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दिवाली में 10 बजे रात के बाद पटाखा जलाया तो एक लाख रुपये का लगेगा जुर्माना

क्रिसमस और न्यू ईयर में सिर्फ 35 मिनट ही जला सकते हैं पटाखे, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी किया आदेश

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Ravi Aditya

Ranchi: दिवाली में रात 10 बजे के बाद अगर पटाखा जलाया गया तो एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा. यह जुर्माना इंवायमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत लगाया जायेगा. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसका आदेश सोमवार को जारी कर दिया. वहीं क्रिसमस और न्यू ईयर में सिर्फ 35 मिनट की पटाखे जलाने की इजाजत दी गई है. क्रिसमस और न्यू ईयर में रात के 11:55 बजे से 12:30 बजे रात तक ही पटाखे फोड़ सकते हैं. जबकि दिवाली में रात के आठ बजे से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़ने की इजाजत ही गई है.

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सभी थाना प्रभारियों को सौंपी गई है जिम्मेवारी

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेट्री राजीव लोचन बक्शी ने बताया कि 10 बजे रात के बाद पटाखे फोड़ने वालों पर नजर रखने की जिम्मेवारी सभी थाना प्रभारियों को दी गई है. वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि लिथियम, अर्सेनिक, एंटीमनी, लीड और मरक्यूरी वाले पटाखे बेचे गये तो उस दुकान का लाइसेंस जब्त कर लिया जायेगा. साथ ही ऑनलाइन पटाखे खरीदने वालों पर भी नजर रखी जायेगी.

कहीं दिल्ली न बन जाये झारखंड

झारखंड कहीं दिल्ली न बन जाये. झारखंड के विभिन्न शहरों में बेंजिन, सल्फर डाईऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है. सबसे भयावह स्थिति कोयलांचल की है. कोयलांचल में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा 2000 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक हो गई है. पार्टिकुलेट मैटर (धूलकण सहित अन्य धातू) की मात्रा खतरे के निशान से 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर अधिक है. ओजोन की मात्रा 6.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर आंकी गई है. अगर ओजोन की मात्रा में वृद्धि हुई तो ऑक्सीजन में कमी हो जायेगी.

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कोयलांचल में अमोनिया की मात्रा बढ़ी

कोयलांचल में अमोनिया की मात्रा 276 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाई गई है. झारिया में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा 2730 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाई गई है. नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 70 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर पाई गई है. जबकि इसका मानक 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है. कोयलांचल में पर्टिकुलेट मैटर (धूलकण सहित अन्य धातू) की मात्रा 110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है. जबकि इसका मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है.

चार जिलों की स्थिति गंभीर

बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, चार जिले धनबाद, रामगढ़, चाईबासा और सरायकेला-खरसांवा की स्थित काफी गंभीर है. इसका प्रमुख कारण अवैध तरीके से चल रहे क्रशर और खनन को बताया गया है. इन जिलों में प्रदूषण का इंडेक्स 70 डेसीबल पार कर चुका है. इस वजह से स्थिति गंभीर हो गई है. धनबाद का इंडेक्स 78.63 तक पहुंच गया है. झारखंड के शेष जिलों का इंडेक्स 60 से कम है. 70 डेसीबल तक इंडेक्स जाने की स्थिति को गंभीर माना जाता है.

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ऐसे बढ़ रहा है झारखंड में प्रदूषण

कार्बन डाईऑक्साइड: 40 से 50 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (मानक 80माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर)
सल्फर डाईऑक्साइड: 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (मानक: 80माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर)
कार्बन मोनोऑक्साइड: 1000 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (मानक: 2000माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर)
पार्टिकुलेट मैटर(धूलकण सहित अन्य धातू): 80-110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (मानक: 100माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर).

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