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अर्थव्यवस्था में मंदी पर पीएमओ में अहम बैठक, निवेशकों में निराशा के कारणों पर मंथन

NewDelhi : अर्थव्यवस्था में  गिरावट को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आ गया है. सूत्रों के अनुसार पीएमओ ने बैठक कर वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद को निर्देश जारी कर देश की अर्थव्यवस्था में मंदी और निवेशकों में निराशा के कारण जानने को कहा है. खबर है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर दूसरी बैठक ले सकते हैं. जब तक कोई ठोस रणनीति नहीं बनती तब तक निवेशकों की चिंताएं दूर करने के लिए कई मुद्दे पर सहमति बनी है.

सूत्रों के अनुसार फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी विदेशी निवेशकों को राहत देने के लिए सरकार सरचार्ज के फैसले पर बड़ा कदम उठाया जा सकता है. साथ ही, प्राइवेट लिस्टेड कंपनियों को पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के फैसले से छुटकारा मिल सकता है.

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भारत के सिर से दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का ताज छिन गया

जान लें कि भारत के सिर से दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का ताज छिन गया है. अर्थव्यस्था की दृष्टि से भारत सातवें पायदान पर पहुंच गया है. भारतीय अर्थव्यवस्था के साल 2018 में सुस्त रहने की वजह से भारत को अब बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा है. विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार साल 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस की अर्थव्यवस्था में भारत के मुकाबले ज्यादा ग्रोथ रिकॉर्ड की गयी, जिस वजह से इन दोनों से एक-एक पायदान की छलांग लगायी है. ब्रिटेन पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि छठे स्थान पर फ्रांस काबिज हो गया है.   इस लिस्ट में अमेरिका टॉप पर बरकरार है.

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विदेशी निवेशकों ने 16,870 करोड़ रुपये की बिकवाली की

जुलाई महीने में विदेशी निवेशकों ने 16,870 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. वहीं, जून महीने में सिर्फ 688 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी. इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट में सरचार्ज बढ़ने के बाद तेजी से एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली की है.  फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स को सरचार्ज से जल्द राहत देने पर विचार किये जाने पर भी सहमति बन गयी है.

बता दें कि बजट में 2 करोड़ रुपये और 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई पर सरचार्ज लगाने का ऐलान किया गया था. सरचार्ज के दायरे में आने के बाद FPI ने बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया.

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FPI को राहत देने के रास्ते की तलाश

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सरचार्ज से FPI को राहत देने के अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जायेगा. .इसके बाद फाइनेंस एक्ट में बदलाव किये बगैर FPI को राहत देने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं. वित्त मंत्रालय में भी FPI को सरचार्ज से राहत देने के मुद्दे पर चर्चा की जा रही है.  सरकार ने बजट में 2-5 करोड़ रुपये की टैक्सेबल आमदनी पर सरचार्ज 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी और 5 करोड़ से अधिक की कमाई पर 15 फीसदी से बढ़ाकर 37 फीसदी कर दिया.

यह सरचार्ज इंडिविजुअल, हिंदू अविभाजित परिवार, ट्रस्ट और असोसिएशंस ऑफ पर्संस पर लगाया गया है, लेकिन इसका असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, सॉवरेन वेल्थ फंड (दूसरे देशों के सरकारी फंड) और ऑल्टरनेट इनवेस्टमेंट फंडों पर भी लगता है. इस फैसले से देश में रजिस्टर्ड एफपीआई में से 40 फीसदी इसके दायरे में आ गये है. हालांकि, फाइनेंस बिल में कुछ बड़े बदलावों की उम्मीद थी.

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