न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बात निकली है तो दूर तलक जायेगी…

सुमित्रा महाजन के बयान ने पार्टी और सरकार को असमंजस में डाला

299

Kumar Saurav

Ranchi: लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने लोकमंथन कार्यक्रम के समापन सत्र में आरक्षण पर जो सवाल उठाये हैं, वह निःसंदेह बहस के मुद्दे हैं. भारत के संविधान निर्माताओं ने समाज से शोषित-वंचित तबके को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था की थी. समय-समय पर राजनीतिक पार्टियों ने अपने लाभ के लिए उसका इस्तेमाल भर किया. यूं तो सुमित्रा महाजन के बयान में कुछ नया नहीं है, इस तरह के बयान कई दफा विभिन्न मंचों से उठाये गये हैं, पर चुनावी समय में आरक्षण जैसे मद्दे पर सुमित्रा महाजन के बयान से झारखंड में पार्टी औऱ सरकार दोनों असहज हैं. अंदरखाने की खबर है कि पार्टी औऱ सरकार उनके इस बयान से काफी परेशानी में है. उसे यह समझ में नहीं आ रहा है कि इस मुद्दे को पैचअप कैसे किया जाये. वहीं इस बयान से विपक्ष के हाथ में नया मोहरा लग गया है. सुमित्रा महाजन के बयान के बाद से सरकार की क्राइसिस मैनेजमेंट टीम सक्रिय हो गयी है.

इसे भी पढ़ें- सुमित्रा महाजन ने पूछा, आरक्षण जारी रखने से क्या देश में समृद्धि आयेगी?

न निगलते बन रहा, न उगलते..

आरक्षण पर बयान से बौखलाहट क्यों. यह सवाल मौजूं है. चुनावी साल में आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है, जिससे भाजपा दूर ही रहना चाहती थी. इस बयान से पिछड़ों, दलितों, महादिलतों और आदवासियों को साधने की जो रणनीति भाजपा नेतृत्व की है उसे काफी धक्का लगा है. पार्टी झारखंड के चुनावी समर में इस सोशल इंजीनियरिंग को साथ रख कर चलना चाह रही थी. अब परेशानी यह है कि आरक्षणवाले बयान से पार्टी किनारा करती है तो भाजपा से जुड़ा एक बड़ा वर्ग नाराज हो सकता है और यदि इस बयान पर कायम रहती है तो एससी-एसटी समुदाय में उसे धक्का लग सकता है. सरकार के लिए सांप छछुंदर वाली स्थित हो गयी है, न उगलते बन रहा है औऱ न ही निगलते.

सरकार में पैठ रखनेवालों का कहना है कि इस वक्त इस तरह के बयानों की कोई अवश्यकता नहीं थी. इससे अनावश्यक विवाद खड़ा होता है औऱ विपक्ष को हमलावर होने का एक मौका मिल जाता है. खैर मामला कुछ भी हो. अब जबकि तीर कमान से निकल चुका है, तो यह कहीं न कहीं जाकर लगेगा भी. देखना है कि तीर सही निशाने पर लगता है या फिर चूक जाता है.

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

hosp22
You might also like
%d bloggers like this: