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आदिवासी संगठनों का एलान, कुर्मी को एसटी दर्जा देने का प्रस्ताव केंद्र भेजा तो होगा जोरदार आंदोलन

विभिन्न आदिवासी संगठनों ने की प्रेस वार्ता, कहा- 2008 की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुरमी जाति में जनजातीय विशेषता नहीं

Ranchi : राज्य सरकार की ओर से कुरमी जाति को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने की अनुशंसा अगर केंद्र को भेजी जाती है तो यह आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करनेवाली बात होगी. इसका पूरे राज्य में विरोध किया जायेगा.

ये बातें विभिन्न आदिवासी संगठनों की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में प्रेमचंद मुर्मू में कहीं. उन्होंने बताया कि विभिन्न संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव के संबध में बैठक की गयी. जिसमें सभी संगठनों ने प्रस्ताव का विरोध करने की हामी दी.

संगठनों की ओर से राज्य सरकार से ये मांग की गयी कि कुरमी समाज के कुछ मौकापरस्त लोगों की मांग को निरस्त किया जाये. अन्यथा आदिवासी समाज आंदोलन करने को विवश होगा.

सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों ने यह निर्णय लिया है कि राज्य के सभी विधायकों समेत राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप कर अपनी असहमति जतायेंगे.

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रिपोर्ट में बताया गया था – विशेषताओं का अभाव है

वक्ताओं ने इस दौरान कहा कि 2004 में पहली बार राज्य सरकार ने यह मांग की थी. जिसके बाद केंद्र सरकार ने जनजाति कल्याण शोध संस्थान से जांच रिपोर्ट मांगी. संस्थान की ओर से 2008 में जांच रिपोर्ट सौंपी गयी.

जिसमें स्पष्ट लिखा है कि राज्य की कुरमी जाति में आदिम जनजातियों की विशेषताओं का अभाव है. वक्ताओं ने कहा कि ऐसे में कुरमी जाति को न तो अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में और न अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा जा सकता है.

इसे यथास्थिति बनाये रखने की आवश्यकता है. इस प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के अजय तिर्की, आदिवासी सेना के राहुल उरांव, आदिवासी छात्र मोर्चा के आकाश तिर्की और विनोद कच्छप, केंद्रीय आदिवासी विकास मोर्चा के एल्विन लकड़ा, विकास तिर्की समेत अन्य संगठनों के लोग शामिल थे.

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