न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

अगर हम चुप रहे तो कल पूरे देश से ही लोकतंत्र को हटा दिया जायेगा : कन्हैया कुमार

एक ओर तो पढ़-लिखकर अपना और देश का भविष्य बनाने के इच्छुक युवा हैं और दूसरी तरफ वे लोग हैं जो इन पढ़े-लिखे युवाओं से पकौड़े तलवाना चाहते हैं.

94

Begusarai :  2019 लोकसभा चुनाव में बिहार की बेगूसराय सीट पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को कड़ी टक्कर दे रहे जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाकपा उम्मीदवार कन्हैया कुमार ने कहा कि एक ओर तो पढ़-लिखकर अपना और देश का भविष्य बनाने के इच्छुक युवा हैं और दूसरी तरफ वे लोग हैं जो इन पढ़े-लिखे युवाओं से पकौड़े तलवाना चाहते हैं. इस मुकाबले को पढ़ाई और कड़ाही के बीच की लड़ाई करार दिया कन्हैया कुमार ने.

mi banner add

इस क्रम में एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा की किताब से लोकतंत्र का पाठ हटाये जाने के संदर्भ में कहा किअगर हम चुप रहे तो कल पूरे देश से ही लोकतंत्र को हटा दिया जायेगा.  चुनाव में जेएनयू प्रकरण और देशद्रोह को मुख्य मुद्दा बनाये जाने पर कन्हैया कुमार ने कहा कि अगर मैं देशद्रोही हूं, अपराधी हूं, दोषी हूं… तो सरकार मुझे जेल में क्यों नहीं डाल देती? अगर मैंने कुछ गलत किया है तब सरकार कार्रवाई करे.

अगर मैं देशद्रोही हूं तो चुनाव कैसे लड़ रहा हूं?’ कन्हैया कुमार ने कहा, मेरा चुनाव लड़ना ही इस बात का सबूत है कि देशद्रोह के आरोप बेबुनियाद हैं. जनता सब जानती है. लोग वास्तविक मुद्दों पर बात करना चाहते हैं लेकिन भाजपा मनगढ़ंत मुद्दों की आड़ में लोगों को बांट रही है क्योंकि उसके पास जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं है. पिछले पांच वर्ष में केंद्र सरकार ने कुछ भी ठोस नहीं किया

इसे भी पढ़ेंःओडिशाः वोटिंग से पहले पोलिंग पार्टी पर माओवादी हमला, चुनाव पर्यवेक्षक की हत्या

खुद को मिल रहे जनसमर्थन से उत्साहित हूं

भाकपा उम्मीदवार ने कहा कि साजिश करने वालों को देश की चिंता नहीं है बल्कि वे चाहते हैं कि देश में न कोई बोले, ना सवाल करे.  अपने चुनाव अभियान पर संतोष व्यक्त करते हुए कुमार ने कहा, मैं, खुद को मिल रहे जनसमर्थन से उत्साहित हूं और मुझे अपनी सफलता का पूरा भरोसा भी है. राजनीतिक लड़ाई में सच्चाई और ईमानदारी हो तो जनता का सहयोग अपने आप मिलता है. यह पूछे जाने पर कि अगर पूरा विपक्ष मिलकर उन्हें अपना उम्मीदवार बनाता तो सीधी टक्कर होती, कुमार ने कहा, भाजपा विरोधी मतों का विभाजन नहीं होगा… मुकाबला सीधा ही है.

राजनीति में आने से जुड़े सवाल पर कन्हैया कुमार ने कहा, मैंने कुछ तय नहीं किया. संयोग और परिस्थितियां ही सब कुछ तय करती हैं. बेगूसराय में जन्म लेने के बाद मैंने सोचा नहीं था कि कभी दिल्ली जाऊंगा. दिल्ली पहुंच कर यह तय नहीं किया था कि जेएनयू जाऊंगा और छात्र संघ का अध्यक्ष बनूंगा. फिर मैं जेल भी गया. बेगूसराय से भाकपा उम्मीदवार बनना भी तय नहीं था. चुनावी चंदे के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि जनता की लड़ाई जनता के पैसे से हो.

मेरा पूरा अभियान जनता के सहयोग से ही चल रहा है. वैसे भी, यह लड़ाई तो पढ़ाई और कड़ाही के बीच है- एक तरफ पढ़-लिखकर अपना और देश का भविष्य बनाने के इच्छुक युवा हैं तो दूसरी तरफ वे लोग हैं जो इन पढ़े-लिखे युवाओं से पकौड़े तलवाना चाहते हैं.

इसे भी पढ़ेंः ‘सारे मोदी चोर हैं’ बयान पर बढ़ी राहुल की मुश्किल, सुशील मोदी ने किया मानहानि का केस

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने एक बार जीत दर्ज की है

बता दें कि कभी कांग्रेस का गढ़ रही बेगूसराय सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार भाजपा के भोला सिंह ने राजद के तनवीर हसन को 58,335 मत से हराया था. भाकपा के राजेंद्र प्रसाद सिंह 1,92,639 वोट पाकर तीसरे नंबर पर थे. उससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में जदयू के मोनाजिर हसन ने इस सीट पर भाकपा के कद्दावर नेता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह को पराजित कर कब्जा जमाया था.

वहीं 2004 में जदयू के राजीव रंजन सिंह ने कांग्रेस की कृष्णा शाही को हराया था. इस सीट पर कांग्रेस ने अब तक आठ बार जीत दर्ज की है जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने एक बार जीत दर्ज की है.   

इसे भी पढ़ेंः आईएएस अधिकारी मोहसिन को चुनाव आयोग ने किया सस्पेंड, पीएम मोदी के हेलीकॉप्टर की तलाशी ली थी

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: