाख रुपये दिये जाते हैं. इसके अलावा अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति भी दी जाती है.

इसके लिये संबंधित जिलों के डीसी के प्राप्त प्रस्ताव के आलोक में अनुमान्य लाभ की स्वीकृति विभाग की ओऱ से प्रदान की जाती है.

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झारखंड के शौर्य पुरस्कार से अलंकृत शहीद सैनिकों के आश्रित को शौर्य पुरस्कार की श्रेणी के अनुरूप एकमुश्त नकद राशि का भुगतान करने का प्रावधान (संकल्प सं 6210, 26.11.2015) है.

वर्तमान में इसके दो मामले लंबित हैं. वीरगति प्राप्त मिलिट्री या पारा मिलिट्री के जवानों के आश्रित परिवार को मिलने वाली सुविधाएं भारत सरकार (रक्षा मंत्रालय) द्वारा प्रदान की जाती हैं.

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