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किसानों और सरकार की बातचीत बेनतीजा रही तो संघ संभालेगा मोर्चा! जानिए, कैसे होगा मोदी का बचाव

Uday Chandra

New Delhi : कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनकारी किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. आंदोलनकारियों के इस रुख को देखते हुए अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोदी सरकार के लिए मोर्चा संभालने की तैयारी में है. इसके तहत कोरोना टीकाकरण अभियान की कामयाबी का ट्रंप कार्ड चला कर पीएम मोदी की छवि को निखारा जायेगा.

दरअसल जिस तरह किसान संगठन और विपक्ष कृषि कानूनों को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, उसे देखते हुए संघ पीएम मोदी के लिए रक्षा कवच के रूप में आने को तैयार है. हाल ही में संघ के सुप्रीमो मोहन भागवत की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस मसले पर विस्तार से चर्चा हुई है.

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किसान संगठनों और सरकार के बीच 20 जनवरी की बैठक में कोई खास नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं की जा रही है. ऐसे में संघ पीएम मोदी की छवि बनाने के लिए मैदान में उतरेगा और विपक्ष के प्रहार को कमजोर करने की कोशिश करेगा. दरअसल, सरकार यह मान कर चल रही है कि किसान आंदोलन के पीछे कांग्रेस और वामपंथी संगठनों का हाथ है. इन राजनीतिक दलों की चाल को भांप कर संघ कोरोना वायरस को ढाल बना कर हवा का रुख मोड़ने की कोशिश करेगा. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना टीकाकरण को लेकर जिस तरह मोदी सरकार ने देश भर में रणनीति बनायी है, उससे लोगों का ध्यान उस तरफ आकृष्ट हुआ है. संघ और भाजपा की कोशिश है कि इसी बहाने पीएम मोदी की छवि को फिर से चमकाया जाये.

संघ नेता मान कर चल रहे हैं कि किसान आंदोलन के लंबा खिंचने के कारण आम लोगों में इस आंदोलन को लेकर रुचि और सहानुभूति दोनों कम होती जायेगी. लोगों को भी लगने लगा है कि किसान अड़ियल रवैया अपना रहे हैं.

संघ की योजना है कि उनके स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों से सपंर्क करेंगे और उन्हें टीकाकरण अभियान के बारे में जागरूक करेंगे और मोदी सरकार की उपलब्धियों को बतायेंगे. इस दौरान नये कृषि कानूनों के फायदे भी लोगों को बता कर, किसान आंदोलन को गलत ठहराने का अभियान भी चलेगा.

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