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IFS अशोक कुमार ने पहले बरती अनियमितता, अब खुद कर रहे अपनी फाइल की जांच

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  • मुंबई की उतेकर कंपनी को बिना टेंडर व डीपीआर के दिया 3.64 करोड़ का काम 
  • अशोक कुमार का साल भर में चार बार हुआ तबादला, अब गृह कारा विभाग में विशेष सचिव का है अतिरिक्त प्रभार
  • मामला लोकायुक्त के पास, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने भी सरकार को सौंपी थी रिपोर्ट
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Ravi Aditya

Ranchi: वन विभाग में भी अजीब खेल चल रहा है. अनियमितता बरतने वाले आइएफएस अफसर को क्रीम पद की जिम्मेवारी सौंपी गई है. यही नहीं एक साल के अंदर चार बार तबादला भी किया गया है. सीसीएफ रैंक के अफसर अशोक कुमार दिसंबर 2017 तक बिरसा जैविक उद्यान में निदेशक के पद पर थे. इसके बाद उन्हें सीसीएफ वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के साथ सीसीएफ विजिलेंस का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. फिर उन्हें राज्य प्रतिनियुक्ति में तैनात करते हुए गृह कारा विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेवारी सौंपी गई. वहां से फिर उन्हें वन विभाग में सीसीएफ गजेटेड की जिम्मेवारी सौंपी गई. फिर दो दिन पहले उन्हें गृह कारा विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. इसके साथ ही वे सीसीएफ गजेटेड (राजपत्रित)भी हैं. और वे अपने द्वारा बरती गई अनियमितता की फाइल खुद देख रहे हैं.

बिना टेंडर के 3.64 करोड़ का काम मुंबई की कंपनी को दिया

बिरसा जैविक उद्यान में निदेशक के पद पर रहते हुए अशोक कुमार ने बिरसा जैविक उद्यान में बने मछली घर के एक्वेरियम का काम बिना टेंडर के मुंबई की कंपनी उतेकर को दे दिया. इस काम के लिए न डीपीआर बना और न ही प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति मिली. झारखंड चिड़िया घर प्राधिकरण से भी इसकी अनुमति नहीं मिली.  अशोक कुमार ने नियमों को ताक में रखकर मुंबई की कंपनी उतेकर को 36462816 रुपये का काम दे दिया.

पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने सरकार को की थी रिपोर्ट, अब मामला लोकायुक्त के पास

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इस मामले में तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एलआर सिंह ने राज्य सरकार और पीसीसीएफ हेड ऑफ फोर्स को रिपोर्ट किया था. इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब यह मामला लोकायुक्त के पास है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक्वेरियम में दो लोगों ने पार्टिसिपेंट किया था. इसमें मुंबई की कंपनी उतेकर ने एक्वेरियम निर्माण के लिये 36462816 रुपये का रेट दिया था. इसके बाद निर्माण करने वाली कंपनी ने निर्माण के बाद एक साल देखरेख करने के लिये 3816760 रुपये का रेट दिया था. दूसरी बंगलुरु की कंपनी ने स्टील वाटर एक्वाटिक्स ने निर्माण के लिये 38706885 रुपये का रेट दिया था. जबकि निर्माण के बाद एक साल देखरेख के लिए 46 लाख रुपये का रेट दिया था.

अब खुद फाइल की जांच कर रहे सीसीएफ अशोक कुमार

अशोक कुमार वन विभाग में सीसीएफ गजेटेड भी हैं. सीसीएफ गजेटेड के पास ही सभी पर्सनल फाइलें आती हैं. अपने द्वारा बरती गयी अनियमितता की फाइल भी उन्हीं के पास है. वहीं वे वर्तमान में गृह कारा विभाग में विशेष सचिव के अतिरिक्त प्रभार में भी हैं. इससे पहले भी अशोक कुमार राज्य प्रतिनियुक्ति में खेल-कूद कला संस्कृति और जरेडा भी रह चुके हैं. टाइगर प्रोजेक्ट में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर भी थे.

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