Jamshedpur

रेल जीएम के आदेश के बावजूद चक्रधरपुर रेल मंडल के रेलवे क्वार्टरों से नहीं हटा अवैध कब्जा

रेलवे मेंस कांग्रेस की ओर से उठाया गया था मुद्दा, डेढ़ माह बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं रेल मंडल के वरीय अधिकारी, पुलिस अधिकारी पर भी है कब्जा का आरोप

ASHOK KUMAR

Jamshedpur : साउथ इस्टर्न रेलवे की जीएम अर्चना जोशी ने टाटानगर स्टेशन का जायजा लेने के दौरान रेलवे मेंस कांग्रेस की ओर स शिकायत की गई थी क रेलवे के कई क्वार्टरों पर अवैध रूप से दबंगों का कब्जा है. इसके बाद रेल जीएम की ओर से चक्रधरपुर रेल मंडल के वरीय अधिकारियों को इस दिशा में पहल करने का आदेश दिया गया था. बावजूद आज डेढ़ माह बीत गए हैं, लेकिन किसी तरह की कागजी प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गयी है. रेल जीएम से शिकायत के बाद रेल कर्मचारियों को लग रहा था कि शायद उन्हें अब जल्द ही रेलवे क्वार्टरों का लाभ मिलने लगेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है.

पूरे रेल मंडल में ऐसी स्थिति

रेलवे क्वार्टरों पर अवैध कब्जा सिर्फ टाटानगर रेलवे कॉलोनी पर ही नहीं है बल्कि डांगुवापोसी व रेल मंडल के सभी जगहों पर है. इसकी जानकारी सभी रेल अधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों को भी है, लेकिन उनकी ओर से अभी तक किसी तरह की पहल नहीं की गई है.

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रेलवे क्वार्टर कमेटी की बैठक में उठता है मुद्दा

रेलवे क्वार्टरों पर अवैध कब्जा करने का मुद्दा सिर्फ रेलवे क्वार्टर कमेटी की बैठक में ही उठाने का काम किया जाता है. हालाकि बैठक में रेल अधिकारी भी मौजूद रहते हैं, लेकिन उनकी ओर से किसी तरह की पहल तक नहीं की जाती है. यूनियन की ओर से मुद्दा उठाया जाता है, लेकिन उसपर पहल नहीं किए जाने से यूनियन के नेताओं को भी आश्चर्य होता है

रेल कर्मचारियों के लिए क्वार्टर नहीं

पूरे रेल मंडल की बात करें तो जो कर्मचारी यहां पर काम कर रहे हैं. उन्हें भी अब क्वार्टर नसीब नहीं हो रहा है. वे संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर परेशान हो गए हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. वे मजबूरन निजी क्वार्टर में रहने को विवश हैं. रेलवे की मान्यता प्राप्त यूनियन की ओर से इस मुद्दे को पीएनएम मीटिंग में बराबर उठाने का काम किया जाता है, लेकिन परिणाम कुछ भी सामने नहीं आता है.

मेंस कांग्रेस ने दो माह पूर्व पीएनएम में उठाया था मुद्दा

मेंस कांग्रेस के मंडल संयोजक शशि मिश्रा ने दो माह पूर्व हुए पीएनएम में भी रेलवे क्वार्टर पर अवैध कब्जा का मुद्दा उठाया गया था. बैठक में डीआरएम से लेकर आरपीएफ कमांडेंट तक मौजूद थे. तब कमांडेंट ने ही कहा था कि दूसरे दिन से ही फोर्स मंगाकर इस दिशा में पहल की जाएगी. आज  पूरे दो माह बीत गए हैं, बावजूद पहल नहीं की गई है. टाटानगर में भी रेलवे क्वार्टरों पर कब्जा है, जिसे मुक्त कराने की जरूरत है. साथ ही खाली पड़ी जमीन को घेराबंदी करने की भी सलाह शशि मिश्रा ने रेल अधिकारियों को दी है.

डीपीएस में 1722  रेल कर्मचारी में 950 क्वार्टर 

डंगुवापोसी मेंस कांग्रेस के सचिव सुभाष मजुमदार ने कहा है डंगुवापोसी  में  कुल 1722 रेल कर्मचारी हैं, लेकिन क्वार्टर की संख्या 950 है. यहां पर तो कुछ रेल कर्मचारी क्वार्टर को लेकर उसे किराया पर लगाए हुए हैं. जिन्हें क्वार्टर की जरूरत है उन्हें नहीं मिल रही है. जिसे क्वार्टर की जरूरत है उनके लिए आवेदन को अधिकारियों तक पहुंचाने पर वे हस्ताक्षर करना भी मुनासीब नहीं समझते हैं. एक क्वार्टर में 4-5 रेल कर्मचारी भेड़-बकरी की तरह रहने को विवश हैं. रेलवे क्वार्टरों से अवैध कब्जा हटना ही चाहिए.

दबंगों व ठेकेदारों ने जमाया है कब्जा

रेलवे क्वार्टरों पर सिर्फ रेलवे के ठेकेदारों ने ही कब्जा नहीं किया है, बल्कि इलाके के दबंगों ने भी कब्जा रखा है. दबंगों के बारे में कोई कुछ बोल नहीं सकता है. स्थानीय अधिकारी जान-बूझकर उनपर हाथ नहीं डालना चाहते हैं.

रेलवे ट्रॉफिक कॉलोनी में पुलिस अधिकारी का है कब्जा

बागबेड़ा इलाके में एक पुलिस अधिकारी ने रेलवे क्वार्टर पर कब्जा कर रखा है. यह मामला तब सामने आया था, जब बागबेड़ा के पंचायत समिति सदस्य जितेंद्र यादव ने इसकी शिकायत डीआरएम विजय कुमार साहू से की थी. बावजूद इस रेलवे क्वार्टर पर अवैध कब्जा अब भी बरकरार है.

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