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लॉकडाउन का असर :  2019 के मुकाबले 2020 में इलेक्ट्रोनिक बाजार 200 करोड़ रुपये से पहुंचा शून्य पर

Chhaya

 Ranchi :  कडाउन ने इलेक्ट्रोनिक गुड्स के बाजार को बुरी तरह से प्रभावित किया है. गर्मियों में इनकी मांग अधिक रहती थी. लेकिन लकडाउन के कारण बाजार बंद होने से इलेक्ट्रोनिक गुड्स विकेताओं पर असर पड़ा. इतना ही नहीं ग्राहकों को भी परेशान देखा जा रहा है.

विक्रेताओं ने बताया कि की आने वाले मौसम के लिए दिसंबर से ही स्टॉक तैयारी की जाती थी. लेकिन इस बार पुराने स्टॉक पड़े के पड़े हैं. पिछले साल इलेक्ट्रोनिक गुड्स के ऑर्गनाइज्ड सेक्टर ने 150 से 200 करोड़ का कारोबार किया था.

ये आंकड़े प्रति महीने के हैं. मार्च से जून तक. अगर इसमें अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के आंकड़ों को जोड़ा जाये तो कारोबार 250 करोड़ तक हुआ.

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इस बारे में कामिलया संस प्राइवेट लिमिटेड के कमालिया प्रकाश ने बताया कि ये कारोबार फ्रीज, एसी, कूलर, माइक्रो ओवन आदि के होते थे. जिनकी अधिक बिक्री होती थी. इस साल बिक्री शून्य रही. अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में ऐसे विक्रेताओं को रखा जाता है जो दिल्ली मुबंई से आकर कुछ समय के लिये बाजार लगाते है.

25 से 30 करोड़ के पंखों का कारोबार प्रभावित

इलेक्ट्रोनिक वेंडरों ने बताया कि गर्मी के पहले से ही पंखों की मांग अधिक होती है. जिसमें सिलिंग से लेकर टेबल फैन तक होते हैं. फरवरी से मार्च तक ही पंखों की बिक्री होती है. अप्रैल में पंखों का बाजार काफी सीमित होता है. कारोबारियों के अनुसार मात्र तीन महीनें में ही पिछले साल पंखों से 25 से 30 करोड़ का करोबार किया गया था.

हर दिन राज्य भर में हजारों पंखों की बिक्री होती थी. राज्य में सालाना पंखों की बिक्री 125 करोड़ की है. फरवरी से अप्रैल के बाद, नवंबर से दिसंबर के दौरान इनकी अधिक बिक्री होती है. अप्रैल के बाद से एसी, कूलर का बाजार जोर पकड़ता है. जो जून जुलाई तक जारी रहता है.

इस बार जो माल बच गये हैं, वो अलगे साल इस्तेमाल किये जायेंगे. लेकिन इस साल बाजार पूरी तरह शून्य है. जिससे आने वाले साल में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

सिर्फ मेनटेनेंस में 40 से 50 हजार तक का खर्च

राज्य भर में इलेक्ट्रोनिक आइटमों का स्टोर भरा पड़ा है. ऐसे में सिर्फ स्टोर मेनटेनेंस में हर महीने 40 से 50 हजार खर्च होता है. इलेक्ट्रोनिक बाजार किसी भी आइटम में 5 से 7 प्रतिशत लाभ पर काम करते है.

इसमें जीएसटी शामिल होता है. जो लॉकडाउन के बाद से बंद है. राज्य में 90 प्रतिशत इलेक्ट्रोनिक शोरूम किराये में चल रहे हैं. जीएल चर्च कॉम्पलेक्स के सभी शोरूम लीज पर हैं. ऐसे में किराया देना ही है.

लोन की समस्या भी है. कर्मचारियों को वेतन भी देना है. ऐसे में आने वाला समय मुश्किलों भरा होगा.

नवंबर दिसंबर में कर लिया जाता है स्टोर स्टॉक

संचालकों ने बताया की गर्मियों में भले मांग अधिक होती है. लेकिन ऑफ सीजन में भी लोग उपकरणों की खरीदारी करते है. एसी, कूलर, माइक्रो ओवन जैसे उपकरणों के लिये जुलाई में कंपनियों को भुगतान कर दिया जाता है.

जिसके बाद नवंबर से दिसंबर के बीच स्टॉक उपलब्ध होता है. ऑफ सीजन में स्टॉक करने से वेंडरों को डिस्काउंट मिलता है. वहीं कुछ ग्राहक भी ऑफ सीजन में ही खरीदारी करना पंसद करते हैं.

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