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इहां हड़ताले हो जाएगा, तो कौन जुलूम हो जाएगा…

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Ranjan Jha
Dhanbad: बात पीएमसीएच की है. यहां मंगलवार से 400 से ज्यादा आउटसोर्सिंग कर्मी हड़ताल पर जानेवाले हैं. इनकी हड़ताल से क्या बिगड़ जाएगा ? इस सवाल का जवाब तलाशने सोमवार दोपहर 12 बजे वहां गया.

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हजारों की संख्या में परेशान लोग अस्पताल परिसर में किसी पेड़ के नीचे, ओपीडी के काउंटर के बाहर लगी कुर्सियों पर हताश बैठे मिले. अस्पताल में प्रवेश करने से पहले उसका प्रवेश द्वार ही कुछ चुगली करता है. बिना रंग रोगन का प्रवेश द्वार आसपास बिखरी गंदगी, टूटा गेट. अंदर ओपीडी ठीक सामने है. इसके प्रवेश द्वार के सामने बड़े-बड़े अक्षरों में ओपीडी लिखा है. हालांकि यह आधा मिट चुका है.

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प्रवेश द्वार के दोनों ओर लोगों ने पान-गुटखा थूक कर पता नहीं कैसी चित्रकारी करने की कोशिश की है. देखकर ही घिन आती है. अंदर जहां-तहां कूड़े का ढेर लगा दिखा. हालांकि सफाई चल रही है. अस्पताल में चाहे जिस भी रास्ता से प्रवेश करें. गंदगी हर तरफ आने-जाने वालों को परेशान करती है. कई वार्डों से अजीब सी बदबू आ रही है. वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था. इमरजेंसी के पासवाले मेल वार्ड की हालत खस्ता है. दरवाजे के पास ही एक लाइन से कचरे की पेटी सजा दी गयी है. प्रवेश करते ही बदबू थथूने से टकराती है.

पता नहीं कैसा इलाज हो रहा है

जमीन पर होता इलाज

लोदना से आए सुरेश तूरी शुक्रवार से भर्ती हैं. उनके पेट का इलाज चल रहा है. डाक्टर साहब ने कहा तो स्लाइन की बोतलें खरीदकर लाए. लगातार कई बोतल पानी चढ़ा. शनिवार को अल्ट्रा साउंड हुआ. का निकला?…नहीं बता सकते बाबू. नर्स कहती है कि रिपोर्ट कहीं गुम हो गया है. तब इलाज का हो रहा है? सुन रहे हैं कि मंगलवार से हड़ताल होनेवाली है. हड़ताले हो जाएगा तो कौन जुलूम हो जाएगा… सुरेश की पत्नी बिलखते हुए बोलती है.

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दौड़ -दौड़ के थक गये

डुमरी से आए अब्दुल रसीद दस दिन से दौड़ रहे हैं. उनकी बेगम को टीबी है. जांच के बाद रिपोर्ट लेनी है. उसके बाद दवा मिलेगी. रोज आज-कल कह कर उसे टाला जा रहा है. कहते हैं…यहां इलाज का होगा. रिपोटवे नहीं मिल रहा है.

धरने पर बैठे मेडिकल स्टाफ

इतनी अव्यवस्था हर तरफ है कि उसका बखान कठिन है. पर वैसे लोग जिनकी कुव्वत बड़े डॉक्टर या नर्सिंग होम में इलाज कराने की नहीं वह मजबूरी में यहां आते हैं… जो भी राहत मिल जाए. अंततः अस्पताल के मेन गेट से निकलते हैं…वहां नर्सें सीढ़ी पर बैठी हैं…धरना दे रही हैं…सवाल है कौन खुश है यहां की व्यवस्था से? नये भवन तेजी से बन रहे हैं. चारों तरफ ऊंची इमारतें खड़ी की जा रही है. भरोसा दिलाया गया है..इसे सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल बनाने का…

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