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Motivational: सपने हमारे हैं तो मेहनत भी स्वयं ही करनी है, किन्तु सुखद आनंद का अनुभव भी करें

DR Prashant Tiwary
ऐसा कहते हैं क‍ि कामयाब लोग अपने फैसलों से दुनिया को बदल देते हैं और उसी सफलता को आप सपना कह सकते हैं. यानि उचित निर्णय लें और निर्भीक होकर आगे बढ़ें. सपना हर कोई देखता है और उसे साकार करना चाहता है. अपने सपनों को साकार करने का सबसे अच्छा मौका आज और अभी है. यदि आप प्रयास करें और सही योजना बनाएं तो आप अपने सपनों को साकार कर सकते हैं. सकारात्मकता का होना सभ्य समाज के मजबूत होने का बेहतर अवसर माना जा सकता है. ऐसा विचार किया जा सकता है क‍ि यदि हमारे सपने जीवंत हैं तो कुछ भी प्राप्त करना असंभव नहीं है. और कुछ अच्छा किया जा सकता है का स्पष्ट अर्थ यह है कि मानवीय आकांक्षाओं की समग्र पूर्ति का सफल प्रयास. आख़िर यह प्राप्त कैसे किया जाये, यह प्रश्न स्वयं में एक चुनौती है. कड़ी मेहनत और शिक्षा यक्ष उत्तर और उचित समाधान है. यह याद रखा जाये यदि सपने हमारे हैं तो मेहनत भी स्वयं ही करनी है. सपने यदि पूर्ण न हो तो इसके लिए दूसरों पर दोष मढ़ना कदाचित उचित नहीं. अगर आप सपनों को वास्तविक बनाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए वास्तविक जीवन में भी कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी जो सफलता की सही कुंजी होगी. सकारात्मक रहें. दूसरों की नकारात्मक बातों को सुनकर खुद को नीचा न समझे. खुद पर भरोसा करें. दूसरों के प्रति अपना अच्छा रवैया रखें और याद रखें कि केवल खुद के लिए सीमा निर्धारित करें.
आदिकाल से अनंत तक देखा जाये तो असंभव जैसा कुछ भी नहीं. आखिर हमारे सपने पूरे होंगे कैसे ? इसके लिए हमें जीवन में कुछ मूल मंत्रों का निर्धारण करना ही पड़ेगा. जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव को पार करने के लिए हम यहां अनुभव आधारित, जानकारी के आधार पर कुछ सार्थक बिंदुओं पर पहल कर सकते हैं. जैसे जीवन के मूल्य उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निर्धारित योजनायें बनाये. अपने सपने को विशिष्ट रूप से निर्धारित कर लें. अगर आप यह नहीं जानते कि आप का सपना अर्थात उद्देश्य क्या है, आप क्या चाहते हैं तो आप उसे प्राप्त नहीं कर सकते हैं, क्या आप उसे प्राप्त कर सकते हैं? अगर आप सौ प्रतिशत नहीं जानते हैं कि आप क्या चाहते हैं फिर भी आप इस मार्ग पर चल सकते हैं. बस आपको यह अंदाज़ा लगाना है कि क्या होना चाहिए और ऐसा करने से जब आप अपने सपने की तरफ बढ़ते जाएंगे तो वह निश्चित होते नज़र आएंगे.
मेरी नज़र में एक और उपाय हो सकता है जैसे क‍ि अपने सपने को प्रबल इच्छा में परिवर्तित करें. आपको बस यह करना है कि अपने सपने को आपके मन में बसे प्रबल इच्छा में परिवर्तित करें. बस एक बार यह साधारण सी इच्छा प्रबल इच्छा बन जाए तो इसे आप बस एक सपना नहीं कह सकते है क्योंकि सपने हमेशा काल्पनिक होते है और उनका कोई अस्तित्व नहीं होता है. इसलिए आपको यह विचार करना चाहिए कि आपकी इच्छा आपके सपने से बढ़कर है. अपनी प्रबल इच्छा को अपने लक्ष्य में परिवर्तित करें. एक बार आपने अपने प्रबल इच्छा को अपने लक्ष्य में परिवर्तित कर लिया है, तो फिर आप उसे प्रबल इच्छा या सपना नहीं कह सकते. वह आपके जीवन का लक्ष्य बन गया है, जो आपको ही हासिल करना है.
बड़े लक्ष्य निर्धारित करें, पर अपनी तैयारी के आधार पर करें केवल ख्यालों में सपने निर्धारित न करें. अपने मुख्य लक्ष्य को छोटे-छोटे लक्ष्य में विभाजित करें. और फिर हर लक्ष्य को प्राप्त करने की अवधि निश्चित करें. इसका उद्देश्य धीरे-धीरे आगे बढ़ना है. आप जीवन में कुछ भी करें किन्तु खुद की प्रगति का नियमित निरीक्षण करें. जैसे-जैसे आप अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ते जाएंगे, इस बात का अनुभव करना महत्वपूर्ण है कि सही में आप क्या प्राप्त करना चाहते हैं. जैसे कहा जाता है कि एक दिन में इमारत खड़ी नहीं होती है, इसी प्रकार अगर आप चाहें भी तो एक ही दिन में आप प्रगति के शिखर तक नहीं पहुंच सकते, आप यह ध्यान में रखें क‍ि आप आगे बढ़ रहे हैं.
जीवन को कठोर नहीं समझे
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जीवन को कठोर न समझे और ऐसा न सोचें की सपनों को साकार करके ही आप खुशी पा सकते हैं। बल्कि अगर आपने अपने सपनों को प्राप्त कर लिया तो फिर आप सुखद आनंद का अनुभव कर सकते हैं, फिर अपने वास्तविक स्थिति में वापस आ जाइए और नए सपनों की तलाश करें. समस्या और समाधान दोनों जीवन के अभिन्न हिस्सा है. बस इस बात का ध्यान रहे कि जीवन की आपाधापी में हमारे जीवन से कहीं आनंद न ओझल हो जाये. आनंदित जीवन आत्मा से परमात्मा के मिलान का अलोकिक माध्यम हो सकता है. अतः कहा जा सकता है क‍ि अपने सपनों को साकार करने के सफर का आनन्द लें. तनाव न लें. बस परमात्मा ने जो दिया है उसे नीति और नियति का निर्धारण समझ, प्रसाद जैसे स्वीकार्य कर आगे बढ़ें. अंततः यही तो जीवन है.

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