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प्रबंध निदेशक के बिना चल रहा अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम, 24,027 अल्‍पसंख्‍यक छात्रों की छात्रवृत्ति लटकी

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  • प्रबंध निदेशक के बिना चल रहा अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम
  • प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन नहीं हो सके हैं वेरीफाई
  • 2018 में सिर्फ 56,998 छात्रों का फॉर्म वेरीफाई हुआ,
  • 1,39,000 छात्रों ने भरा था फार्म
  • 24,027 छात्र छात्रवृत्ति से हो सकते हैं वंचित

Ranchi: पिछले चार सालों में राज्य में अलग-अलग निगम और बोर्ड का गठन किया, ताकि विभागीय कार्य जल्द से जल्द हो सके और लोगों को लाभ मिले. इन्हीं में से एक है झारखंड राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम. जिसकी स्थापना कल्याण विभाग के कार्यों को साझा करने और अल्पसंख्यकों से संबधित कार्यों का निष्पादन के लिए की गयी. लेकिन, वर्तमान में प्रबंध निदेशक की कमी के कारण यहां अल्पसंख्यक कल्याण से संबधित कार्य रूक गये हैं. प्रबंध निदेशक की कमी के कारण सही समय में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति फॉर्म वेरिफाई नहीं हो पायी है.

केंद्र सरकार ने बढ़ायी थी 31 दिसंबर तक की तिथि

राज्य में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 30 नवंबर को पोर्टल बंद हो चुकी थी. विभिन्न अल्पसंख्यक संगठनों ने कल्याण मंत्रालय से पोर्टल में वेरिफिकेशन तिथि आगे बढ़ाने की मांग की. जिसके बाद 19 दिसंबर को 31 दिसंबर तक पोर्टल चालू कर वेरिफाई करने का आदेश दिया गया. लेकिन इसके बाद भी निगम की ओर साल भर का आंकड़ा 56,998 फॉर्म वेरीफाई होने की बात बतायी गयी. जबकि साल 2018 में 1,39,000 बच्चों ने आवेदन किया था. राज्य में अल्पसंख्यक कोटा में 80,925 छात्रों को छात्रवृत्ति दी जानी है. 24,027 छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हो सकते हैं.

गठन के चार साल बाद शुरू हुआ ऋण कार्य

निगम की स्थापना अल्पसंख्यकों को स्वावलंबी बनाने के लिए और अल्पसंख्यक कार्यों का जल्द से जल्द निष्पादन करने के लिए किया गया था. लेकिन, गठन के चार साल बाद अब निगम में अल्पसंख्यकों को ऋण देने का काम शुरू किया गया है. कर्मचारियों ने जानकारी दी कि काम चल रहा. नये एमडी के आने से कार्य सुगम हो जाएगा.

अतिरिक्त प्रभार में नियुक्त होते हैं एमडी

अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के पूर्व प्रबंध निदेशक गौरी शंकर मिंज 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए. जिसके बाद अब तक एमडी के पद पर किसी पदाधिकारी को नियुक्त नहीं किया गया है. कर्मचारियों ने जानकारी दी कि दो साल के लिए आदिवासी कल्याण आयुक्त गौरी शंकर मिंज को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. इस दौरान पांच-चार माह वे कार्यालय आये. लेकिन, अब एमडी नहीं होने के कर्मचारियों को प्रोजेक्ट भवन स्थित कल्याण विभाग जाना होता है. जिससे काम बाधित होती है.

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