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लातेहार से धनबाद व जामताड़ा तक हो रहा हर दिन करोड़ों रुपये के कोयले का अवैध कारोबार (देखें वीडियो)

Ranchi:  झारखंड में कोयले का अवैध कारोबार जारी है. अवैध कारोबार कभी रुककर, कभी ठिठककर चल रहा है. हर दिन करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार होने की खबर है. ताजा सूचना धनबाद और जामताड़ा से है. धनबाद के निरसा थाना क्षेत्र के कालुबथान ओपी क्षेत्र में कोयले का अवैध कारोबार चल रहा है. यह अवैध कारोबार नाव के जरिये हो रहा है. लोगों को इसकी खबर ना लगे, इसलिए अवैध कारोबार सुबह के 4 बजे से 6 बजे के बीच किया जाता है. रात में कोयले को निरसा क्षेत्र में ही जमा किया जाता है. फिर उसे साइकिल व ट्रैक्टर के जरिये दामोदर नदी तक पहुंचाया जाता है. नाव पर कोयला लोड करके नदी पार कराया जाता है. फिर कोयला को पश्चिम बंगाल के इलाके में स्थित ईंट-भट्ठा मालिकों को बेच दिया जाता है. सूचना है कि हर दिन 20-30 ट्रक कोयला इस तरह पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है.

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जामताड़ा में भी धड़ल्ले से हो रहा अवैध कारोबार  

एक सूचना जामताड़ा से भी है. पश्चिम बंगाल स्थित इसीएल के खदानों से अवैध तरीके से निकाले गये कोयला को ट्रकों के जरिये बिहार पहुंचाया जा रहा है. पहले कोयला जीटी रोड से पार कराया जाता था. अब जामताड़ा जिला से होते हुए पार कराया जा रहा है. पुलिस के अफसरों को इसके बदले मोटी रकम मिलती है. हर दिन करीब 30 ट्रक अवैध कोयला बिहार में ईंट-भट्ठे के मालिकों तक पहुंचाया जा रहा है. इस अवैध धंधे को जगदीश, अल्ला रखा, नागेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति संचालित करते हैं. इन लोगों के द्वारा कुछ दिन धनबाद जिले के जीटी रोड से तो कुछ दिन जामताड़ा जिला के रास्ते पश्चिम बंगाल का अवैध कोयला निकाला जा रहा है.

खबर प्रकाशन के बाद कुछ दिन रूका था कारोबार

उल्लेखनीय है कि इससे पहले लातेहार जिला में प्रति दिन 10-20 ट्रक कोयला का कारोबार चलने की खबर आयी थी. न्यूज विंग द्वारा खबर प्रकाशित किये जाने के बाद कुछ दिनों तक कोयला का अवैध कारोबार रुक गया था. लेकिन सूचना है कि यह कारोबार दोबारा चालू हो गया है. जानकारी के मुताबिक, सीसीएल के आम्रपाली व मगध कोलियरी से हर दिन सैंकड़ों ट्रक कोयला लातेहार के चंदवा समेत दूसरे रेलवे साइडिंग तक आता है. सीसीएल के अफसरों की मिलिभगत से ट्रकों व डंपरों में चालान से 2-3 टन अधिक कोयला लोड कर दिया जाता है. जिसे अवैध कोयला के कारोबार रास्ते में जंगल में उतार लेते हैं. फिर रात के अंधेरे में जमा कोयले को लातेहार से बाहर पहुंचा दिया जाता है.

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