ChaibasaJharkhand

सारंडा के गांवों में घुसेंगे गजराज तो बजेगा हूटर, इंफ्रा रेड किरणें रोकेंगी और कैमरा करेगा रिकॉर्डिंग

सारंडा वन प्रमंडल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहली बार हो रहा एनिमल इंट्रूजन डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम का इस्तेमाल

Chaibasa :  झारखंड में इंसानों और हाथियों का टकराव आम समस्या है. कभी भोजन की तलाश में, तो कभी भटक कर हाथियों का झुंड गांवों में दाखिल होता है और इंसानी जान के साथ घरों और खेत-खलिहानों को भी नुकसान पहुंचाता है. नतीजन टकराव की नौबत आती है. लेकिन अब एक ऐसी मशीन आ गयी है, जो इस द्वंद्व को रोकने में काफी मददगार सिद्ध होगी.  एनिडर्स यानी एनिमल इंट्रूजन डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम नाम की मशीन जानवरों व मनुष्यों में फर्क कर सकती है. सोलर पावर से चलनेवाली इस मशीन के रेंज में जानवरों के आते ही यह खुद ब खुद एक्टिव हो जाती है.  जानवरों के खेतों और रिहायशी इलाकों के निकट आते ही इसका सेंसर अलार्म चालू हो जाता है. इससे ग्रामीण अलर्ट हो जाते हैं. साथ ही मशीन से इंफ्रारेड किरणें निकलने लगती हैं. हाथी इन किरणों के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और खतरा भांप कर उलटी दिशा की ओर भाग निकलते हैं. मशीन में लगा जीएसएम नेटवर्क तुरंत वन विभाग को भी सूचना दे देता है. यही नहीं,  एनिडर्स में कैमरा भी है, जो हाथियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर लेता है. इससे वन विभाग को हाथियों के झुंड की पहचान और उनकी गणना में मदद मिलेगी.  वर्ल्ड वाइड फंड फ़ॉर नेचर इन इंडिया के एक रिसर्च में पाया गया है कि एनिडर्स मशीन की सफलता की दर 86 प्रतिशत है.  यही नहीं, जिन इलाकों में इसे लगाया गया है, वहां किसानों की उपज में 60 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी देखी गयी है.

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल सारंडा वन प्रमंडल में किया जा रहा है. पहले फेज में गुवा वन प्रक्षेत्र के नुइया गांव में 6 पैसिव एनिडर्स और ससंगदा वन प्रक्षेत्र में 2 एक्टिव एनिडर्स लगाये गये हैं. कुल मिलाकर 18 गांवों में इन्हें लगाने की योजना है. प्रत्येक गांव में 6 एक्टिव इंफ्रारेड सेंसर और 6 पैसिव इंफ्रारेड सेंसर लगाये जाने हैं. 18 गांवों में लगने वाले एनिडर्स पर लगभग 47 लाख रुपये खर्च होंगे. सारंडा वन प्रमंडल के डीएफओ चंद्रमौली प्रसाद सिन्हा ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान के तहत शुरू किया जा रहा है. इसपर आनेवाले खर्च का वहन  टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट्स लिमिटेड कर रहा है.  प्रोजेक्ट को पीसीसीएफ सह चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की मंजूरी मिल गयी है. इन एनिडर्स को लगाने और अगले 7 वर्षों तक इसके रख-रखाव का जिम्मा गाजियाबाद की क्यारी नामक कंपनी  को दिया गया है. पहले चरण में हाथियों से सर्वाधिक प्रभावित 18 गांव में एनिडर्स लगाये जायेंगे. बेहतर नतीजे आने पर  इन्हें और जगहों पर भी लगाया जायेगा. उन्होंने बताया कि वन विभाग इस एनिमल इंट्रूजन डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम के इस्तेमाल के लिए काफी दिनों से कोशिश कर रहा था.

advt

इसे भी पढ़ें – घर में घुसकर युवती से छेड़खानी करने वाले को पकड़कर पुलिस को सौंपा

 

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: