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आइएएस गोपीनाथन ने दिया इस्तीफा, कहा- अभिव्यिक्त की आजादी नहीं, अपनी आवाज वापस पाने को उठाया यह कदम

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Thiruvananthapuram: दादर नगर हवेली में तैनात 2012 बैच के आइएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया. वह यूनियन टेरिटरी कैडर के अधिकारी थे. गोपीनाथन उस वक्त चर्चा में आये थे जब केरल में आयी बाढ़ में उन्होंने राहत और बचाव कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था. वे इन दिनों दादर नगर हवेली में पावर एंड नॉन कन्वेंशनल ऑफ एनर्जी के सेक्रेट्री पद पर कार्यरत थे. अपने इस्तीफे के पीछे का कारण उन्होंने बताया कि उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से लग रहा था कि वे अपनी सोच को आवाज नहीं दे पा रहे हैं. अपनी अवाज वापस पाने के लिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया. ऐसी भी चर्चा है कि वो मौजूदा प्रशासनिक कार्यशैली से खुश नहीं थे.

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सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

गोपीनाथन कश्मीर कैडर के चर्चित आइएएस अधिकारी शाह फैसल के बाद सबसे कम उम्र में अपनी सर्विस से इस्तीफा देने वाले दूसरे आइएएस अधिकारी बन गये हैं. अपने भविष्य के बारे में उन्होंने अभी तक कुछ तय नहीं किया है. वह अभी अपने इस्तीफे पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से देश में हो रही घटनाओं से क्षुब्ध था. बड़ी संख्या में लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिये गये थे. सबसे बड़ी बात कि इस पर प्रतिक्रया की भी कमी थी. हम लोग इसे ठीक समझ रहे थे. मैं यह देख रहा था कि मैं कैसे इन सब का हिस्सा हो सकता हूं. मैंने सोचा कि यदि मेरे पास एक अखबार होता, तो पेज वन पर मैं सिर्फ बड़े अक्षरों में ‘19’ छापता, क्योंकि आज 19वां दिन है.

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संदीप दीक्षित ने भी इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि इतने माह के बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नया अध्यक्ष नहीं चुन सके. इसका कारण यह है कि वह सब यह सोच कर डरते हैं कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे.

उन्होंने कहा कि हम नौकरी में इसलिए आते हैं कि हमें लगता है कि लोगों की आवाज बन सकेंगे, पर अंत यह होता कि हमारी खुद की आवाज भी छिन जाती है. लोकतंत्र में जैसा हांगकांग या अन्य देशों में होता है, सरकार को अपने फैसले लेने का अधिकार होता है, पर जनता को उन फैसलों पर प्रतिक्रिया करने का भी अधिकार होता है. यहां हमने एक निर्णय लिया और लोगों को भी बंदी बना लिया. हम लोगों को इसकी भी इजाजत नहीं कि इस पर कुछ बोल सकें. यह खतरनाक है.

आपको बता दें कि गोपीनाथन कन्नन तब चर्चा में आये थे जब उन्होंने 2018 में केरल में आयी भीषण बाढ़ के दौरान राहत सामग्री अपने कंधे पर रख कर लोगों तक पहुंचायी थी. उस दौरान पूरे देश में उनके इस कार्य की सराहना हुई थी.

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चुनाव के दौरान भी चर्चा में रहे

वहीं पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग से भी मौजूदा यूटी प्रशासन के बड़े अधिकारियों की शिकायत की थी कि उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. इसके बाद उन्हें सिलवासा कलेक्टर पद से हटा कर कम महत्व के विभाग की जिम्मेदारी दे दी गयी थी. गोपीनाथन ने सिलवासा कलेक्टर रहते हुए सराहनीय कार्य किया था.

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