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अवैध तरीके से एक ही परिसर में चल रहे हैं मानसिक विकलांग, मूक-बधिर स्कूल और स्पास्टिक विद्यालय

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  • गुमला में रांची के मुक्ति संस्थान का कारनामा, ले रहे सरकार से लाखों का अनुदान
  • बच्चों को घटिया खाना देने में की गयी मारपीट पर एसपी ने भेजी रिपोर्ट, होगी कार्रवाई

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Ranchi:  गुमला जिले में रांची की मुक्ति संस्थान एक ही परिसर में विशेष बच्चों का तीन स्कूल चला रही है. यह सिर्फ नियमों के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि सरकार से अनुदान लिये जाने का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है.

जिले के सिलम में संस्थान को नेत्रहीन विद्यालय चलाने की अनुमति दी गयी थी. पर इसके संचालक संजय दत्ता मूक बधिर विद्यालय और स्पास्टिक विद्यालय प्रोजेक्ट एक ही परिसर में चला रहे हैं. संजय दत्ता का कहना है कि जिला प्रशासन ने एक ही परिसर में इन तीनों विद्यालय चलाने की अनुमति प्रदान की है. पर जब उनसे जिला प्रशासन की अनुमति की मांग की गयी, तब उनकी घिग्घी बंध गयी. उनके अनुसार कुछ निष्कासित शिक्षकों ने उनकी शिकायत सरकार से की है.

जानकारी के अनुसार इन तीनों विद्यालयों के संचालन के लिए संस्थान को प्रत्येक वर्ष 15-16 लाख रुपये प्रति स्कूल दिये जा रहे हैं. यहां यह भी बताया गया है कि परिसर में चल रहे स्पास्टिक विद्यालय में एक भी बच्चे नहीं हैं. इसका अनुदान फरजी तरीके से लिया जा रहा है.

इस संस्थान को काली सूची में डालते हुए इसकी संबद्धता समाप्त करने पर भी सरकार विचार कर रही है.

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एसपी ने बच्चों के साथ हुई मारपीट की पुष्टि कर भेजी रिपोर्ट

जिले के पुलिस अधीक्षक ने विद्यालय में बच्चों के साथ की गयी मारपीट की पुष्टि करते हुए महिला और बाल विकास विभाग तथा राज्य नि:शक्तता आयुक्त को अपनी रिपोर्ट भेज दी है. इसमें कहा गया है कि संस्था को बसिया में मूक-बधिर स्कूल चलाने को कहा गया था.

पर संस्थान के संचालकों ने सिलम में ही मूक बधिर आवासीय विद्यालय, स्पास्टिक और नेत्रहीन आवासीय विद्यालय चलाने का निर्णय लिया. जो गलत है. तीनों विद्यालय अलग-अलग परिसर में नियमत: चलाये जाने चाहिए. रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्थान के संचालकों ने न सिर्फ कई शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया है.

बल्कि संस्थान के संचालक के नजदीकी रिश्तेदार बच्चों के साथ अक्सर मारपीट करते हैं और बदतमीजी भी करते हैं, जिसकी गहराई से जांच कर उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता है. पिछले पांच वर्षों से सरकार से मुक्ति संस्थान को मूक बधिर स्कूल चलाने के लिए 15-16 लाख रुपये का अनुदान सरकार दे रही है. इसी तरह तीन वर्ष से नेत्रहीन विद्यालय के संचालन के लिए 15-15 लाख रुपये दिये गये.

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स्पास्टिक विद्यालय के संचालन को लेकर भी 14-14 लाख सरकार की तरफ से दिये गये हैं. विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों की भौतिक जांच ठीक तरीके से नहीं की गयी.

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राज्य निशक्तता आयुक्त से की गयी थी शिकायत

राज्य निशक्तता आयुक्त सतीश चंद्रा से गुमला के मूक बधिर आवासीय विद्यालय, नेत्रहीन विद्यालय में संचालकों द्वारा घटिया खाना खिलाने, संस्था के पदाधिकारियों द्वारा बच्चों और शिक्षकों से की जानेवाली मारपीट की शिकायत की गयी थी.

राज्य निशक्तता आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संस्थान के विरुद्ध कार्रवाई करने की अनुशंसा महिला और बाल विकास मंत्री और सचिव से की थी. उन्होंने कहा था कि यह विद्यालय सरकार के अनुदान से चलता है.

बच्चों के साथ हुई मारपीट के मामले पर गुमला के एसपी ने थाना प्रभारी से भी जांच करायी थी. जिसमें बच्चों से मारपीट किये जाने को सही ठहराया गया था.

2018-19 में मुक्ति संस्थान को सरकार से मिला अनुदान-

स्कूल का नामअनुदान की राशि
मूक बधिर स्कूल16,42,000 रुपये
नेत्रहीन विद्यालय10,38,000 रुपये
स्पास्टिक विद्यालय8,90,000 रुपये

 

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