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समाज के लिए कुछ करने की सोच ने ‘परी’ को बना दिया ऑस्ट्रेलियन एंबेसडर

उम्र से कहीं ज्यादा हैं उपलब्धियां, लड़कियों के लिए प्रेरणा है परी

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Chhaya

Ranchi: उम्र महज 22 साल लेकिन उपलब्धि ऐसी की उम्रदराज लोग भी तरसे. 22 साल की परी सिंह ऑस्ट्रेलियन एंबेसडर बन गयी. हैरान होने की जरूरत नहीं, परी सिंह आज उन लड़कियों के लिए मिसाल है, जो गांव-घर की दहलीज के बाहर पैर रखने से घबराती हैं. जमशेदपुर के पटमदा प्रखंड के लावा गांव की रहने वाली परी ने छोटी सी उम्र में कई उपलब्धियां हासिल की है.
11 अक्टूबर 2018 को इन्हें एक दिन के लिए ऑस्ट्रेलियन एंबेसडर बनने का मौका मिला.

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जहां इन्होंने दिल्ली में यूनिसेफ की ओर से चल रहे कई स्कूल में जाकर देखा कि कैसे युवक-युवतियों को पढ़ाई के साथ सिलाई, पाक कला, रोबोटिक क्लासेस दिये जाते हैं. इस दौरान आस्ट्रेलियन डेलीगेट्स के साथ उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के मुद्दों पर भी चर्चा की. परी ने बताया कि इस दिन जानकारी हुई कि विदेशों और हमारे देश के स्कूलों की शिक्षा में कितना बड़ा फर्क है.

16 लड़कियों को पीछे छोड़ परी हुई सेलेक्ट

एक दिन के लिये ऑस्ट्रेलियन एंबेसडर बनने के लिये देश भर से 16 लड़कियों को चयनित किया गया था. जिन्हें प्लान इंडिया, यूनिसेफ और नव जागृति केंद्र की ओर से 13 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण में परी की उपलब्धियों और परफार्मेंस के कारण उन्हें ऑस्ट्रेलियन एंबेसडर बनने का मौका मिला.

अंर्तराष्ट्रीय यूथ चैंपियन अवॉर्ड मिला

प्लान इंडिया की ओर से परी को 27 जुलाई 2018 को अंर्तराष्ट्रीय यूथ चैंपियन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. यूनिसेफ की ओर से इनके बेहतर कार्य के लिये इनके नाम की अनुशंसा की गयी थी. इस दौरान उन्हें मशहूर एक्टर अनिल कपूर और ऑस्ट्रेलियन एंबेसडर हरिंदर सिद्धू ने सम्मानित किया.

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महिला और बाल अधिकार पर करती हैं जागरूक

परी का चयन उनके कार्य के लिये किया गया. 2016 से परी यूनिसेफ, नव जागृति केंद्र और प्लान इंडिया की ओर से चलाये जा रहे संयुक्त कार्यक्रम संभव से जुड़ी हैं. जिसके तहत ये बाल अधिकारों पर कार्य करती है. सुदूर गांवों में जाकर ये ग्रामीणों को जागरूक करती हैं. वहीं झारखंड स्टेट लाइवलीवुड प्रमोशन सोसायटी से भी ये जुड़ी हैं, जहां ये महिलाओं को घरेलू हिंसा, बाल विवाह, महिला अधिकार आदि के लिये जागरूक करती हैं.

आसपास के घरों से मिली प्रेरणा

परी ने बताया कि गांव के लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती. जिस चीज को ये देखते आते हैं, उसे ही दिनचर्या समझ लेते हैं. फिर चाहे वो घरेलू हिंसा ही क्यों न हो. आसपास के घरों में देखते हुए कई बार लगा कि इस क्षेत्र में काम करना चाहिये. ग्रामीण महिलाओं को उनके अधिकरों से जागरूक करना काफी जरूरी है.

एक साल पूर्व बनी एक दिन के लिए बीडीओ

साल 2017 में परी एक दिन के लिये पटमदा प्रखंड की बीडीओ भी बनी हैं. तब भी इनका चयन यूनिसेफ, नव जागृति केंद्र और प्लान इंडिया की ओर से चलाये संयुक्त कार्यक्रम संभव की ओर से किया गया था. इनके बेहतर कार्य को देखते हुए यूनिसेफ की ओर से इनका चयन बीडीओ के लिये किया गया था. तत्कालीन बीडीओ सच्चिदानंद महतो के साथ इन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें महिला और बाल अधिकारों पर चर्चा की. इसके साथ ही साप्ताहिक बाजार में जाकर इन्होंनें कई लीटर शराब फेंक दी थी. इनके इस कार्य की काफी सराहना हुई थी.

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किसान हैं परी के पिता

परी का पारिवारिक पेशा खेती है. इनके पिता किसान हैं. वहीं इनके बड़े भाई पढ़ाई कर रहे हैं. परी ने बताया कि निम्न परिवार से होने के कारण हर चीज के लिये काफी तकलीफ उठानी पड़ी है. कई बार एडमिशन के लिये पैसे नहीं होते थे, ऐसे में लेट फाईन देकर एडमिशन लिया गया. उन्होंने कहा कि लेकिन कभी भी हिम्मत नहीं हारी. कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो एक बार में मिल गयी हो, लेकिन ये है कि परिवार ने हमेशा मेरे कार्य में सहयोग दिया.

बैंक में है कार्यरत

परी समाज सेवा के साथ अपने पढ़ाई और अपने घर को भी सहयोग करती हैं. ये पटमदा ब्लॉक स्थित स्टेट बैंक में बैंक सखी के पद पर कार्यरत है. इसके साथ ही ये खुद की पढ़ाई भी कर रही है. वर्तमान में परी जमशेदपुर ग्रेजुएट कॉलेज से केमेस्ट्री में ग्रेजुएशन कर रही हैं. और सेकेंड ईयर में है.

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