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20 सालों में झारखंड के एक भी कांग्रेसी नेता CWC में नहीं बना सके हैं जगह

Nitesh Ojha

 Ranchi : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीते शुक्रवार को पार्टी की शीर्ष निकाय कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) के पुनर्गठन की घोषणा की. पुनर्गठन की सबसे खास बात है कि पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर पार्टी के अनुभवी नेताओं पर ही ज्यादा भरोसा जताया है. कुछ युवा को ही इसमें जगह मिली है. दूसरी तरफ एक बार फिर CWC में झारखंड के किसी कांग्रेसी नेता को जगह नहीं दी गयी है.

दूसरे शब्दों में कहें तो झारखंड के कांग्रेसी नेताओं पर एक बार फिर केंद्रीय नेतृत्व ने भरोसा नहीं दिखाया है. हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है. राज्य गठन को 20 वर्ष होने को हैं, लेकिन आज तक झारखंड का कोई भी कांग्रेसी नेता CWC में जगह पाने में असफल रहा है.

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 केंद्रीय नेताओं के समक्ष नहीं बना पाये भरोसा

 ऐसा नहीं है कि प्रदेश कांग्रेसी नेता देश के अन्य नेताओं से अनुभव में पीछे रहे हैं. लेकिन शायद वे केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपना विश्वास नहीं बना सके हैं. केंद्रीय टीम के साथ काम कर चुके झारखंड के कुछ नेताओं का संबंध झारखंड से रहा है. लेकिन CWC तो छोड़िये उनका प्रदेश राजनीति से भी कोई विशेष लगाव नहीं रहा.    

अनुभवी नेताओं की लंबी फेहरिस्त

 झारखंड में कांग्रेसी नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त रही है. जिन्हें राजनीतिक जीवन का लंबा अनुभव रहा है. ऐसे नेता न केवल जाति समीकरण में मजबूत बैठते हैं, बल्कि कई तो केंद्रीय मंत्री तक का पद संभाल चुके हैं.  

तीन बार केंद्र में मंत्री रहे हैं सुबोधकांत सहाय

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुबोधकांत सहाय रांची लोकसभा क्षेत्र से तीन बार (1989, 2004 और 2009) सांसद बने हैं. तीनों ही बार वे केंद्र में मंत्री बने हैं. लेकिन आज तक पार्टी के शीर्ष निकाय में वे जगह पाने में असफल रहे हैं.

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अल्पसंख्यक कोटे के नेता रहे हैं फेल

मुस्लिम चेहरे की यदि बात करें तो  उस तौर पर प्रदेश में आलमगीर आलम, फुरकान अंसारी का नाम लिया जा सकता है. लेकिन दोनों की राजनीति प्रदेश तक ही सिमट कर रही गयी है. 

महिला कोटे में कई नाम हैं शामिल

महिला चेहरे की बात करें तो देशभर में प्रसिद्ध स्वर्गीय कार्तिक उरांव की बेटी गीताश्री उरांव, दीपिका पांडेय सिंह जैसी नेता शामिल हैं. लेकिन इन दोनों को भी कमिटी में जगह नहीं मिली है.

आदिवासी चेहरे में एक रहे चुके है केंद्रीय मंत्री

आदिवासी चेहरे में वर्तमान प्रदेश अध्य़क्ष डॉ रामेश्वर उरांव और पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष रहे सुखदेव भगत के अलावा प्रदीप बलमुचू जैसे बड़े नेता शामिल हैं. डॉ उरांव 14वें लोकसभा में लोहरदगा से चुनाव जीते थे. वे मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय जनजाति मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन ऐसे आदिवासी नेताओं को भी आज तक CWC में जगह नहीं मिल सकी है.

केंद्रीय नेतृत्व के साथ काम कर चुके नेताओं का प्रदेश राजनीति से विशेष लगाव नहीं

प्रदेश में सामान्य कोटे से दिवगंत नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह और केएन त्रिपाठी का नाम लिया जा सकता है. लेकिन इन्हें भी कभी CWC में शामिल नहीं किया गया. झारखंड से जुड़े कुछ नेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने केंद्रीय टीम के साथ काम किया है. या कर रहे हैं. हालांकि ऐसे नेताओं का झारखंड की राजनीति से कोई विशेष लगाव नहीं रहा है. ऐसे नेताओं में पूर्व प्रदेश अध्य़क्ष डॉ अजय कुमार और अरूण उरांव का नाम लिया जा सकता है.

झारखंड से आइपीएस कैडर के अधिकारी रहे डॉ अजय कुमार मूलतः कर्नाटक के रहने वाले हैं. जेवीएम से राजनीतिक करियर शुरू करने के बाद वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और झारखंड प्रदेश अध्य़क्ष बने. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सह-प्रभारी रह चुके डॉ उरांव का गृह प्रदेश तो झारखंड रहा है.

लेकिन वे भी प्रदेश कांग्रेस की राजनीति से दूर ही रहे हैं. दोनों ही नेता अब पार्टी छोड़ चुके हैं. इस कड़ी में पूर्व के वर्षों में झारखंड कांग्रेस के स्टेट को-ऑर्डिनेटर और सोशल मीडिया सेल के इंचार्ज रह चुके मयूर शेखर झा और प्रणव झा जैसे नेताओं का भी नाम लिया जा सकता है.

 

नेशनल पॉलिटिक्स में कभी भी हावी नहीं रही है झारखंड कांग्रेस की राजनीति

 प्रदेश कांग्रेस से जुड़े जानकारों की मानें तो पड़ोसी राज्य बिहार की तुलना में झाऱखंड कांग्रेस की पृष्ठभूमि कभी भी नेशनल पॉलिटिक्स में हावी नहीं रही. केंद्रीय मंत्री तक बन चुके यहां के नेता अगर झारखंड की जगह बिहार से होते, तो शायद वे CWC में जगह बना पाते.

यहां तक कि देश की राजनीति में भी मीडिया ने कभी झारखंड को विशेष तरजीह नहीं दी है. वहीं कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि अपनी पृष्ठभूमि के चलते प्रदेश के कुछ नेता आज तक केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपना विश्वास नहीं बना सके हैं.

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