न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

आज तक इतनी हठधर्मी और अड़ियल सरकार मैंने नहीं देखी : प्रदीप यादव

159
  • झाविमो विधायक ने कहा- कागजी घोड़े दौड़ाती है यह सरकार, असफलता को छिपाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है
  • पिछड़ों के नाम पर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनते हैं, पर पिछड़ों की चिंता नहीं करते
eidbanner

Kumar Gaurav

Ranchi : आज तक इतनी हठधर्मी और अड़ियल सरकार मैंने नहीं देखी. सरकार, खासकर मुख्यमंत्री को छठी जेपीएससी मुख्य परीक्षा स्थगित करने को लेकर विचार करना चाहिए. उनके मंत्रिमंडल के सदस्य भी चाहते हैं कि परीक्षा स्थगित हो जाये. सरकार की हठधर्मिता की वजह से राज्य के युवा परेशान हैं. यह कहना है झाविमो के केंद्रीय महासचिव और विधायक प्रदीप यादव का. उन्होंने जेपीएससी में बाउरी कमिटी की अनुशंसा नहीं मानने को लेकर भी सरकार और जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जतायी है. जेपीएससी के अलावा कई अन्य मुद्दों को लेकर न्यूज विंग से विधायक प्रदीप यादव ने बात की. पढ़िये बातचीत के प्रमुख अंशः-

सवाल : छठी जेपीएससी मुख्य परीक्षा को लेकर छात्र आंदोलनरत हैं, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक परीक्षा स्थगित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार कोई स्टैंड नहीं ले रही. इस पर क्या कहेंगे?

जवाब : आज तक मैंने इतनी हठधर्मी और अड़ियल रवैया रखनेवाली सरकार नहीं देखी. इन्हें न तो युवाओं का दर्द है, न किसानों का दर्द है और न ही आमजनों का दर्द है. केवल सत्ता में कैसे बने रहें, दिल्ली के हुक्म को कैसे जमीन पर उतारें, बस इसी काम में लगी रहती है यह सरकार. और, जेपीएससी का जो मामला है, वह पिछले एक-डेढ़ साल से चल रहा है. पीटी परीक्षा में भी इन्होंने आरक्षण हटा दिया है. उस समय जब यह मामला आया, तो मंत्रिमंडल के ही एक मंत्री अमर बाउरी जी की अध्यक्षता में एक समिति बनी और उस समिति ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी कि अन्य राज्यों में पीटी में आरक्षण है. यूपीएससी में आरक्षण है कोटिवार. यहां भी आरक्षण होना चाहिए और कोटिवार पंद्रह गुणा रिजल्ट निकाला जाये, उन्होंने इसकी अनुशंसा की. इसके बावजूद सरकार ने किसके दबाव में रिजल्ट जारी किया. इसमें इतनी त्रुटियां हैं कि कुछ कहा ही नहीं जा सकता. इसको सामने लाने के बाद भी सरकार अड़ियल रवैया अपनाये हुए है. युवा परेशान हैं, कभी सत्ता पक्ष के पास जाते हैं, कभी प्रतिपक्ष के पास जाते हैं. 28 से परीक्षा है. मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए. उनके मंत्रिमंडल के सदस्य भी इस बात से सहमत हैं कि मुख्य परीक्षा रुकनी चाहिए. इस पर विचार हो जाने के बाद ही आगे इस परीक्षा को कंडक्ट कराना चाहिए.

सवाल : एक लाख छह हजार युवाओं को रोजगार देने का दावा सरकार कर रही है. कितना सही है?

जवाब : देखिए, कागजी घोड़े दौड़ाती है यह सरकार. लोगों को भ्रम में रखती है. अपनी असफलता को छिपाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है यह सरकार. उसी हथकंडे का भाग है यह भी. एक लाख लोगों को इन्होंने रोजगार दिया नहीं. ऐसे लोग, जो पहले से काम कर रहे थे, ऐसे लोगों को भी इन्होंने सर्टिफिकेट देने का काम किया. अगर आप देखें, कौशल विकास की जो गाइडलाइन तय है, उसके हिसाब से आपको मिनिमम वेज देना होगा. यह सरकार तो अपना मिनिमम वेजेज देना नहीं चाहती. एक तो कुशल मजदूरों का भी मिनिमम वेजेज है, सरकार उसको भी नहीं देना चाहती. पिछली बार जो 27 हजार युवाओं को रोजगार देने का दावा किया था, उनको भी सरकार के सिस्टम ने बताया कि 24 हजार लोग नौकरी में नहीं हैं, वापस आ गये हैं. आधे से अधिक ने तो ज्वॉइनिंग ही नहीं की. इस एक लाख की भी वही झूठी अफवाह है. मैं कह सकता हूं कि यह कौशल विकास के नाम पर ठगी है. उनके मंत्री ने ही इस पर जांच करते हुए सीएम पर भरोसा नहीं करते हुए भारत सरकार के मंत्री को लिखा है. सिर्फ धंधा बना लिया है इसे. किसी को न हुनर पैदा होता है, न तो नौकरी मिलती है. यह नौजवानों के साथ सीधे-सीधे धोखा है.

सवाल : सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं देना चाहती. आपका स्टैंड क्या है?

जवाब : पहली बात तो यह कि मुख्यमंत्री आधी-अधूरी बात करते हैं. जब मैं मंत्री था, बाबूलाल मुख्यमंत्री थे, हमारी सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़ों के लिए लाया था. कोर्ट ने इसे टर्न डाउन कर दिया. तमिलनाडु सरकार 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को लांघनेवाली थी. कोर्ट ने यह कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आलोक में सरकार फैसला दे सकती है. 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय भी आ गये. कई राज्य उस 50 प्रतिशत की सीमा को लांघे हुए हैं. भारत सरकार ने खुद लांघा है 10 प्रतिशत. जब भारत सरकार सीमा को लांघ सकती है और समय परिस्थिति उनके अनुकूल है. राज्य में पिछड़ों की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है. 14 प्रतिशत से बढ़ाकर आरक्षण 27 प्रतिशत कर देना चाहिए. कई जिलों में तो जिलावार आरक्षण पिछड़ों के लिए शून्य है. आरक्षण बढ़ा देने से पिछड़ों में जो गुस्सा है, उसमें हम कुछ न कुछ कमी ला पायेंगे. इसलिए मैं मुख्यमंत्री के सामने इस विषय को लाया. मुझे लगता है भाजपा नेता पिछड़ों के नाम पर मुख्यमंत्री बनते हैं, प्रधानमंत्री बनते हैं, पर पिछड़ों की चिंता नहीं है उनको.

सवाल : सरकार ने अपने बजट में कहा कि उन्होंने 2620 लोगों को हज पर भेजा है, जबकि मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वे खुद के पैसे से हज पर जाते हैं. हज पर मिलनेवाली सब्सिडी को भी खत्म कर दिया गया है. इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब : देखिए, हमें लगता है कि एक तो अल्पसंख्यक, मुसलमान, ईसाइयों के लिए सरकार ने एक भी योजना चलायी नहीं. कुछ झूठ-सच कहकर सरकार अपने आपको प्रेजेंट करना चाहती थी. प्रेजेंट करने में झूठी बातों का सहारा लेकर ही सरकार ने इन तथ्यों को रखा है. जब बजट भाषण पर चर्चा होगी, हम इन तथ्यों को रखने की कोशिश करेंगे.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: