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मजदूर हूं, मुझे मजदूर के दर्द का अहसास है : रघुवर दास

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  • मुख्यमंत्री ने कहा – 1400 करोड़ का निवेश हुआ सुनिश्चित, आठ हजार लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मिलेगा रोजगार
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Jamshedpur : मैं मजदूर हूं और एक मजदूर की पीड़ा मैं समझ सकता हूं. अगर एक खदान या फैक्ट्री किसी कारणवश बंद हो जाती है, तो वहां काम करनेवालों की मानसिकता, उनकी आर्थिक स्थिति पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है, यह समझ सकता हूं. उन सभी मजदूरों की पीड़ा को समझते हुए 2001 से बंद खदान का शुभारंभ कर मुझे आत्मिक खुशी हो रही है. आप खुश रहेंगे, तो मैं खुश रहूंगा. यह कार्य सार्थक हुआ क्षेत्र के सांसद के अथक परिश्रम एवं केंद्र और राज्य सरकार के प्रयास से. इस डबल इंजन की सरकार ने एक बार फिर से नयी भोर का आगाज किया है. अब नयी भोर के साथ वीराने में हरियाली और रोजगार का सृजन होगा. ये बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहीं. वह शनिवार को घाटशिला के जादूगोड़ा में एचसीएल कॉपर लिमिटेड की राखा माइंस और खान चापडी के भूमि पूजन कार्यक्रम में बोल रहे थे.

भारत तांबा का निर्यातक देश बने, सिंहभूम निभाये बड़ी भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में तांबा की उपलब्धता कम है. देश को तांबा अन्य देशों से आयात करना पड़ता है. वर्षों से बंद इस खदान और यहां काम करनेवाले गरीबों की चिंता किसी ने नहीं की. लेकिन, विगत चार वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार ने बंद पड़ी खदान को पुनः प्रारंभ करने का कार्य किया. यह आपके सही चुनाव का प्रतिफल है. एक अच्छा जनप्रतिनिधि की यही पहचान है कि वह लोगों के दुःख-दर्द को समझे. केंद्र और राज्य सरकार का प्रयास है कि भारत तांबा का निर्यातक बने और सिंहभूम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाये.

बजट किसान, गरीब और मजदूरों को समर्पित, राज्य और केंद्र सरकार देगी किसानों को राशि

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का अंतरिम बजट किसान, गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग को समर्पित है. आजादी के बाद सहयोगात्मक और रचनात्मक बजट पेश किया गया. संगठित मजदूरों के साथ असंगठित मजदूरों की चिंता केंद्र सरकार ने की. अब असंगठित मजदूरों को 100 रुपये प्रति महीना और 60 साल की उम्र में तीन हजार रुपये की पेंशन सुनिश्चित हुई. वहीं, किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सम्मान योजना के तहत प्रति एकड़ छह हजार रुपये उनके कृषि कार्य हेतु दिये जायेंगे. जबकि, राज्य सरकार मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के तहत भी प्रति एकड़ पांच हजार रुपये किसानों को देगी. अब एक एकड़ भूमि वाले किसान को न्यूनतम 11 हजार और पांच एकड़ भूमि वाले किसान को अधिकतम 31 हजार रुपये दिये जायेंगे. अन्नदाता के चेहरे पर मुस्कान लाना हमारा उद्देश्य है.

अपनी संस्कृति बचायें और नयी पीढ़ी को सिंचित करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ बाहरी ताकतें आदिवासियों की संस्कृति, बिरसा आबा, सिदो-कान्हू की संस्कृति को बर्बाद करना चाहते हैं. ऐसी शक्तियों से मिलकर मुकाबला करना है. हम ऐसी संस्कृति का निर्माण करें, जिससे आनेवाली पीढ़ी इस अनुपम संस्कृति से सिंचित हो सके. संतालपरगना में इस दिशा में लोगों में गजब की जागरूकता आयी है. इस संस्कृति, परंपरा और भाषा को संजोने के लिए राज्य सरकार ने ओल चिकि भाषा में एक से पांच कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने का प्रावधान किया है. जल्द इस भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति होगी.

अपनी बेटियों का निबंधन स्कूल में करायें, सरकार एक बेटी को 70 हजार देगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की योजनाओं से आम लोगों को आच्छादित करना है. राज्य की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री सुकन्या योजना लागू हो गयी है. अभिभावक अपनी बच्चियों का निबंधन स्कूल में करायें. सरकार बेटी के जन्म से लेकर शादी तक उनके सर्वांगीण विकास के लिए 70 हजार रुपये सहायता राशि उपलब्ध करायेगी.

15 दिनों में जमीन का आवंटन हुआ

इस मौके पर सांसद विद्युतवरण महतो ने कहा, “यह खुशी का दिन है. वर्षों बाद आज माइंस खुल रही है. मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद, आपके सार्थक प्रयास से बंद माइंस खुल रही हैं और रोजगार का सृजन हो रहा है. मुख्यमंत्री जी ने मात्र 15 दिनों के अंदर राखा चापडी माइंस के लिए जमीन का आवंटन कर रोजगार और विकास का मार्ग प्रशस्त किया.”

18 वर्ष की लंबी प्रतीक्षा समाप्त हुई

घाटशिला विधायक लक्ष्मण टुडू ने कहा कि 18 वर्ष की लंबी प्रतीक्षा समाप्त हुई. अब रोजगार का और अधिक सृजन होगा. यह केंद्र और राज्य सरकार की देन है कि घाटशिला में बंद माइंस खुली और धालभूमगढ़ में एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ.

सात जुलाई 2001 को बंद हो गया था राखा माइंस में खनन कार्य

गौरतलब है कि राखा माइंस वर्ष 1971 में प्रारंभ हुई थी. यहां से उत्पादन की शुरुआत 1976-77 में हुई. आज से लगभग 18 वर्ष पूर्व सात जुलाई 2001 को झारखंड निर्माण के एक वर्ष बाद कुछ कारणों से माइंस में खनन कार्य बंद हो गया था. अब कंसंट्रेटर प्लांट के लिए झारखंड सरकार ने 90 एकड़ जमीन का आवंटन एचसीएल को किया है. राखा माइंस की उत्पादन क्षमता 1.50 मीट्रिक टन होगी एवं चापडी माइंस की उत्पादन क्षमता 1.50 मीट्रिक टन होगी. साथ ही, राखा कंसंट्रेटर प्लांट की क्षमता प्रथम चरण में 1.50 मीट्रिक टन की होगी, जो द्वितीय चरण में बढ़ाकर तीन मीट्रिक टन की जायेगी. देश का 30% तांबा सिंहभूम में, पांच साल में तांबा का उत्पादन 40 लाख टन करना सरकार का लक्ष्य है. इस अवसर पर सीएमडी, एचसीएल संतोष शर्मा, निदेशक एचसीएल अनुपम आनंद, डायरेक्टर माइनिंग एचसीएल एसके भट्टाचार्या, उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम अमित कुमार, वरीय आरक्षी अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम अनूप बिरथरे, यूनिट हेड संजय कुमार सिंह व अन्य उपस्थित थे.

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