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चौथी जेपीएससी को लेकर झारखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला

Ranchi: चौथी जेपीएससी की परीक्षाफल की वैद्यता और वैधानिकता को चुनौती देने वाली अपील को झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. प्राथियों ने एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी. एकल पीठ ने सात दिसंबर 2018 को चौथी जेपीएससी की परीक्षा में अपनाये गए स्केलिंग पद्धति को सही करार दिया था. इसके बाद प्रार्थी ज्योतिन प्रकाश कुशवाहा, विनोद कुमार, कृष्णा कुमार व अन्य ने फैसले के खिलाफ खंडपीठ में चुनौती दी थी. गुरूवार को मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई. प्राथियों की ओर से कहा गया कि चौथी जेपीएससी परीक्षा में जेपीएससी ने ऐच्छिक विषयों के लिए स्केलिंग पद्धति का इस्तेमाल किया था, जो अनुचित है. उनका कहना था कि चूंकी जेपीएससी द्वारा ली गयी प्रथम, द्वितीय और तृतीय परीक्षा स्केलिंग पद्धति से नहीं लिया गया था, इसलिये चौथी जेपीएससी परीक्षा में स्केलिंग पद्धति नहीं होना चाहिए था. स्केलिंग पद्धति के कारण उनका चयन नहीं हो सका. परीक्षा की निर्धारित प्रक्रिया में जेपीएससी द्वारा बदलाव किया जाना अनुचित है.  इसलिए जेपीएससी को मूल मार्क्स के आधार पर फिर से रिजल्ट निकालना चाहिए. साथ ही चौथी जेपीएससी के रिजल्ट को रद्द किया जाना चाहिए.

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जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन कैसे किया जाए, इसका निर्धारण करने का उसका अधिकार है. जेपीएससी एक, दो एवं तीन की परीक्षा में स्केलिंग पद्धति नहीं अपनायी गयी तो इसका मतलब यह नहीं है कि जेपीएससी आगे की परीक्षाओं में इस पद्धति  का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. उनकी ओर से यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमिशन बनाम मनोज कुमार यादव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐच्छिक विषयों के मामले में आयोग स्केलिंग पद्धति का प्रयोग कर सकता है. खंडपीठ ने जेपीएससी की दलील को सही करार देते हुए प्राथियों की अपील को खारिज कर दिया.

बता दें कि चौथी जेपीएससी के लिये विज्ञापन संख्या 7/2010 निकाला गया था. 223 पदों के लिये परीक्षा ली गयी थी. जेपीएससी ने परीक्षाफल प्रकाशित कर राज्य सरकार को अनुशंसा भेजी थी, जिसके आधार पर नियुक्ति हुई थी. इसकी वैद्यता और वैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी.

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