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अगर आपके पास स्टार्टअप का ठोस आइडिया है तो हर महीने सरकार से ले सकते हैं 15000, ड्राफ्ट तैयार

प्रोटोटाइप ग्रांट की अधिकतम राशि दस लाख तक होगी, स्कूली पाठ्यक्रम में स्टार्ट अप को शामिल किया जायेगा

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Ranchi: झारखंड में नयी स्टार्ट अप पॉलिसी जल्द लागू होगी. आइटी विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. साल 2016 के स्टार्ट अप पॉलिसी से नयी ड्राफ्ट पॉलिसी में बदलाव किया गया है. पॉलिसी के तहत उद्यमियों के आइडिया चयनित होने पर एक साल तक 15000 रूपये स्टाइपेंड दिया जायेगा. पहले ये राशि आठ हजार थी. एसटी एससी, महिलाओं और दिव्यांगजनों को यह राशि दो हजार अधिक दी जायेगी. जो 17000 होगी. स्टाइपेंड राशि सरकार एक साल तक देगी. इसमें अधिकतम तीन व्यक्तियों का समूह भी हो सकता है. जिन्हें ये राशि दी जायेगी. इस एक साल की अवधि तक उद्यमियों को आइडिया डेवलपमेंट, बिजनेस प्लान बना लेना है. जिसके बाद इन्हें प्रोटोटाइप ग्रांट दी जायेगी. विभाग ने इसके लिये अधिकतम दस लाख रूपये निर्धारित किया है. चयनित उद्यमियों को एक साल मुफ्त लैब सुविधा, मेंटरशिप आदि मिलेगी.

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सेंट्रल इंक्यूबेशन सेंटर बनाया जायेगा: राजधानी रांची में सेंट्रल इंक्यूबेशन सेंटर बनाया जायेगा. जो राज्य के अलग अलग हिस्सों में स्थित इंक्यूबेशन सेंटर का मुख्य हिस्सा होगा. राज्य के संस्थानों में ऐसे इंक्यूबेशन सेंटर बनाने में सरकार मदद करेगी. इन सेंटरों में राज्य सरकार की ओर से ऑनलाइन क्लासेस चलायी जायेगी. ऐसे संस्थानों में इंक्यूबेशन सेंटर बनाने के लिये राज्य सरकार 50 लाख रूपये तक देगी. एक साल में अधिकतम दस संस्थानों को राशि देने का प्रावधान है. संस्थानों से उनके बेहतर परफॉमेंस के लिये कांट्रैक्ट किया जायेगा. संस्थानों को हर साल कम से कम 20 उद्यमियों को मेंटॉर करना है. औद्योगिक संगठन या निजी तौर पर भी इंक्यूबेशन खोले जा सकते है. इसके लिये भी 50 लाख सहायता राशि का प्रावधान है.

 

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स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल: राज्य के वित्त पोषित स्कूलों के पाठ्यक्रम में स्टार्ट अप के पाठ्यक्रम शामिल किये जायेंग. स्कूली छात्रों में योग्यता विकास के लिये उद्यमिता को शामिल किया जायेगा. सेंट्रल इंक्यूबेशन लैब स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग के साथ मिलकर इस पर काम करेगा. समय समय पर स्लेबस अपडेट किया जायेगा.

उद्यमिता विकास कोष का गठन: राज्य सरकार स्टार्ट अप के लिये उद्यमिता विकास कोष का गठन किया जायेगा. कोष का प्रबंधन अटल बिहारी इनोवेशन लैब की ओर से किया जायेगा. इसके निगरानी के लिये पीएमयू का गठन किया जायेगा. फंड का उपयोग इंक्यूबेशन सेंटर स्थापना, उद्यमियों को वित्त सहायता के लिये किया जायेगा. फिलहाल ड्राफ्ट पॉलिसी पब्लिक डोमेन में है. जिस पर आइटी विभाग की ओर से आपत्ति और सलाह की मांग की गयी है. इसके बाद पॉलिसी को कैबिनेट की स्वीकृति मिलेगी.

 

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