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IAS राजीव रंजन किसी काम के नहीं, रिश्वत के लिए रखते हैं बिचौलिए, महिलाओं के साथ भी आचरण ठीक नहीः रिपोर्ट

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Akshay Kumar Jha

Ranchi, 25 November:  जिले भर में अगर कोई यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस या आईपीएस बनता है, तो उस जिले का नाम लोग फख्र से लेने लगते हैं. और जब वो शख्स काम करना शुरू करता है, तो उनसे कई तरह की उम्मीद लोगों को होने लगती है. सिस्टम में शामिल होते ही वो ब्यूरोक्रेट कहलाते हैं. और ब्यूरोक्रेसी को देश का स्तंभ ही नहीं बल्कि आधार माना जाता है. एक ऐसे ही ब्यूरोक्रेट का पर्दाफाश हुआ है. उसकी काली करतूतों की एक तीन पन्नों की रिपोर्ट तैयार हुई है. रिपोर्ट को तैयार करने वाले झारखंड के महिला बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा के प्रधान सचिव मुखमीत एस भाटिया हैं. उन्होंने अपने ही जुनियर महिला बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा के निदेशक, प्रोजेक्ट डायरेक्टर JSWD और वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट तेजस्वनी के चीफ ऑपरेटिंग अफसर राजीव रंजन की रिपोर्ट तैयार की है. प्रधान सचिव मुखमीत एस भाटिया की यह सीक्रेट रिपोर्ट लीक हो गयी. रिपोर्ट में राजीव रंजन के कालों कारनामों का पूरा विवरण है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे राजीव रंजन के गैर जिम्मेदाराना रवैये की वजह से हर वो विभाग जिससे वो जुड़े हैं उसका बंटाधार हो रहा है. राजीव रंजन का अपने कार्यालय के महिलाओं के साथ आचरण ठीक नहीं है. वो एक बिचौलिए के जरिए विभाग को सामान सप्लाई करने वाली एजेंसियों से पैसा वसूलते हैं. अपने सीनियर की बात नहीं मानते हैं. प्रधान सचिव मुखमीत एस भाटिया ने ये रिपोर्ट सरकार को भेजी है. 

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क्या है पूरी रिपोर्ट प्वाइंट्स में जानिए

– IAS राजीव रंजन की पहचान किसी बहुत अच्छे अधिकारी के रूप में नहीं थी. ना पर्सनली और ना ही प्रोफेसनली.

– पहले दिन से ही मैंने (मुखमीत एस भाटिया) राजीव को बताया कि उन्हें किन सुधारों की जरूरत है. क्योंकि उनके पास दो काफी महत्वपूर्ण बच्चे और महिलाओं के कल्याण संबंधी योजनाओं की जिम्मेदारी थी.
 

– साथ ही योजनाओं के लिए उनके जिम्मे काफी ज्यादा राशि की भी जिम्मेदारी थी.– एक अफसर के कोई गुण नहीं है राजीव रंजन में.

– बिना झिझक के मैं (मुखमीत एस भाटिया) यह कह सकता हूं कि वो किसी योग्य नहीं है.

– उनका व्यवहार कठोर और कर्कस है.

– अपने साथ काम करने वालों पर चीखते हैं.

– काफी ईर्ष्यालु स्वभाव के हैं.

– उनके साथ काम करने वाली दो महिलाएं, जब मुझसे मिलीं तो उनकी आंखों में आंसू थे.  

– राजीव रंजन ने कार्यालय में ऐसा माहौल बना दिया है, जिससे महिलाओं का वहां काम करना मुश्किल हो गया है.

– राजीव रंजन ने अपने साथ काम करने वालों का मोराल तोड़ दिया है.

– लीडरशिप नाम की कोई चीज है ही नहीं.

– ना ही टीम लीड करने की क्षमता है और ना ही कोई नजरिया.

– तेजस्वनी टीम के लिए काम करने वाले कर्मियों को मोटीवेट करने के बजाय. उन्होंने एक ऐसा माहौल कार्यालय में तैयार किया है जिससे शायद ही कोई काम हो सके.

-मीटिंग के लिए कभी समय पांबद नहीं रहे. पिछले पांच महीने में एक भी मीटिंग में वो समय पर नहीं पहुंच सके. एक बार की बात है. भारत सरकार के महिला एवं कल्याण विभाग के सचिव के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उन्हें शामिल होना था. वो एक घंटा देर से पहुंचे. जबकि मैं (मुखमीत एस भाटिया) 10 मिनट पहले पहुंच कर मीटिंग शुरू होने का इंतजार कर रहा था.

– उन्हें अपने काम को इग्नोर करने की आदत है. उनका व्यहवार काफी घटिया है. और वो किसी नजरिए से प्रोफेशनल नहीं लगते हैं.   

-उनका डिपार्टमेंट जिस सोसाइटी के लिए काम करता है. उसके प्रति वो जरा भी जिम्मेदारी नहीं निभाना चाहते हैं. काम के प्रति वो जरा भी प्रतिबद्ध नहीं है.

– वो किसी तरह का कोई रोल मॉडल नहीं है. वो किसी भी संस्थान के लिए जहां गुड गवर्नेंस की बात होती है, एक परेशानी ही साबित होंगे.

– विभाग में सीनियर अधिकारियों के निर्देशों का पालन उन्होंने कभी नहीं किया. उदाहरण के तौर पर, वो जिस विभाग के निदेशक हैं. वहां से स्कूली बच्चों को किट बांटे जाने वाले काम में गलतियां हो रही थीं. इस ओर मैंने (मुखमीत एस भाटिया) उनका ध्यान चार से पांच बार दिलाया. लेकिन हर बार उन्होंने मेरी बात को नजरअंदाज किया और गलतियां दोहराते रहे.

