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नियमों की अनदेखी: निगरानी में पेंडिंग है केस, विभाग ने दे दिया अधिकारी प्रीति रानी को प्रमोशन, ACB ने जारी किया था स्वच्छता प्रमाण पत्र

Ranchi: झारखंड में प्रमोशन का मामला गरमाया हुआ है. कुछ महीने पहले कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी तरह के प्रमोशन पर रोक लगा दी थी. अब यह रोक हटा ली गयी है. लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी अधिकारी हैं, जिन्हें कायदे से प्रमोशन नहीं मिलना चाहिए था, लेकिन विभाग की तरफ से उन्हें प्रमोट कर दिया गया. ऐसा ही मामला में महिला बाल विकास एवं समाजिक सुरक्षा विभाग में पदस्थापित अधिकारी प्रीति रानी का है. प्रीति रानी के खिलाफ धनबाद के स्पेशल विजीलेंस कोर्ट में एक मामला दर्ज हुआ. केस नंबर 17/2016 है. इनपर पीसी एक्ट भी लगा. मामला अभी तक पेंडिंग है. जांच अधूरी है. फिर भी उन्हें प्रमोशन देकर CDPO से DSWO बना दिया गया. फिलहाल उनकी पोस्टिंग लोहरदगा में समाज कल्याण पदाधिकारी के रूप में है, लेकिन प्रतिनियुक्ति पर वो महिला बाल विकास एवं समाजिक सुरक्षा विभाग में कार्यरत हैं.

एसीबी ने जारी किया स्वच्छता प्रमाण पत्र

एसीबी के संकल्प पत्र में इस बात का साफ उल्लेख है, कि झारखंड के किसी अधिकारी पर अगर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होता है और मामले में पीसी एक्ट लगता है, तो उस पूरे प्रकरण की जांच एसीबी करती है, ना कि जिला पुलिस. प्रीति रानी पर धनबाद के निगरानी ने 2016 में मामला दर्ज किया. लेकिन इस बात की जानकारी एसीबी को नहीं है. किसी भी अधिकारी को प्रमोशन देने से पहले एसीबी की तरफ से उस अधिकारी का स्वच्छता प्रमाण पत्र लिया जाता है. एसीबी उन्हीं अधिकारियों को यह पत्र निर्गत करता है, जिनपर किसी तरह का कोई मामला दर्ज नहीं होता है. लेकिन एसीबी ने प्रीति रानी पर किसी तरह के मामले की जानकारी से इनकार किया और स्वच्छता प्रमाण पत्र जारी कर दिया. जिसके बाद महिला बाल विकास एवं समाजिक सुरक्षा विभाग की तरफ से प्रीति रानी को प्रमोशन दे दिया गया.

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