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झारखंड में हाइड्रो पावर लाभकारी नहीं : हिमांशु

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Ranchi : ऊर्जा और वित्तीय गतिविधियों के कारण आम आदमी का जीवन प्रभावित हो रहा है. वर्तमान समय में ऊर्जा और वित्त, दोनों के बीच तालमेल काफी जरूरी है. सही तालमेल नहीं होने के कारण ही घपले होते हैं. उक्त बातें विकास मैत्री की ओर से आयोजित ऊर्जा और वित्त विषयक कार्यशाला में वित्तीय गतिविधि और संरचना विशेषज्ञ हिमांशु ने कहीं. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य में हाइड्रो पावर लाभकारी नहीं है. यह सब देश-दुनिया के पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए हो रहा है. राज्य में ऐसा प्रतीत होता है कि आदिवासियों को लूटने के लिए सरकार नियम बनाती है. फिर चाहे उनके संसाधनों का कितना भी गलत प्रयोग क्यों न हो.

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सामाजिक आंदोलन जरूरी

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हिमांशु ने कहा कि वर्तमान समय में झारखंड में सामाजिक आंदोलन की आवश्यकता है. इसमें आदिवासी समाज को सक्रिय होना होगा. ऐसा सामाजिक आंदोलन राजनीतिक पटल पर अहम भूमिका निभायेगा, तभी मूलवासियों का जल, जंगल, जमीन बच पायेगा.

हाइड्रो पावर प्लांट के लिए 67 स्थल चिह्नित

उन्होंने कहा कि झारखंड के विद्युत बोर्ड का निजीकरण किया जा रहा है, जो लूट-खसोट को मजबूती देने के लिए है. मीटर लगाकर कई बार गलत तरीके से लोगों की जेब काटी जा रही है. ऐसे में लोगों को चाहिए कि राज्य की विद्युत नीति को गंभीरता से समझें. उन्होंने कहा कि विश्व बैंक ने राज्य में करीब 67 हाइड्रो पावर प्लांट के लिए स्थल का चयन कर लिया है और इनकी डीपीआर भी तैयार हो रही है.

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उत्खनन से मानवाधिकार का हो रहा हनन

सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटबिलिटी के राजेश कुमार ने कहा कि ऊर्जा का जुड़ाव कोयले के उत्खनन से भी है, क्योंकि इसका प्राथमिक स्रोत कोयला ही है और इस कोयले के कारण झारखंड समेत देश के विभिन्न आदिवासी-दलित इलाकों में लूट-खसोट और मानवाधिकार का हनन हो रहा है. जबकि, इसका फायदा आदिवासी-दलित समाज को नहीं मिल रहा.

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ये थे उपस्थित

मौके पर फादर सोलोमोन, पुनीत मिंज, संदीप, एलिस चेरोवा, कदमा बानरा, अंबिका दास, रंजीत टोप्पो, इलियास अंसारी, ठाकुर सोरेन, कमाल अंसारी, पतिलाल हांसदा, बिमल सोरेन, मदन सुरीन, आशीष कुदादा समेत कई लोग उपस्थित थे.

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