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इमरजेंसी में ब्लड चाहिए तो चांसलर पोर्टल के डोनर लिस्ट पर ना करें भरोसा

  • ब्लड डोनर लिस्ट में है नाम लेकिन कई छात्रों को जानकारी भी नहीं
  • कईयो के फोन ऑउट ऑफ सर्विस, कुछ के स्विच ऑफ तो कुछ नॉट रिचेबल
  • क्या सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए दिया गया ब्लड डोनर्स का नाम

Ranchi: चांसलर पोर्टल में पिछले दिनों रक्तदाताओं की सूची डाली गई. राजभवन में इसके लिए बैठक की गई. जिसके बाद राज्य के विश्वविद्यालयों से सबंद्ध कॉलेजों और विवि के ब्लड डोनरों की सूची चांसलर पोर्टल में डाली गई. इस सूची में विद्यार्थी और शिक्षक कर्मचारियों के नाम, नंबर, ब्लड ग्रुप समेत अन्य जानकारियां हैं. रांची विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध सभी कॉलेजों के रक्तदाताओं के नाम,नंबर पता और डिपार्टमेंट सभी पोर्टल में दर्ज हैं.

लेकिन जब उस नाम और नंबर के आधार पर न्यूज विंग ने डोनर्स के दिये गये संपर्क नंबर पर कॉल किया. तो पता चला कि कई छात्रों को डोनर्स लिस्ट में नाम होने की जानकारी नहीं है. और जिन्हें जानकारी है, वे ब्लड डोनेट करने में असहमति जता रहे हैं.

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मांगी गयी थी विलिंग डोनर्स की लिस्ट

 

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दरअसल यूनिवर्सिटी से 14 जनवरी तक विलिंग डोनर्स की सूची मांगी गयी थी. लेकिन कॉलेज प्रबंधन और यूनिवर्सिटी द्वारा उनके नाम चांसलर पोर्टल में डाल दिये गये हैं. डोनर्स की सूची मांगने का उद्देश्य यह था कि आपातकाल की स्थिति में उनसे ब्लड लिया जा सके. लेकिन सवाल ये उठता है कि छात्रों को खुद के डोनर होने की जानकारी ही नहीं है तो वे डोनेट कैसे करेंगे.

बावजूद इसके जब न्यूज विंग ने उनसे संपर्क किया तो किसी ने कहा मैं कितनी बार खून दूंगा, तो कईयो के नंबर बंद मिले, वहीं कुछ ने कहा हम खून नहीं दे सकते. ऐसे में कैसे माना जाए कि कॉलेज या यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की मर्जी से यह लिस्ट बनाकर सौंपी है. यह सवाल कहीं न कहीं उठता है कि लिस्ट सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए तो नहीं बनायी गयी.

नहीं लगता फोन 

अपनी पड़ताल के दौरान न्यूज विंग ने दो दिनों तक छात्रों से संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन रांची विश्वविद्यालय और रांची वीमेंस कॉलेज के कई छात्रों का फोन नहीं लगा. हालांकि दूसरे दिन भी इन नंबरों से संपर्क करने की कोशिश किया गया. लेकिन फोन नॉट रिचेबल, स्विच ऑफ और सेवा में नहीं है बताया गया. हालांकि इस दौरान जितने भी छात्रों को फोन लगाया गया. उनमें से दो छात्रों ने रक्त देने पर सहमति जताई.

शिक्षकों ने भी कहा बार-बार कैसे दें ब्लड

न्यूज विंग ने पड़ताल के दौरान रांची वीमेंस कॉलेज, रांची विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों से रक्तदान करने के संबध में बात की. लेकिन किसी भी शिक्षक ने रक्तदान करने में सहमति नहीं जताई. कुछ ने कहा कि कुछ दिन पहले किए हैं तो बार-बार कैसे करें. कुछ ने कहा बाहर आएं हैं संभव नहीं. जबकि इस दौरान रांची वीमेंस कॉलेज और रांची विश्वविद्यालय के पांच-पांच शिक्षकों से बात की गई थी, जिनके नाम सूची में थे.

गोस्सनर कॉलेज के अधिकांश छात्रों को जानकारी भी नहीं

पोर्टल में गोस्सनर कॉलेज के लगभग 80 छात्रों का नाम डाला गया है. इनमें से दस छात्रों से न्यूज विंग ने संपर्क किया. जिसमें से चार छात्रों ने कहा कि इस संबध में जानकारी नहीं है. चार का फोन नंबर सेवा में नहीं था. वहीं दो ने कहा कि अभी तो नहीं कर सकते किसी और को बोलते हैं. पोटर्ल में एसकेबी कॉलेज की सूची तो डाली गई है लेकिन यहां छात्रों का संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं है.

हर स्तर पर कुलपति की जिम्मेवारी नहीं

इस संबध में जब रांची विश्वविद्यालय कुलपति से बात की की गई तो उन्होंने बताया कि हर स्तर पर कुलपति को जानकारी हो यह संभव नहीं है. हर काम की जिम्मेवारी कुलपति की नहीं होती. डीएसडब्ल्यू और एनएसएस प्रमुख से जानकारी लें.

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