Khas-KhabarRanchi

फॉरेस्ट क्लियरेंस पेंडिंग होने के कारण लगभग चार साल से रुकी है ट्रांसमिशन लाइन की महत्वपूर्ण योजनाएं

क्लियरेंस मिलने से शुरू होगा काम, 24 घंटे बिजली के लिये 9 हजार 973 किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन की जरुरत

विज्ञापन

Ranchi: विद्युत आपूर्ति के लिये कई ट्रांसमिशन लाइनों का निमार्ण किया जा रहा है. पिछले छह सालों में ऊर्जा विभाग की ओर से बिजली उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन फॉरेस्ट क्लियरेंस पेंडिंग होने के कारण ट्रांसमिशन लाइन से जु़ड़ी कई योजनाएं पिछले कुछ सालों से रूकी हैं. इनमें से कुछ महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन ऐसी भी है जो वर्षों से लंबित है.

इसे भी पढ़ेंःझारखंड में सक्रिय हैं 39 छोटे-बड़े गैंग, वसूल रहे रंगदारी, नहीं देने पर रच रहे हत्या की साजिश

ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड की मानें तो लगभग 29 ऐसी परियोजनाएं हैं, जो फॉरेस्ट क्लियरेंस के कारण लंबित है. सभी परियोजनाओं के फॉरेस्ट क्लियरेंस लगभग चार साल से पेंडिंग है. पिछले दिनों राज्य सरकार को प्रमुख नौ ट्रांसमिशन परियोजनाओं की सूची सौंपी गयी. जिसमें जल्द-से-जल्द फॉरेस्ट क्लियरेंस की मांग की गयी. इन सबके बावजूद पिछले दिनों पांच साल में 11 ट्रांसमिशन लाइन में ट्रांसमिशन शुरू किया गया. फॉरेस्ट क्लियरेंस लगने वाले अधिकांश परियोजनाएं चतरा से संबंधित है.

advt

किन महत्वपूर्ण परियाजनों में लेना है क्लियरेंस

पिछले चार साल से महत्वपूर्ण नौ परियोजनाओं के फॉरेस्ट क्लियरेंस लंबित है. बाकी परियोजनाओं के फॉरेस्ट क्ल्यिरेंस पिछले डेढ़ साल से पेंडिंग है. ऊर्जा संचरण की मानें, तो चार साल से लंबित परियोजनाओं को क्लियर कराना जरूरी है. इन नौ परियोजनाओं से बहुत बड़ी आबादी को 24 घंटे बिजली मिल सकती है. जिसमें लातेहार-चतरा ट्रांसमिशन लाइन, चतरा-लातेहार 104 किलोमीटर, चतरा-बड़कागांव 59 किलोमीटर, पीटीपीएस-रांची ग्रिड 31 किलोमीटर, गोविंदपुर से टीटीपीएस जैनामोड़ 35 किलोमीटर, चाईबासा से गुवा 85 किलोमीटर, जसीडीह से दुमका मिदनापुर 74 किलोमीटर, डालटेनगंज से गढ़वा तक 70 किलोमीटर है. लगभग 550 किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन की महत्वपूर्ण येाजनाएं फॉरेस्ट क्लियरेंस के कारण प्रभावित है.

इसे भी पढ़ेंःदुमका: फाइनेंस कर्मी की चाकू मारकर हत्या, वारदात को हादसे का रूप देने की कोशिश

जो ट्रांसमिशन लाइन शुरू हुए

इसमें हटिया से कांके, चंदनक्यारी से जैनामोड़, गढ़वा, रातु से हटिया, राजमहल से साहेबगंज, गिरिडीह से जमुआ, गिरिडीह से सरिया और सोननगर से नगर उंटारी समेत अन्य ट्रांसमिशन लाइन शुरू किये गये. इन ट्रांसमिशन लाइन को शुरू किया गया है.

ऊर्जा संचरण की मानें तो फॉरेस्ट क्लियरेंस की प्रक्रिया लंबी होती है. झारखंड में वन क्षेत्र अधिक हैं. ऐसे में क्लियरेंस के कारण योजनाएं रूक जाती हैं. 24 घंटे बिजली के लिये राज्य को 9 हजार 973 किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन की जरूरत है. वहीं वर्तमान में 4 हजार 731 किलोमीटर 9 ट्रांसमिशन लाइन है.

adv

इसे भी पढ़ेंःभारत में फिर से 47 ऐप्स बैन, Pubg और Alibaba express भी होंगे बैन!

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button