– जब उन्होंने JSWD और तेजस्वनी प्रोजेक्ट का प्रभार दिया गया. वो 25 अक्टूबर को मेरे (मुखमीत एस भाटिया) कार्यालय में दोपहर करीब 12 बजे आए. मुलाकात के दौरान उन्होंने उस आदेश का विरोध किया, जिसके तहत मंत्रालय की तरफ से उन्हें JSWD और तेजस्वनी का प्रभार देने का निर्देश दिया गया था. बहरहाल, मैंने उन्हें किसी भी हाल में प्रभार उसी दिन ग्रहण करने का आदेश दिया. उस वक्त तो उन्होंने बात मान ली. लेकिन उन्होंने छह दिन बाद 31 अक्टूबर को प्रभार लिया.

-वो अपने पास किसी भी फाइल को दो महीने तक रखते हैं. और बैकडेट से सिगनेचर कर फाइल आगे बढ़ाते हैं.

– विभाग के निदेशक कार्यालय और तेजस्वनी विभाग का काम उनके गैर जिम्मेदाराना रवैये की वजह के कारण ध्वस्त होने की कगार पर है.

– वो JSWD और तेजस्वनी के स्टाफ को वेतन देने में बिना बात देरी करते हैं. त्योहार के मौसम में भी उन्होंने स्टाफ का दो महीने का वेतन रोके रखा. आखिरकार मुझे (मुखमीत एस भाटिया) मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा.

– उनके अनुचित व्यवहार की वजह से तेजस्वनी योजना को काफी नुकसान पहुंचा है. योजना अपने तय समय से चार महीने पीछे चल रही है. देरी से ज्यादा नुकसान तेजस्वनी के युवा टीम के सदस्यों का हुआ है. उनका काम के प्रति जोश ही खत्म हो गया है. युवा टीम उनके साथ अब काम ही नहीं करना चाहती.

-सामाजिक चीजों के प्रति उनकी समझदारी ना के बराबर है. पांच महीने उनके साथ काम कर दावे के साथ कह सकता हूं कि तेजस्वनी प्रोजेक्ट के बारे में उन्हें जरा सी भी जानकारी नहीं है. मुझे ऐसी एक भी घटना याद नहीं है जिससे उनकी समझदारी का परिचय विभाग को या मुझे (मुखमीत एस भाटिया) मिला हो.

-वो अपने विभाग में सप्लाई करने वाले एजेंसी से पैसों की डिमांड बिचौलियों के जरिए करते हैं. हालांकि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. मामले को किसी एजेंसी को जांच के लिए दिया जाना चाहिए. कई सूत्रों से पता चला है कि वो किसी ‘राज’ नाम के शख्स से एजेंसियों पर दबाव बनवाते थे. जिसका फोन नंबर 7479405853 है.

– वर्ल्ड बैंक की टीम ने भी इस बात की जानकारी दी कि राज नाम के इस बिचौलिए के जरिए एक एनजीओ पर पैसे देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. दबाव एक एमओयू करार करने कि लिए बनाया जा रहा था. इस बात की जानकारी मुझे (मुखमीत एस भाटिया) एनजीओ ने अनऑफसियली तरीके से दी.

– सामान सप्लाई करने वाली एजेंसियों को पैसे देने में बिना बात देरी किया करते हैं.

– वो तेजस्वनी प्रोजेक्ट के कर्मियों पर नकली टैक्सी बिल पर साइन करने का दबाव बनाते हैं. जो कि उनका अपना पर्सनल पटना और आस-पास आने-जाने का बिल हुआ करता है.

– महिलाओं के साथ राजीव रंजन का व्यवहार ठीक नहीं है. कल्याण विभाग के निदेशक कार्यालय और तेजस्वनी प्रोजेक्ट में काम करने वाली महिलाओं के बीच राजीव रंजन को लेकर हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती है. वो हमेशा महिलाओं को अपने चेंबर में बिना बात के बुलाते रहते हैं. एक ऐसी युवा महिला जिन्होंने अभी हाल में ही तेजस्वनी प्रोजेक्ट ज्वाइन किया है. उसके साथ राजीव रंजन ने कुछ ऐसा किया जिससे वो सदमे में है. मामले पर वो कुछ इसलिए नहीं बोलना चाहती क्योंकि उसे डर है कि उसकी नौकरी चली जाएगी.

– इन पांच महीनों में मैंने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की. लेकिन, एक बार भी मुझे ऐसा नहीं लगा कि उनमें कोई सुधार है. उन्हें तत्काल प्रभाव से विभाग से दूर किया जाना चाहिए. जितने दिन वो विभाग में बने हुए हैं उतना दिन विभाग खतरे में है. खतरा इतना है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

– जहां तक कि उनकी ईमानदारी का मुद्दा है Department of Personal and Administration And Reforms राजीव रंजन के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.

– अपने 27 साल के करियर में मैंने जो पांच महीने राजीव रंजन के साथ काम किया वो मेरा सबसे बुरा तजुर्बा था. अभी तक के सबसे खराब और बुरे आईएएस अधिकारी राजीव रंजन ही मिले. इन्हें किसी भी संवेदनशील काम में नहीं लगाया जा सकता. जब तक ये अपने आप में बड़ा बदलाव नहीं लाते हैं.

 

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