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कच्चे तेल की कीमत बढ़ी, तो देश की अर्थव्यवस्था को लगेगा झटका : आरबीआई   

रिजर्व बैंक ने कच्चे तेल की कीमतों से कैड, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे पर प्रभाव शीर्षक से अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी राय दर्ज है.

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NewDelhi : आरबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से देश की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकती है. बता दें कि रिजर्व बैंक ने कच्चे तेल की कीमतों से कैड, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे पर प्रभाव शीर्षक से अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी राय दर्ज है. इस रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आने से देश की वृहद आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है. आरबीआई के अनुसार दि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ सकता है;  साथ ही, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे के आंकड़े प्रभावित हो सकते है.

अनुमान लगाया कि इससे ऊंची वृद्धि के लाभ से हाथ धोना पड़ सकता है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है. भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है.  ऐसे में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका लगने की संभावना है.

2018 के मध्य से कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आयी

बता दें कि अप्रैल से सितंबर, 2018 के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 12 फीसद की वृद्धि हुई थी.  साल के मध्य में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह मांग बढ़ना रहा.  वैश्विक वृद्धि दर में सुधार, भू-राजनीतिक जोखिमों और आपूर्ति पक्ष की दिक्कतों की वजह से भी कच्चे तेल के दाम में तेजी आने की बात कही गयी.  हालांकि, नवंबर, 2018 के मध्य से कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आयी, लेकिन वर्तमान में कीमत में उतार-चढ़ाव बना हुआ है.  आरबीआई के अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से कैड की स्थिति प्रभावित होती है और इसे सिर्फ ऊंची वृद्धि दर से अंकुश में नहीं रखा जा सकता.

ऐसे में कच्चे तेल के झटके से कैड से जीडीपी का अनुपात बढ़ता है; अध्ययन के तहत निष्कर्ष निकाला गया है कि सबसे खराब स्थिति में, जबकच्चा तेल 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचता है, कच्चे तेल की वजह से घाटा 106.4 अरब डॉलर पर पहुंच सकता है, जो जीडीपी के 3.61 प्रतिशत के बराबर होगा.

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