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अगर आपको भी है CBSE 12वीं के रिजल्ट का इंतज़ार, तो जानिए कैसे तैयार होगी आपके बच्चे की मार्कशीट…

सुप्रीम कोर्ट में 17 जून को हो सकती है मार्किंग फॉर्मूले की घोषणा

Uday Chandra Singh

New Delhi : अगर आपके घर या परिवार में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का 12वीं का कोई छात्र है, तो ये खबर विशेष रूप से आपके लिए है.

CBSE ने कोरोना की दूसरी लहर से उत्पन्न विषम स्थिति को देखते हुए इस साल की 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. ऐसे में निश्चित रूप से हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि बच्चों का रिजल्ट किस आधार पर तय होगा? क्या फॉर्मूला होगा?

निश्चित रूप से CBSE के लिए बच्चों की मार्कशीट तैयार करना एक बड़ी चुनौती है. सरकार ने इसके इसके लिए एक 13 सदस्यीय कमिटी बनायी है जो मार्किंग फार्मूला तैयार कर रही है. माना जा रहा है कि बहुत जल्द यह फार्मूला सार्वजनिक किया जायेगा.

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सूत्रों के अनुसार सीबीएसई की कमेटी नंबर देने के 30:30:40 फॉर्मूले के पैमाने को तय करने के लिए काम कर रही है और इसे अंतिम रूप देने में जुटी है.

इस फॉर्मूले के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE)का 30:30:40 फार्मूला मार्कशीट तैयार करने में 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों को शामिल करने की योजना है.

इसके तहत दसवीं और ग्यारहवीं कक्षा के अंतिम परिणामों को 30% वेटेज दिया जायेगा, इसके अलावा 12वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षा में 40% वेटेज मिलेगा.

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सूत्रों के अनुसार 13 सदस्यीय कमेटी 17 जून को सुप्रीम कोर्ट में मार्किंग फार्मूले की घोषणा कर सकता है. पिछले महीने, अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें महामारी के कारण सीबीएसई कक्षा बारहवीं की परीक्षा रद्द करने की मांग की गयी थी.

सीबीएसई ने पहली जून को बारहवीं कक्षा की परीक्षा रद्द की थी, जिसके बाद महाराष्ट्र सहित कई राज्य बोर्डों ने अपनी परीक्षा रद्द कर दी.

इस बीच स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे बारहवीं कक्षा के आंतरिक मूल्यांकन अंक 28 जून तक सीबीएसई प्रणाली पर अपलोड कर दें.

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हालांकि कुछ स्कूलों की मांग है कि 12वीं कक्षा के टर्म टेस्ट, प्री-बोर्ड मार्क और इंटरनल असेसमेंट को अधिक वेटेज दिया जाये, जबकि कई स्कूलों की दलील है कि कक्षा 11 के अंकों को शामिल करना अनुचित होगा क्योंकि छात्र कक्षा XI को गंभीरता से नहीं लेते हैं. इस दौरान वो अपनी प्रतियोगी परीक्षओं की तैयारी करते हैं.

इनके अलावा सीबीएसई के सामने एक और बड़ी चुनौती यह है कि कोरोना के दौर में प्री बोर्ड की परीक्षाएं कहीं ऑनलाइन तो कई सरकारी स्कूलों में ऑफलाइन माध्यम से भी ली गयी है जिसमें कई बच्चों की परीक्षाएं छूट भी गयी थीं.

यही नहीं कई स्कूलों में कुछ पेपर बाकी भी रह गये थे, ऐसे में उन परीक्षाओं के अंकों का वेटेज कितना न्यायोचित होगा कह पाना मुश्किल है. ऐसा भी कहा जा रहा है कि कोरोना के बिगड़ते हालात के कारण कई स्कूलों में प्री बोर्ड की सभी रीक्षाएं भी आयोजित नहीं हो सकीं.

वहीं छात्रों का कहना है कि प्री बोर्ड परीक्षाएं बहुत से छात्रों ने अटेंड नहीं की हैं. ऐसे में यह भी सुझाव दिया गया है कि छात्रों को मार्क के बजाय इस साल ग्रेड दिया जाये.

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