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झारखंड में अगर फिर बढ़े कोरोना मरीज तो वेंटिलेटर रहते नहीं हो सकेगा इस्तेमाल

  •  धूल फांक रहे वेंटिलेटर्स, कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं टेक्नीशियन नहीं

Ranchi: झारखंड में कोरोना के दौरान अधिकतर जिलों में कोरोना से निपटने के लिये वेंटिलेटर दिये गये थे. झारखंड को पीएम केयर फंड से 460 वेंटिलेटर उपलब्ध कराये गये थे. पर, रांची सहित कुछ जिलों को छोड़ दें तो राज्य के अधिकतर जिलों में वेंटिलेटर आज भी उपयोग में नहीं आ पाये हैं. कहीं फिट हैं पर डॉक्टर और टेक्नीशियन के अभाव में फंक्शनल नहीं हैं तो कहीं वेंटिलेटर गोदाम में ही पड़े हैं.

सिमडेगा जिला के सिविल सर्जन से हमने स्थिति जानने के लिए बात की तो उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर और टेक्नीशियन के वेंटिलेटर का इस्तेमाल कैसे होगा. हमारे जिले को 10 वेंटिलेटर तो मिले हैं पर उपयोग नहीं हो पा रहा.
वहीं लातेहार के सिविल सर्जन ने कहा कि हमें 12 वेंटिलेटर मिले हैं, पर अभी लगाने की प्रक्रिया ही चल रही है. आधे लगाये जा चुके हैं. मतलब एक साल तक वेंटिलेटर गोदाम में ही पड़े रहे. उन्होंने बताया कि डॉक्टर और टेक्नीशियन भी नहीं हैं. जल्द ही सुचारू कर लिये जाएंगे.

इससे पहले विधायक लंबोदर महतो ने भी विधानसभा में संसाधन के अभाव में वेंटिलेटर के उपयोग नहीं हो पाने और गोदाम में पड़े रहने की बात कही थी.

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रांची के सदर अस्पताल में वेंटिलेटर हैं और उपयोग में हैं. कोडरमा सदर अस्पताल में 6 वेंटिलेटर हैं, तीन का ही इस्तेमाल हो पा रहा है. गिरिडीह में भी 6 वेंटिलेटर हैं, पर डॉक्टर नहीं होने से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. सिमडेगा जिले में 12 वेंटिलेटर है पर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. लातेहार जिला में भी 12 वेंटिलेटर हैं और संसाधनों की कमी के कारण उपयोग नहीं हो पा रहा है. बोकारो सदर अस्पताल में भी डॉक्टर और टेक्नीशियन के अभाव में वेंटिलेटर बिना उपयोग के पड़ा हुआ है.

कोरोना में क्यों जरूरी है वेंटिलेटर

राज्य में कोरोना के मामलों में उछाल देखा जा रहा है. ऐसे में मरीजों को वेंटिलेटर की भी जरूरत पड़ सकती है. कोरोना वायरस ड्रॉपलेट के जरिये इंसानी शरीर में पहुंचता है. शुरुआती चरण में इसका असर गले में दर्द और खरास के तौर पर होता है. तेज बुखार के साथ निमोनिया के लक्षण उभरना शुरू होते हैं. फिर से फेफड़ों को निष्क्रिय करना शुरू करता है.

जिस इंसान की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है उसे वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन उम्रदराज या पहले से गंभीर रोग से पीड़ित लोगों में इसी वक्त वेंटिलेटर की जरूरत होती है. कोरोना के मामलों में गंभीर संक्रमण का प्रतिशत कम है लेकिन इसके तेज फैलाव की वजह से ये उम्रदराज या बीमार लोगों में ज्यादा मुश्किलें खड़ी करता है.

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