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वेश्या कहा तो खुदकुशी कर ली, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सोच समझ कर बोलें, शब्द तलवार बन जाते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि शब्दों का चयन सोच-समझकर और सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए

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NewDelhi :  सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि शब्दों का चयन सोच-समझकर और सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए. नहीं तो शब्द तलवार बन जाते हैं, जो  हमारे आस-पास के लोगों की जिंदगी बर्बाद कर सकते हैं. एक महिला को एक युवती की आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की और ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए महिला को सजा काटने का आदेश दिया. बता दें कि 1998 में एक युवती ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

युवती ने अपनी मौत से पहले पुलिस को दिये गये बयान में कहा था कि एक महिला ने उसके खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे वेश्या कहा था. इससे आहत होकर युवती ने आत्मदाह कर जान दे दी.

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सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट की सजा को बरकरार रखा

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी महिला को धारा 306 के तहत दोषी पाया और उसे तीन साल की सजा सुनाई.  हाईकोर्ट में चुनौती दिये जाने पर हाईकोर्ट ने भी  फैसला बरकरार रखा, लेकिन कैद की सजा तीन से घटाकर एक साल कर दी.  इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में आया. यहां जस्टिस आर भानूमति और जस्टिस विनीत सरन ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और कहा, पीड़िता द्वारा मौत से पहले दिये गये बयान को पढ़ने से पता चलता है कि उसे  वेश्या कहा गया था.

युवती मात्र 26 साल की अविवाहित लड़की थी, और ऐसा हो सकता है कि इस तरह की बदजुबानी सुनकर दुखी हो गयीं हो, इसके बाद उसने आत्मदाह कर खुदकुशी करने की सोची. अदालत ने आरोपी को कहा कि वह चार सप्ताह के अंदर कोर्ट में सरेंडर करें.

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