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अगर आप जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो oyo की इस सक्सेस स्टोरी को जरूर पढ़ें

Sanjay Prasad
शायद ही कोई हो, जो इस तीन शब्द OYO से पर‍िच‍ित नहीं हो. oyo रूम ने न केवल होटल की परिभाषा बदल डाली बल्कि मिडिल क्लास से लेकर लोअर क्लास के लिए भी होटल में रहना संभव बना दिया. लेकिन oyo के अस्तित्व में आने की कहानी बेहद रोमांचक है. भारत के अलावा पूरी दुनिया भर में अपने इनोवेटिव बिजनेस के लिए जाने जाने वाले oyo रूम के संस्थापक रितेश अग्रवाल हैं, जो ओडिशा के छोटे से शहर रायगढ़ के रहनेवाले हैं. 28 साल के मोस्ट बैचलर रितेश ने चेतन भगत के शो deep talk में बताया कि रायगढ में पिता की एक छोटी सी ग्रॉसरी की दुकान थी. पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं था, लेकिन इंटरनेट की दुनिया काफी फैसिनेट करती थी. पांचवीं क्लास में था तो लोगों को आईआरसीटी से रेलवे का टिकट बनाकर देने लगा.

फिर शहर में एयरटेल का नेटवर्क आया तो उसका सिम बेचा. यह सब स्कूल में पढ़ाई के दौरान किया. पैरेन्ट्स ने इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए ग्यारहवीं में कोटा भेज दिया. लेकिन मैं तैयारी की बजाय छोटी-छोटी कंपनियों में इंटर्नशिप करने लगा. इस इंटर्नशिप से मिले पैसे से घूमने लगा. सैर के दौरान अहसास हुआ कि कम बजट के होटल मिलने मुश्किल है. पहले ओरेवल नाम से होटल व्यवसाय शुरू किया. गुड़गाव के एक होटल को oyo रूम बनाया, किस्मत से वह होटल चल गया और धीरे-धीरे गुड़गाव और दिल्ली से होते हुए देश भर में इसका विस्तार होते गया.
जब मोदी जी ने कहा-मुझे भी oyo की तरह होटल का चेन खोलना चाहिए था
रितेश अग्रवाल ने बताया कि मेरे इस बिजनेस को लेकर पैरेन्ट्स बहुत ज्यादा खुश नहीं थे और वे हमेशा पढ़ने पर जोर देते थे, लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने टीवी पर उनका नाम लेकर कहा कि oyo की तरह उन्हें होटल चेन खोलना चाहिए था, तब पैरेन्ट्स को लगा कि बेटा जो कुछ भी कर रहा है, अच्छा कर रहा है.
कोविड हमारे लिए टफेस्ट टाइम था
रितेश ने बताया कि कोविड काल होटल बिजनेस के लिए सबसे टफ टाइम था. बिजनेस 15-20 फीसदी पर आ गया था. खर्च निकालना मुश्किल था, कमाई 80 फीसदी कम हो गई. लेकिन मैं परेशान नहीं था. जो आदमी कुछ साल पहले तक हैंड टू माउथ रहा है, उसकी सहनशीलता का लेवल अलग होता है. हम इतने बुरे दौर देखे थे कि किसी भी तरह के बुरे दौर से डर नहीं रहे थे. हमें अंदर से विश्वास था कि हम लड़ेंगे भी और जीतेंगे भी. इस दौरान हमने टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर इनोवेटिव बिजनेस किया. कोरोना के दौरान समाज के फ्रंटलाइनर्स को काफी सपोर्ट किया. यहां तक कि अमेरिका में हमने कम्युनिटी वर्क काफी किया, जिसे बाद में व्हाइट हाउस ने सराहना की. निजी तौर पर मेरे लिए मुश्किल वक्त रहा, जब हमने कंपनी को रिस्ट्रक्चरिंग किए और कई ऐसे साथियों को हमसे विदा होना पड़ा, लेकिन हमने उन्हें oyo के शेयर दिए. कोरोना के बाद पिछले कई सप्ताह से oyo का बिजनेस सबसे बेहतर जा है.
रितेश के टिप्स
1.अपने एस्पीरेशंस को छोटा मत रखिए. हमेशा बड़ा करने की सोचिए. जब मैं कर सकता हूं तो कोई भी कर सकता है.
2.यह समय टू टायर और थ्री टायर शहरों के युवाओं का है. इन युवाओं में कुछ करने की चाहत और हंगर काफी है. ये युवा ही कल दुनिया पर राज करेंगे.
3.समय का आदर करें. समय का चक्रव्यूह कभी रूकता नहीं. आपको तय करने होगा कि समय का कैसे बेस्ट इस्तेमाल कर अपने लिए वैल्यू क्रिएट करें. इसके लिए हर रोज टु डू लिस्ट बनाएं और सुनिश्चित करें कि उस दिन वह काम जरूर करें.
4. अपने लिए समय जरूर निकालें और हर दिन कुछ नया सीखें.
5.कभी गिव अप नहीं करें. ऐसा कभी भी नहीं सोचें कि ऐसा नहीं हुआ तो सब कुछ खत्म हो जाएगा.
6.कोशिश करें कि आपके आसपास अच्छे लोग हो, जिनसे आप सीख सके. आप वैसे लोगों के साथ नहीं रहें, जो आपसे कम स्मार्ट हो और आप उनसे कुछ सीख नहीं पाएं.
7.जिंदगी में कैलकुलेटेड रिस्क भी जरूर लें. यह रिस्क तब आप ले पाएंगे, जब आपको अपनी स्थिति का सही अंदाजा होगा. खुद पर निवेश जरूर करें, इससे आप समय के साथ अपग्रेड होते रहते हैं.
8.फिटनेस बेहद जरूरी है. फिटनेस के लिए खानपान और काम करने के तरीके पर ध्यान देना जरूरी है. 70 फीसदी फिटनेस सही खानपान और 30 फीसदी काम को सही तरीके से करने से होता है.

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