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सूबे के श्रमिक बाहर काम करने जा रहे तो करा लें श्रमाधान पोर्टल पर पंजीयन, मिलेंगे कई लाभ

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  • आपदा/दुर्घटना की स्थिति में श्रमिकों के आश्रितों को 1.5 लाख की मिलती है सरकार से मदद

Ranchi: कोरोना काल प्रवासी श्रमिकों के लिए त्रासदी से काम नही था. इस दौरान सूबे में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित राज्य वापसी के लिए हेमंत सरकार की ओर से संजीदगी से प्रयास किये गये थे. लेकिन एक बार फिर श्रमिकों को विचैलिये काम पर ले जाने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं.

हाल के दिनों में बिचैलियों द्वारा बिना नियमों का अनुपालन किये ही विभिन्न कंपनियों में काम करने के लिए मजदूरों को गुजरात एवं दक्षिण भारत के अन्य राज्यों ले जाने का प्रयास किया जा रहा है. ऐसे में श्रमिकों को सूबे से बाहर जाकर काम करने की स्थिति में श्रम कानून के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है.

अंतरराज्यीय प्रवासी अधिनियम के तहत पंजीकृत होने पर सरकार की ओर से श्रमिकों को कई तरह का लाभ भी मिलता है.

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क्या है अंतरराज्यीय प्रवासी अधिनियम

  • अपने मूल राज्य से बाहर के राज्यों में जाकर सुरक्षित रूप से कार्य के लिए जाने से पहले अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम 1979 की विभिन्न धाराओं के अनुपालन करने के उपंरात ही प्रवास की अनुमति दी जानी चाहिए.
  • दूसरे राज्यों में काम के लिय अगर श्रमिक स्वयं बाहर के राज्यों में जाना चाहता है तो उसे संबंधित पंचायत सचिव के द्वारा लाल कार्ड निर्गत कराकर पंजीयन के उपरांत ही प्रवास पर जाने का प्रावधान है.
  • यदि 5 या 5 से अधिक श्रमिक एक साथ काम के लिए जा रहे हैं तो ठेकेदार/नियोजकों को अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम 1979 के तहत जिले एवं प्रखंड से स्वीकृति लेनी होगी. यह श्रमाधान पोर्टल पर आवेदन करने पर प्राप्त किया जा सकता है. इसके बाद पंचायत सचिव के द्वारा पंजीयन कर लाल/हरा कार्ड निर्गत किया जाता है.

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क्या हैं लाभ दूसरे राज्यों में काम के लिए जाने से पूर्व पंजीयन के

  • प्राकृतिक आपदा/दुर्घटना की स्थिति में प्रवासी मजदूर की मृत्यु या स्थायी पूर्ण अशक्तता होने पर पजीकृत श्रमिकों या आश्रितों को 1.5 लाख भुगतान, वहीं गैर पंजीकृत श्रमिकों को एक लाख.
  • दुर्घटना में दो आंखों या दो अंगों की हानि पर पंजीकृत श्रमिकों को 1 लाख सरकार की ओर से सहायता दी जाती है. वहीं गैर पंजीकृतों को एक लाख का सहयोग दिया जाता है.
  • दुर्घटना में एक आंख या एक अंग की हानि पर पंजीकृत श्रमिकों को 75 हजार का सहयोग सरकार की ओर से दिया जाता है. वहीं गैर पंजीकृतों को 50 हजार का सहयोग मिलता है.
  • दुर्घटना/आपदा में मजदूर की मृत्यु होने या पूर्ण अशक्तता होने पर दूसरे राज्यों से पैतृक आवास तक पहुंचाने का संपूर्ण व्यय सरकार देती है.

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