JharkhandRanchi

हिम्मत है तो मैनहर्ट मामले में सरकार से सीबीआई जांच की मांग करें सरयू राय : जेएमएम

Ranchi: राजधानी के प्रस्तावित सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम का डीपीआर बनाने और इसके क्रियान्वयन का सर्वेक्षण करने के लिए मैनहर्ट कंपनी को 17 करोड़ बकाया भुगतान का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. सरयू राय के जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन पर लगाये गये आरोप पर जेएमएम की ओर से पलटवार किया गया है. पार्टी के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने रविवार को प्रेस काफ्रेंस में आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सरयू राय के पास हिम्मत है तो, वह सोमवार को सदन में खड़े होकर मैनहर्ट कंपनी के मामले में सीबीआई जांच की मांग सरकार से करें.

इसे भी पढ़ें –JJMP के शशिकांत का आरोप, ‘पुलिस के नोट पढ़ बयान जारी करते हैं सबजोनल कमांडर’

 भूख से मौत रिपोर्ट का अता-पता नहीं

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा की उनके विभाग की लापरवाही से राज्य के कई लोगों की भूख से मौत हो चुकी है. लेकिन उस मौत की रिपोर्ट का कुछ अता-पता नहीं है. उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार के मंत्री सरयू राय वैसे तो काफी लंबी-लंबी बात करते हैं, लेकिन सदन में वह मौन रहते हैं.

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी शासन में जातीय संघर्ष जारी है. जितनी बातें मंत्री सरयू राय अखबारों में बोलते हैं, उतनी कैबिनेट और सदन में नहीं बोलते हैं. एक तरफ कंबल और हरमू नदी घोटाले के लिए मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री दोनों दोषी हैं, तो दूसरी तरफ भूख से मौत के लिए सरयू राय भी दोषी हैं. किसी ने सरकारी खजाना लूटा तो किसी ने भूख से गरीबों की जान ली.

उन्होंने कहा कि भूख से मौत हत्या है और मंत्री से लेकर उपायुक्त पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए. एक दो उपायुक्त पर करवाई करते हुए लटका देने से निश्चित रूप से भूख से मौत बंद हो जाएगी. उन्होंने कहा अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो भूख से मौत की जिम्मेवारी तय करने के लिए पार्टी एक कानून बनायेगी.

इसे भी पढ़ें –रिम्स में हर रस्म के लगते हैं पैसे…शेविंग के 150, लाश पहुंचाने के 300 और भी बहुत कुछ

 आदिवासियों के हित में राजभवन के समक्ष धरना

झारखंड को मूलत: आदिवासियों का क्षेत्र बताते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में 32,106 गांव हैं.  जिसमें जंगल क्षेत्र के गांव करीब 14,847 है. इस जंगल से करीब 46,235 परिवार पलते और बढ़ते हैं. यह जंगल ही आदिवासियों के जीवन जीने का जरिया है.

आज रघुवर सरकार में इन गांवों को खाली कराकर कॉरपोरेट्स के हाथ में जंगल देने की शुरुआत की गई है. जिसके विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा सोमवार को राजभवन के समक्ष एक धरना देगा. धरने के माध्यम से राज्यपाल महोदय को एक पत्र प्रेषित कर इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. इस दौरान पार्टी के सभी नेता व वनों की रक्षा की लड़ाई लड़ने वाले कई सामाजिक संगठन भी धरना में हिस्सा लेंगे.

इसे भी पढ़ें –  बकरी बाजार, महेश पोद्दार, सीपी सिंह, हेमंत सोरेन, फिर सरयू राय व मैनहर्ट और अब सब चुप

Advertisement

Related Articles

Back to top button
Close