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#HyderabadEncounter : CJI एसए बोबडे ने कहा, बदले की भावना से किया गया न्याय कभी इंसाफ नहीं हो सकता

न्याय कभी जल्दबाजी में फटाफट नहीं होना चाहिए. न्याय को कभी प्रतिशोध का रूप नहीं लेना चाहिए.

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NewDelhi :  सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने शनिवार को कहा कि बदले की भावना से किया गया न्याय कभी इंसाफ नहीं हो सकता. न्याय बदले के रूप में नहीं होना चाहिए. मेरा मानना है कि न्याय जैसे ही बदला बनेगा, वह अपना स्वरूप छोड़ देगा. जान लें कि  हैदराबाद एनकाउंटर के संदर्भ में उनका बयान काफी अहम है.  हैदराबाद में शुक्रवार तड़के एक एनकाउंटर में पुलिस ने रेप के चार आरोपियों को ढेर कर दिया था.

जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट के नये भवन के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए. मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाये तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है. कहा कि न्याय को कभी भी बदले का रूप नहीं लेना चाहिए.

#WATCH: Chief Justice of India (CJI) Sharad Arvind Bobde: I don’t think justice can ever be or ought to be instant. And justice must never ever take the form of revenge. I believe justice loses its character of justice if it becomes a revenge. pic.twitter.com/oKIHKecHqt

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न्याय कभी जल्दबाजी में फटाफट नहीं होना चाहिए

उन्होंने कहा कि देश में हुई हालिया घटनाओं ने एक पुरानी बहस फिर से छेड़ दी है, जहां इसमें कोई संदेह नहीं है कि फौजदारी न्याय प्रणाली को फौजदारी मामलों के निपटारे में लगने वाले समय के प्रति अपनी स्थिति एवं रवैये पर अवश्य ही पुनर्विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा, न्याय कभी जल्दबाजी में फटाफट नहीं होना चाहिए. न्याय को कभी प्रतिशोध का रूप नहीं लेना चाहिए.

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मुकदमे में तेजी लाने के लिए तरीके तलाशने होंगे

मेरा मानना है कि न्याय उस वक्त अपनी विशेषता या स्वरूप खो देता है जब यह बदले का रूप धारण कर लेता है. खुद में सुधार लाने के उपायों की न्यायपालिका में जरूरत है लेकिन उन्हें प्रचारित किया जाये या नहीं, यह बहस करने का विषय है.

सीजेआई ने कहा, हमें न सिर्फ मुकदमे में तेजी लाने के लिए तरीके तलाशने होंगे, बल्कि इन्हें रोकना भी होगा. ऐसे कानून हैं जो मुकदमे से पूर्व की मध्यस्थता मुहैया करते हैं. उन्होंने कहा कि मुकदमा-पूर्व अनिवार्य मध्यस्थता पर विचार करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि मध्यस्थता में डिग्री या डिप्लोमा का कोई कोर्स उपलब्ध नहीं है.

12 जनवरी 2018 को चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी

इस क्रम में चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों द्वारा पिछले साल की गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में कहा कि यह महज खुद में सुधार करने का एक उपाय भर था. जान लें कि अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने 12 जनवरी 2018 को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीकठाक नहीं है और कई ऐसी चीजें हुई हैं जो अपेक्षित से कहीं कम हैं.

सीजेआई बोबडे ने कहा, मेरा मानना है कि न्यायपालिका को खुद में सुधार करना चाहिए और नि:संदेह यह उस समय किया गया, जब संवाददाता सम्मेलन किया गया था जिसकी काफी आलोचना हुई थी. यह खुद में सुधार करने के एक उपाय से ज्यादा कुछ नहीं था और मैं इसे उचित ठहराना नहीं चाहता. सीजेआई ने कहा, सभी न्यायाधीश प्रतिष्ठित थे और विशेष रूप से न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने काफी क्षमता का प्रदर्शन किया तथा न्यायपालिका का नेतृत्व किया.

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