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सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर नहीं होता, तो नरेंद्र मोदी की हत्या कर दी जाती : आईपीएस डीजी वंजारा 

गुजरात एटीएस सोहराबुद्दीन को नहीं मारती तो वह तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या कर सकता था. कहा कि आज यह साबित हो गया कि मैं और मेरी टीम सही थी.

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 Ahmedabad : सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति एनकाउंटर मामले में सभी आरोपियों को बरी किये जाने के कोर्ट के फैसले पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और गुजरात पुलिस के तत्कालीन डीजी, डीजी वंजारा ने  दावा किया कि अगर गुजरात एटीएस सोहराबुद्दीन को नहीं मारती तो वह तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या कर सकता था. कहा कि आज यह साबित हो गया कि मैं और मेरी टीम सही थी. हम सच के साथ खड़े थे. इस एनकाउंटर केस में पूर्व आरोपी रहे वंजारा ने कहा, यदि गुजरात पुलिस यह मुठभेड़ न होती तो पाकिस्तान नरेंद्र मोदी की हत्या करने की साजिश में कामयाब हो जाता और गुजरात एक और कश्मीर बन जाता. बता दें कि शुक्रवार को मुंबई की सीबीआई कोर्ट द्वारा सभी 22 आरोपियों के बरी कर दिया. वर्ष 2005 के इस मामले में ये 22 लोग मुकदमे का सामना कर रहे थे. इनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं. वंजारा ने कहा, गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान पुलिस को गुजरात की भाजपा सरकार और केंद्र की कांग्रेस सरकार की राजनीतिक लड़ाई के बीच में बलि का बकरा बनाया गया था.

राष्ट्रविरोधी तत्वों ने आतंकवादी समूहों की सहायता के लिए वास्तविक मुठभेड़ की घटनाओं को नकली बताया

उन्होंने कहा कि सीबीआई कोर्ट ने अपने फैसले में सभी 22 आरोपी पुलिस अधिकारियों को बरी किया जाना उस बात की पुष्टि करता है जो मैं काफी पहले से कहता आ रहा हूं कि इनमें से कोई भी एनकाउंटर राज्य द्वारा निर्धारित नहीं था.  एनकाउंर पाकिस्तान प्रायोजित उन आतंकियों के खात्मे के लिए किये गये थे जिनका उद्देश्य गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना था. बता दें कि वंजारा को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने तीन साल पहले बरी कर दिया था. उन्होंने कहा कि राष्ट्रविरोधी तत्वों ने आतंकवादी समूहों की सहायता और ईमानदार पुलिस अधिकारियों को परेशान करने के लिए वास्तविक मुठभेड़ की घटनाओं को नकली में बदलने की कोशिश की थी. सीबीआई का कहना है कि जांच एजेंसी को सोहराबुद्दीन-कौसर बी मुठभेड़ मामले में अभी आदेश की प्रति नहीं मिली है. जांच एजेंसी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को मामले में आगे की कार्रवाई से जुड़े सवाल पर यह प्रतिक्रिया दी.  प्रवक्ता ने, सीबीआई की सामान्य तौर पर की जाने वाली प्रतिक्रिया कि वह मामले में अपील दायर करने पर फैसला लेने से पहले आदेश का अध्ययन करेगी, को लेकर भी प्रतिबद्धता जाहिर करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उनका बयान सिर्फ इस वाक्य तक सीमित है, सीबीआई को आदेश मिलना अभी बाकी है.   एजेंसी 13 साल पुराने फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 आरोपियों को बरी करने के विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने को लेकर कोई प्रतिबद्धता जताती नहीं दिखी.

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