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यही लहर कायम रही तो हार सकते हैं पीएन सिंह सहित अधिकतर दिग्गज!

धनबाद में शायद ही भाजपा का कोई विधायक बच पायेगा

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Ranjan jha

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Dhanbad: मध्यप्रदेश में भाजपा के वोट में 5% की कमी, राजस्थान में 7% की कमी, छत्तीसगढ़ में 9% की कमी और तेलंगाना में 15% की कमी को अगर भाजपा के खिलाफ वोट का रुझान माना जाये तो 2019 में भाजपा की झारखंड में चुनावी नैया पार करना काफी कठिन है. ध्यान देने की बात है कि अभी जिन राज्यों में चुनाव हुए वहां वोटिंग प्रतिशत भी काफी ज्यादा है. यह जाहिर करता है कि लोगों ने बूथ तक जाकर भाजपा के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया. मध्यप्रदेश में 66%, राजस्थान में 72%, छत्तीसगढ़ में 76% और तेलंगाना में 67% वोटिंग हुई. तेलंगाना और मिजोरम को छोड़ अन्य राज्यों में कांग्रेस का वोटिंग प्रतिशत बढ़ा. छत्तीसगढ़ में सिर्फ एक प्रतिशत मत अधिक लाकर कांग्रेस ने रमन सिंह की नेतृत्ववाली भाजपा सरकार को पटखनी दे दी. वोटिंग प्रतिशत अधिक होना मतदाताओं के गुस्से का इजहार है. हालांकि छत्तीसगढ़ की रमन सिंह के नेतृत्ववाली भाजपा सरकार से लोगों को दूसरी भाजपा सरकारों की तुलना में गुस्सा कम था. यह भी कह सकते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ गुस्से का राज्य की भाजपा सरकारें शिकार हो गयीं.

भाजपा के स्थानीय नेता कहते हैं कि हमने विकास किया फिर भी पराजय आश्चर्यजनक है. मगर, कांग्रेस ने भी तो वही किया. भाजपा के लिए वोट मांगते हुए नरेंद्र दामोदर मोदी कांग्रेस के अवगुण गिनाते थे. लोगों ने सोचा था कि इन अवगुणों से भाजपा मुक्त होगी. लोगों को भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से मुक्ति मिलेगी. कार्य संस्कृति बदलेगी. अच्छी कार्य संस्कृति बनेगी. पर हुआ क्या? कोयलांचल में रंगदारी, कोयलाचोरी और सरकारी कामकाज में बेईमानी कमने के बजाय बढ़ी.

अब धनबाद में क्या होगा?

वोटिंग प्रतिशत के साथ कांग्रेस के वोट प्रतिशत में अगर तीन से चार प्रतिशत की भी वृद्धि हुई तो धनबाद में पासा पलटते देर नहीं लगेगी. बीते चुनाव में भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी पशुपतिनाथ सिंह को कुल मतदान का 47% मत मिला था तो पूरे झारखंड में रिकार्ड मतों से जीते. इनको जितने वोट मिले उतने सभी प्रत्याशियों को मिला कर भी नहीं मिले. पशुपतिनाथ सिंह को वोटों के बिखराव का भी फायदा मिला. कांग्रेस के अजय कुमार दुबे के साथ समरेश सिंह, एमसीसी के आनंद महतो, तृणमूल कांग्रेस से प्रत्याशी चंद्रशेखर दुबे आदि को भाजपा विरोधी मत मिले. भाजपा के खिलाफ 52% लोगों ने वोट दिया. याद हो कि पशुपतिनाथ सिंह से नाराज लोगों ने भी केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए भाजपा को वोट दिया. पशुपतिनाथ सिंह को 5,43,497 मत मिले और विरोध में 5,24,434 मत मिले. अब अगर विपक्ष का वोट एकजुट हो, पोलिंग प्रतिशत अगर वर्तमान चुनाव की तरह हो, भाजपा के मतों में वर्तमान औसत की तरह सात प्रतिशत की गिरावट हो और कांग्रेस या संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी को तीन से पांच प्रतिशत मत का फायदा हो तो भाजपा की लोकसभा चुनाव में हार साफ दिख रही है. उस चुनाव में नरेंद्र मोदी की सरकार बनाने के नाम पर जो वोट मिला था और फ्लोटिंग वोट मिला था वह इस चुनाव में नकारात्मक ट्रेंड की ओर है. पशुपतिनाथ सिंह की हार का मतलब है झारखंड में लोकसभा की अधिकतर सीट को गंवाना. इसलिए कि पीएन सिंह ने झारखंड में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी.

विधायकों का हारना तो तय ही होगा

भाजपा के खिलाफ बढ़ते नकारात्मक ट्रेंड को देखते हुए धनबाद से भाजपा विधायक राज सिन्हा, झरिया से संजीव सिंह, सिंदरी से फूलचंद मंडल, बाघमारा से ढुल्लू महतो की की हालत खराब ही दिख रही है. हालांकि, हवा का रुख और लोगों का मिजाज बदलते देर नहीं लगती. खैर, जो भी हो, भाजपा के लिए आगे का चुनाव कठिन है. ध्यान देने की बात है कि भाजपा झारखंड में सरकार बनाने के बाद सभी उपचुनाव में हारती ही रही है. कुल मिला कर कहें तो लक्षण अच्छे नहीं हैं.

इसे भी पढ़ें – तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें

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