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कोयला तस्करों से सांठ-गांठ कर अवैध कमाई करने वाले दारोगा प्रदीप चौधरी को आईजी कार्मिक ने दिलवा दी प्रोन्नति, फिर तथ्यहीन पत्राचार किया

-              मामला सितंबर 2016 का, दारोगा को डिमोट करने और जिम्मेदार अफसरों व कर्मियों पर कार्रवाई की अनुशंसा

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Ranchi : पुलिस मुख्यालय के अफसरों ने भ्रष्टाचार के आरोपी दारोगा प्रदीप चौधरी को इंस्पेक्टर रैंक में प्रोन्नति दे दी. दारोगा प्रदीप चौधरी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना रहने के बाद भी तत्कालीन आईजी कार्मिक समेत अन्य अफसरों ने दारोगा को प्रोन्नति देने का फैसला ले लिया. क्योंकि तत्कालीन आईजी कार्मिक ने प्रोन्नति समिति की बैठक में इस तथ्य को छिपा लिया कि दारोगा प्रदीप चौधरी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में प्राथमिकी दर्ज है. नियम है कि जिस पदाधिकारी के खिलाफ न्यायिक मामला विचाराधीन हो, उन्हें प्रोन्नति नहीं दी जा सकती. अब यह मामला पकड़ में आया है. जिसके बाद रेल आईजी सुमन गुप्ता ने डीजीपी को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर प्रदीप चौधरी को डिमोट करने और उन्हें प्रोन्नति देने के लिए जवाबदेह पुलिस मुख्यालय के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की है.

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ये था मामला

जानकारी के मुताबिक दारोगा प्रदीप चौधरी वर्ष 2016 में धनबाद जिला में पदस्थापित थे. इससे पहले वह हजारीबाग में पदस्थापित थे. उसी दौरान उन पर कोयला तस्करों से मिलकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा था. इसकी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने की. जांच में तथ्य मिलने के बाद एसीबी ने उनके खिलाफ कांड संख्या-02//2016 दर्ज किया. दारोगा प्रदीप चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की जानकारी एसीबी ने अपने ज्ञापांक-9940 दिनांक 15.09.2016 के द्वारा डीजीपी डीके पांडेय को दी. डीजीपी डीके पांडेय के एनजीओ शाखा ने उसी दिन तत्कालीन आईजी कार्मिक को दे दी. 16.09.2016 को तत्कालीन आईजी कार्मिक ने यह जानकारी प्राप्त की. इसके तीन दिन बाद 19.09.2016 पुलिस मुख्यालय में राज्य पुलिस स्थापना पर्षद (प्रोन्नति समिति) की बैठक हुई. इस बैठक में दारोगा प्रदीप चौधरी को प्रोन्नति देने का फैसला लिया गया. जिसका आदेश भी जारी कर दिया गया. मुख्यालय के आदेश पर बोकारो डीआईजी ने 23.09.2016 को दारोगा प्रदीप चौधरी को प्रोन्नति देते हुए जमशेदपुर जिला बल के विरमित करने का आदेश दिया. जिसके बाद 03.10.2016 को धनबाद के एसपी ने दारोगा प्रदीप चौधरी को विरमित कर दिया. विरमित होने के बाद दारोगा प्रदीप चौधरी ने जमशेदपुर रेल जिला में इंस्पेक्टर रैंक में योगदान दे दिया.

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प्रदीप चौधरी के खिलाफ एसीबी में प्राथमिकी दर्ज की थी

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आईजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दारोगा प्रदीप चौधरी के खिलाफ एसीबी में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी 16 सितंबर 2016 को ही आईजी कार्मिक को मिल गयी थी. इसके तीन दिन बाद राज्य पुलिस स्थापना पर्षद की बैठक में इस मामले को नहीं रखा गया. फिर 18 दिन बाद 04.10.2016 को आईजी कार्मिक ने बोकारो डीआईजी को पत्र लिखा. जिसमें 10.10.2016 का मुहर लगा हुआ है. पत्र में आईजी कार्मिक ने प्रदीप चौधरी के खिलाफ एसीबी में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी. साथ ही इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा. बाकोरो डीआईजी ने करीब दो माह बाद कार्मिक आईजी को पत्र लिखा, जिसमें सूचित किया कि दारोगा प्रदीप चौधरी प्रोन्नती पाकर रेल जमशेदपुर के लिए विरमित हो चुके हैं.

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23 दिसंबर 2016 को आईजी कार्मिक ने रेल डीआईजी को पत्र लिखा

डीआईजी का पत्र मिलने के बाद आईजी कार्मिक ने 27.10.2016 को धनबाद के एसएसपी को पत्र लिखकर यह सूचना मांगी कि प्रदीप चौधरी वहां पदस्थापित हैं या नहीं. इसके बाद 23 दिसंबर 2016 को आईजी कार्मिक ने रेल डीआईजी को पत्र लिखा. जिसमें कहा कि पुलिस अवर निरीक्षक के मामले में नियुक्त प्राधिकार एवं उसे हटाने के लिए संबंधित डीआईजी सक्षम प्राधिकार होते हैं, इसलिए प्रदीप चौधरी के खिलाफ एसीबी में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में कार्यवाही करें. यहां उल्लेखनीय है कि मामला तत्कालीन दारोगा को पद से हटाने का नहीं था. मामला अयोग्य रहते हुए भी दारोगा प्रदीप चौधरी को प्रोन्नति देने का था. फिर इस मामले में रेल डीआईजी के स्तर से कैसे कार्रवाई की जा सकती है. इस तरह आईजी कार्मिक ने पहले को तथ्य को छिपाकर दारोगा प्रदीप चौधरी को प्रोन्नति दिलवा दी, फिर तथ्यहीन पत्राचार किया जाता रहा. इसलिए इंस्पेक्टर प्रदीप चौधरी को तुरंत डिमोट किया जाये और संबंधित अफसरों व कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाये.

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